रमजान में अल्लाह अपने बंदों का गुनाह करते हैं माफ
Gorakhpur News - गोरखपुर में रमजान के महीने में इफ्तार प्वाइंट बनाए गए हैं जहां जरूरतमंदों को इफ्तार बांटा जा रहा है। हाजी खुर्शीद आलम खान ने बताया कि इस महीने में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करते हैं। जामिया अल इस्लाह एकेडमी में मासिक दीनी संगोष्ठी में रमजान की अहमियत पर चर्चा की गई।

गोरखपुर, निज संवाददाता। माह-ए-रमजान सब्र, भलाई, रहमत और बरकत का महीना है। शहर में छोटे काजीपुर, रेती आदि जगहों पर इफ्तार प्वाइंट बनाया गया है जहां जरूरतमंदों को इफ्तार बांटी जा रही है। इलाहीबाग के समाजसेवी हाजी खुर्शीद आलम खान ने कहा कि रमजान में अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों को माफ करते हैं। वहीं रविवार को जामिया अल इस्लाह एकेडमी, नौरंगाबाद, गोरखनाथ में मासिक दीनी बाल संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत कर नात-ए-पाक पेश की गई। मुख्य वक्ता वरिष्ठ शिक्षक मुजफ्फर हसनैन रूमी ने कहा कि इस्लामी बारह महीनों में रमजान को सबसे ज्यादा अहमियत हासिल है, क्योंकि अल्लाह ने अपने बंदों के लिए रमजान में बेपनाह बरकत और रहमत अता की है।
रमजान हर ऐतबार से खास है कि बंदा परहेजगार बन जाए। विशिष्ट वक्ता शिक्षक कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि रमजान एक ऐसा महीना है कि जिसमें किसी रोजेदार को इफ्तार कराए तो उसके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं और उसकी गर्दन जहन्नम की आग से आजाद कर दी जाती है। संगोष्ठी में वरिष्ठ शिक्षक आसिफ महमूद, अली अहमद, आयशा खातून, शीरीन आसिफ, सना खातून, सैयदा यासमीन, आरजू अर्जुमंद, गुल अफ्शा, अदीबा, फरहीन, मंतशा, सना, आफरीन, नाजिया खातून, फरहत, यासमीन अख्तर, आयशा, तानिया अख्तर आदि मौजूद रहे।
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