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गर्व है कि देश की सीमाओं की रखवाली कर रहे हैं वीर सपूत

Indian Army/Twitter

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The Border Security Force (BSF) personnel were travelling by a special train to Jammu and Kashmir wh

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पुलवामा में हुए आतंकी हमले और भारतीय वायु सैनिकों द्वारा पाकिस्तान की सीमा में घुसकर आतंकी ठिकानों पर बम गिराए जाने के बाद सीमा पर तनाव की स्थिति है। इस बात से जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना के जवानों के परिवारीजन भली-भांति वाकिफ हैं। उनका सिर गर्व से तना हुआ है। वे कहते हैं कि उनके बेटों को देश सेवा का मौका मिला है। यह सौभाग्य सबको नहीं मिलता।
‘हिन्दुस्तान’ ने बुधवार को गोरखपुर के उन जवानों के परिवारीजनों से बात की जो सेना में हैं और जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। जवानों के परिवारीजनों के सिर गर्व से तने हुए हैं। वे अपने बेटों के साथ ही साथ खुद को भी सौभाग्यशाली मान रहे हैं। उनका कहना है कि उनके बेटे देश की सीमाओं की रखवाली कर रहे हैं और पूरा देश उनके साथ खड़ा है।

सैनिकों के परिजनों ने कहा

मेरा बेटा सेना में है। जम्मू में तैनात हैं। बेटा सेना में है मुझे इसका गर्व है। पुलवामा में आतंकवादियों ने कायरतापूर्वक हमला किया। हमारे जवानों ने उसका बदला लिया। पाकिस्तान को अब भी जान लेना चाहिए। हमारा देश अमन चाहता है तो वह उसे कमजोरी न समझे।
संतराम, सहजनवां

मेरे पति बीएसएफ में हैं। इन दिनों वह श्रीनगर में तैनात हैं। पांच दिनों से उनसे बात नहीं हुई हैं। सीआरपीएफ के काफिले पर पुलवामा में आतंकी हमले के बाद से ही ठीक से बात नहीं हो सकी। हालांकि पुलवामा की घटना के बाद बातचीत में उन्होंने कहा कि जवानों की शहादत का बदला तभी पूर्ण होगा जब 400 आंतकी मारे जाएंगे।
प्रीतम यादव, खिरीडांड़, खजनी

मेरे छोटे भाई आईटीबीपी के जवान हैं। वह इन दिनों जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। उन्होंने सुबह घर पर फोन कर बात की। कुशल पूर्वक होने की बात बताई। उन्होंने कहा कि तनाव काफी है लेकिन चिंता की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत उनकी मां है। उसके लिए वह सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार हैं। 
प्रसिद्ध नारायण तिवारी, राघोपट्टी पड़री, झंगहा

मेरे पति सेना में हैं। जम्मू में तैनात हैं। बुधवार की सुबह पति से बात हुई। उन्होंने  कुशल से होने की जानकारी दी। कहा कि बार्डर पर तैनाती के आदेश हुए हैं। उन्होंने अपनी मॉ चम्पा देवी से भी बात की। मेरे परिवार के 5 सदस्यों को देश की सेवा का मौका मिला है।
बेबी सिंह, डेरवा, बांसगांव

बेटे ने कल मुझसे और अपने चाचा रवींद्र से बात किया। वह सेना में है और श्रीनगर में तैनात है। बातचीत के दौरान उसकी आवाज में डर-भय का अहसास ही नहीं दिखा। वह गर्व से कह रहा था कि देश सेवा का मौका सबको नहीं मिलता है। मुझे मिला है। मेरा बेटा देश की सेवा करता रहे।
सुरेंद्र यादव, चकिया, सहजनवां

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