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राजेन्द्र सिंह की जुबानी : चौकी के सिपाही ने मुझसे मिलवाया था सहाना को

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरNewswrap
Tue, 19 Oct 2021 03:41 AM
राजेन्द्र सिंह की जुबानी : चौकी के सिपाही ने मुझसे मिलवाया था सहाना को

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

करीब 72 घंटे कोतवाली पुलिस की हिरासत में रहने के बाद सोमवार को जेल जाने से पहले एलआईयू दरोगा राजेन्द्र सिंह ने हिन्दुस्तान संवाददाता को देखकर कहा मैं निर्दोष हूं। दया खाकर मदद की और अब फंस गया हूं। राजेन्द्र सिंह ने अपनी बातें रखीं उसमें उन्होंने उसमें कितना सच और झूठ बोले, यह वही जानते हैं पर जैसा कि उन्होंने कहा वैसा ही आप के सामने है। पेश है राजेन्द्र सिंह की जुबानी, सहाना की कहानी।

नगर निगम चौकी पर तैनाती के दौरान मैं जिला अस्पताल जाता था। वह इलाका भी मेरी चौकी में ही था। एक दिन मैं जिला अस्पताल की इमजेंसी में गया था। उसी दौरान मेरी चौकी पर तैनात एक सिपाही ने सहाना से मेरी मुलाकात कराई। सिपाही ने कहा कि साहब! यह बहुत पीड़ित है इसकी मदद कर दीजिए। मैंने सहाना से पूछा क्या परेशानी है, तब उसने बताया कि उसकी शादी खलीलाबाद के समीर से हुई है और वह उसे परेशान करता है। मैंने समीर को फोन किया और कहा कि इसे परेशान करोगे तो हड्डी-पसली तोड़ दूंगा। फिर बात खत्म हो गई। हालांकि जब भी वह हॉस्पिटल की तरफ जाते वह मिल जाती थी। आर्थिक तंगी का हवाला देती थी। फिर मैंने कहा कि ऐसा करो कि जिला महिला अस्पताल में काम करने के बाद जब समय मिलता है तब मेरे किराये के कमरे की साफ-सफाई और मेरे कपड़े साफ कर दिया करो। मैं इसका तुमको अलग से पैसे दूंगा।

फिर वह ऐसा करनी लगी थी। जनवरी 2021 में जब मेरी दोबारा जिले में एलआईयू में तैनाती हुई तब मैंने बक्शीपुर में किराये का कमरा लिया था। वहां भी सहाना आती थी। कपड़ा साफ करती थी। सहाना के बेतियाहाता में मौसी और सूरजकुंड में भी रिश्तेदार रहते हैं। वह वहां से भी आती-जाती थी। उन्होंने दो कमरे का रूम लिया था वह एक कमरे में जरूरत पड़ने पर रुक भी जाती थी। उसकी आर्थिक दिक्कत पर मैं मदद भी करता रहता था पर उसके बार-बार आने और रुकने से मेरी बदनामी होने लगी थी लिहाजा मैं नाराज भी होता था, कहता था कि तुम्हारी वजह से मेरी बदनामी हो रही है। तुम मत आया करो। लेकिन वह नहीं मानती थी।

सहाना की मौत पर कहते हैं दरोगा

सहाना की जिस पोजीशन में डेडबाडी मिली उस पर उठ रहे हत्या के सवाल पर दरोगा राजेन्द्र सिंह कहते हैं, सर हम लोगों की किताब है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि अगर जमीन पर खड़ा होकर भी कोई गले में फंदा लगाए और घुटने के बल पर अचानक गिर जाए तो भी वह मर जाएगा। अगर विश्वास न हो तो घर जाकर आप करिएगा लेकिन गले के आगे अंगुली जरूर लगा लीजिएगा। वरना खतरा हो जाएगा।

समीर का ही होगा बच्चा

साढ़े तीन बजे मैं टहलने निकल गया था। उधर से लौटा तो सहाना का फंदे से लटकता शव मिला मैंने ही फोन कर कोतवाल साहब को घटना की जानकारी दी। मैं निर्दोष हूं, मदद करने की मुझे यह सजा मिल रही है। मेरे घरवालों को जबसे यह जानकारी हुई है उनका रो-रो कर बुरा हाल है। मेरी समाज में काफी इज्जत थी पर इस घटना के लिए मुझे दोषी ठहराकर मेरी सामाजिक बेइज्जती हो रही है। ऐसा नहीं है कि मैं छूट कर नहीं लौटूंगा पर इज्जत कहां से लौटेगी। सहाना के 10 महीने के बच्चे के बारे में पूछने पर दरोगा ने कहा कि वह बच्चा समीर का ही होगा और किसका है?

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