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यूपी कैबिनेट से मिली मंजूरी: फ्रेम्ड स्ट्रक्चर प्रणाली पर बनेगा पूर्वांचल का चिड़ियाघर 

गोरखपुर में बन रहे पूर्वांचल के पहले शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान का निर्माण अब फ्रेम्ड स्ट्रक्चर प्रणाली से होगा। इससे पहले इस प्राणी उद्यान का निर्माण लोड वेयरिंग पद्धति से हो रहा था। नए सिस्टम से निर्माण की वजह से लागत अधिक आएगी जिसकी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। यहां निर्माण कार्य में जुटे लोगों को कहना है कि शासन से मंजूरी और धन आवंटि होने से कार्य में तेजी आएगी।

कानपुर और लखनऊ के बाद उत्तर प्रदेश के तीसरे तथा पूर्वांचल के पहले चिड़ियाघर का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। क्षेत्रफल की दृष्टि से गोरखपुर में बन रहा यह चिड़ियाघर प्रदेश के सबसे बड़े प्राणी उद्यान कानपुर के बाद दूसरे नम्बर पर है। यह चिड़ियाघर 121.342 एकड़ में बन रहा है। इस प्राणी उद्यान की 68 एकड़ भूमि पर निर्माण एव शेष में केवल पौधे ही होंगे। यहां नेचर ट्रेल की सुविधा मिलेगी। 37.5 एकड़ वेट लैंड का इस्तेमाल प्रवासी पक्षियों के लिए होगा।

शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यहां 51 एकड़ अपलैंड पर 33 बाड़े बनाए जान रहे हैं। इनमें 32 बाड़ों का निर्माण कार्य तेजी से हो रहा है। ‌ यहां काम कर रहे लोगों का कहना है कि 121.342 एकड़ जमीन पर निर्माणाधीन इस प्राणी उद्यान का 60 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है।

निर्माण कार्य में आई तेजी
चिड़ियाघर में 4400 मीटर रनिंग में बाउंड्रीवाल और कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन के लिए 1500 मीटर की बाउंड्रीवाल का निर्माण पूर्ण हो चुका है। यहां भगवान बुद्ध और गुरु गोरखनाथ मंदिर के थीम पर विभिन्न आकर्षक संरचनाएं और भवन भी निर्मित हो रहे हैं। महात्मा बुद्ध की तांबे की बनी विशाल प्रतिमा के साथ साइनेज, गोरखनाथ मंदिर की थीम पर इंट्रेंस प्लाजा, दर्शकों की सुविधा के लिए अत्याधुनिक 4डी थियेटर, ओपेन एयर थियेटर एवं प्रशासनिक भवन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। इसके अलावा बटरफ्लाई उद्यान, अत्याधुनिक एक्वेरयिम, सांपों के लिए सर्पेन्टेरियम, हॉस्पिटल, क्वैरेन्टाइन सेंटर, रेस्क्यू सेंटर्स, किचन और इंसीनेटर के लिए सिविल वर्क काफी हद तक पूर्ण हो चुका है। 

कैबिनेट की मंजूरी से काम में आएगी तेजी
डायरेक्टर चिड़ियाघर एनके जानू ने बताया कि शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणी उद्यान का निर्माण अत्याधुनिक तरीके से किए जाने और मिट्टी की ढुलाई की दूरी काफी अधिक बढ़ जाने की वजह से लागत भी बढ़ गई है। इसके लिए वर्ष 2018 में प्रस्ताव भेजा गया था। प्रमुख सचिव और उनके सहयोगियों के निरीक्षण और स्वीकृति के बाद व्यय वित्त समिति ने भी बढ़ी लागत की स्वीकृति दे दी थी। अब कैबिनेट की मंजूरी मिल गई और धन आवंटित होने से कार्य की प्रगति और तेज हो जाएगी।

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  • Web Title:Purvanchal zoo will be constructed on framed structure scheme in Gorakhpur