विकास का सनातन मॉडल ही देश को दोबारा बनाएगा विश्वगुरु : डॉ. राजेंद्र सिंह
Gorakhpur News - एमजीयूजी - विकास के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां : साझा प्रयास से सतत विकास विषय पर

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता देश के जलपुरुष कहे जाने वाले रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि सनातन विकास या विकास का सनातन मॉडल ही भारत को दोबारा विश्वगुरु बना सकता है। विकास के साथ प्रकृति का भी चिंतन भारत का सनातन विचार है। इस परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेश के लिए सुखद स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री विकास के सनातन मॉडल को प्राकृतिक के एकीकरण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। जहां विकास के साथ ही प्रकृति और पर्यावरण को बचाने का प्रतिबद्ध चिंतन भी। डॉ. सिंह मंगलवार को उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (एमजीयूजी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित विकास के साथ पर्यावरणीय चुनौतियां : साझा प्रयास से सतत विकास विषयक संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
जलपुरुष डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि जल संकट वैश्विक समस्या है लेकिन इसका स्थानीय हल निकाला जा सकता है। इसके लिए जल साक्षरता बढ़ाने की आवश्यकता है। जल संकट से बचने के लिए वाटर डिस्चार्ज व वाटर रिचार्ज में संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि विकास पर एकतरफा ध्यान देने से हमने नदियों से उनकी निर्मलता और अविरलता को छीन लिया। पश्चिम की डैम डिजाइन को भारत की नदियों पर थोप देने से ही आज पारिस्थितिकी बदलने की समस्याएं दिख रही हैं। आज देश के 365 जिले पानी के संकट से जूझ रहे हैं। जल संकट से बचने, पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत विकास की अवधारणा पर काम करने के लिए छोटे-छोटे कार्य करने चाहिए। छोटे काम से बड़े काम की कल्पना में जोखिम नहीं है और सफलता शत-प्रतिशत हो जाती है। डॉ. राजेंद्र सिंह ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के दृष्टिकोण से यूपी भगवान का लाडला बेटा है। यहां प्रचुर पानी और मिट्टी बेहतरीन है। यहां भविष्य में कोई जल संकट न हो, इसके लिए फसल पद्धति को वर्षा पद्धति से जोड़ने की जरूरत है। पर्यावरण संरक्षण हर व्यक्ति की जिम्मेदारी विशिष्ट अतिथि प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा कि पर्यावरण किसी एक व्यक्ति या संस्था से नहीं संभल सकता। पर्यावरण के संरक्षण में हर व्यक्ति और हर संस्था को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। व्यक्तिगत जिम्मेदारी से ही सामूहिक प्रयास और व्यापक परिणाम की तरफ बढ़ा जा सकता है। सबसे ज्यादा विकसित देश सबसे ज्यादा साफ-सुथरे हैं। उनका पानी स्वच्छ है और एयर क्वालिटी इंडेक्स भी। इससे स्पष्ट है कि पर्यावरण सुरक्षित रखकर भी तीव्र विकास संभव है। समृद्धि से पर्यावरण को और बेहतर बनाया जा सकता है। जापान, दक्षिण कोरिया में आठ साल तक के बच्चों को किताबी पढ़ाई की बजाय स्वच्छता के व्यावहारिक ज्ञान पर अधिक जोर दिया जाता है। इससे शुरुआती दौर से ही पर्यावरण के प्रति चेतना जागृत होने लगती है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में यूपी ने बेहतर कार्य किया एमजीयूजी के कुलपति डॉ. सुरिंदर सिंह ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सतत विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी पूरी गंभीरता से ध्यान देना होगा। अपर मुख्य सचिव वन, पर्यावरण अनिल कुमार ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में यूपी ने बेहतरीन कार्य किया है। यूपी में 95 प्रतिशत डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का ट्रीटमेंट किया जा रहा है। बड़े पैमाने पर लिगेसी वेस्ट का ट्रीटमेंट किया गया है। यूपी में लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं। इसी का नतीजा है कि हमारे यहां डॉल्फिन की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी है।
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