Purchase of blankets of poor stuck in the conditions - शर्तों के फेर में फंस गई गरीबों के कम्बल की खरीदारी DA Image
11 दिसंबर, 2019|11:39|IST

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शर्तों के फेर में फंस गई गरीबों के कम्बल की खरीदारी

शर्तों के फेर में फंस गई गरीबों के कम्बल की खरीदारी

शासन ने बजट महीने भर पहले भेज दिया। ठंड भी आ गई। अब तो कोहरा भी पड़ने लगा। नियम और शर्तों के फेर में गरीबों को बांटने के लिए जिला प्रशासन अभी तक कम्बलों की खरीद नहीं कर पाया। शासन ने कम्बल की खरीद के लिए गाइडलाइन जारी की है और शर्त रखी है कि यह खरीदारी जेम पोर्टल के जरिए ही की जाएगी।

निराश्रितों, गरीबों, असहाय और कमजोर परिवारों को कड़ाके की ठंड से राहत दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने कम्बल बांटने का निर्देश दिया है। शासन ने निर्देश के साथ ही साथ महीने भर पहले इसके लिए बजट भी भेज दिया और समय से कम्बलों की खरीद कर वितरित कराने की हिदायत भी दे डाली। सब कुछ समय से चल रहा था लेकिन कम्बलों की खरीद में शासन की एक शर्त आड़े आ गई। यही वजह है कि बजट रहने के बावजूद खरीद नहीं हो पा रही है। शासन ने शर्त रखी है कि कम्बलों की खरीद जेम पोर्टल (गवर्नमेंट ई मार्केटिंग) के जरिये की जाय।

शासन की एक शर्त और भी है कि कम्बलों की खरीद सरकारी विभागों और शासकीय नियंत्रण में रहने वाले उपक्रमों, निगमों, परिषदों और स्वायत्तशासी संस्थाओं से ही की जाए। सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन ने जब जेम पोर्टल पर लिंक बनाया तो मानक के अनुरूप संस्थाएं नहीं थीं। संस्थाएं मिलीं भी तो उनके पास मानक के अनुरूप कम्बल ही नहीं थे। जिलों से इस समस्या की जानकारी मिलने के बाद शासन ने पोर्टल अपग्रेड करा दिया है। हालांकि अभी तक प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सकी है। हालांकि गोरखपुर जिला प्रशासन से गांधी आश्रम ने सम्पर्क किया है और आवेदन दिया है। गांधी आश्रम के कम्बल काफी हद तक मानकों के अनुरूप हैं।

30 नवम्बर से बंटना था कम्बल

शासन ने निर्देश दिया था कि 15 जुलाई तक जेम पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन हो जाए और 31 जुलाई तक तहसीलों से कम्बल की मांग ले ली जाए। 31 अगस्त तक पोर्टल पर कम्बल की बुकिंग कर ली जाए। 30 सितम्बर पर जिला मुख्यालय पर कम्बलों को आरक्षित करा लिया जाए। 31 अक्तूबर तक धनराशि की मांग हो ताकि 15 नवम्बर तक धन मिल जाए। कम्बलों की खरीदकर 30 नवम्बर तक वितरण शुरू करा दिया जाए। हालांकि गोरखपुर ही नहीं आस-पास के जिलों में भी अभी तक कम्बलों की खरीद ही नहीं हो पाई है।

2.2 किलो वजन और 235 सेंटीमीटर लम्बा चाहिए कम्बल

शासन की शर्त है कि जिला प्रशासन जिन कम्बलों की खरीद करे उसका वजह 2 किलो 200 ग्राम होना चाहिए। लम्बाई 235 सेंटीमीटर और चौड़ाई 140 सेंटीमीटर होनी चाहिए। सबसे बड़ी शर्त है कि कम्बल में 70 फीसदी ऊन होना होना चाहिए।

7 तहसीलों में बंटेंगे 35 लाख के कम्बल

गोरखपुर की सभी 7 तहसीलों, सदर, बांसगांव, खजनी, गोला, सहजनवां, चौरीचौरा और कैम्पियरगंज में कम्बल बांटने के लिए शासन ने 35 लाख रुपये भेज दिए हैं। इसके साथ ही सभी तहसीलों को 50-50 हजार रुपये अलाव जलवाने के लिए भी शासन से मिले हैं। जिला प्रशासन ने अलाव जलवाने के लिए मिली धनराशि तहसील प्रशासन को भिजवा दी है।

कम्बल खरीद के लिए जिला स्तरीय समिति

जिलाधिकारी : अध्यक्ष

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व : सचिव

वरिष्ठ कोषाधिकारी : सदस्य

उद्योग विभाग के प्रतिनिधि :सदस्य

एनआईसी का प्रतिनिधि : सदस्य

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