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दो साल से मानदेय नहीं, थैलीसीमिया पीड़ित बेटे के उपचार में भी दिक्कत

सब समझ जाते हैं सूरत देख कर हालत मेरी/ हाथ कासा बन गया सूरत सवाली हो गई/ पढ़ते-पढ़ते थक गए सब लोग तहरीरे मेरी/ लिखते-लिखते शहर की दीवार काली हो गई।
 किसी अनाम शायर की यह पंक्तियां, आधुनिकीकरण शिक्षक आसिफ महमूद खान एवं जिले के 168 मदरसों में तैनात 504 शिक्षकों पर एकदम सटीक बैठती हैं। वर्षों से बकाया मानदेय का इंतजार कर रहे आसिफ तीन साल के थैलीसीमिया पीड़ित तीन साल के बेटे के उपचार व घर के खर्च के दबाव में एक लाख रुपये से ज्यादा के कर्जदार हो गए हैं। 

दिक्क्त
एक लाख रुपये से अधिक के कर्ज में डूबे हैं आसिफ महमूद खान

जमुनहिया बाग गोरखनाथ निवासी आसिफ महमूद खान शहर के एम फातिमा गर्ल्स स्कूल नकहा नम्बर एक में आधुनिकीकरण शिक्षक है। बताते हैं कि कि बेटे की पैदाइश के 5वें माह में मेजर थैलीसीमिया जैसी बीमारी ने चपेट में ले लिया। बच्चे को दो माह में तीन बार खून चढ़ता है। हर बार 2500 से 3000 रुपये का खर्च आता है। मानदेय न मिलने से इलाज और घर का खर्चा चलाना मुश्किल होता है। बेटे की बीमारी पर काफी खर्च होता है। इसलिए कर्जदार हो गया। आसिफ की पीड़ा है कि दो साल से केंद्र सरकार ने मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का मानदेय नहीं भेजा है। एक साल का मानदेय लैप्स भी हो चुका है। मानदेय न मिलने से उनकी तरह काफी शिक्षक दुश्वारियां उठा रहे हैं। 

शिक्षकों को इस तरह मिलता है मानदेय
केंद्र सरकार स्नातक स्तर पर         6000 रुपये प्रतिमाह
परास्नातक एवं बीएड स्तर पर         12000 रुपये प्रतिमाह
राज्य सरकार द्वारा स्नातक स्तर पर     2000 रुपये प्रतिमाह
परास्नातक एवं बीएड स्तर पर         3000 रुपये प्रतिमाह

 2 से 3 साल का मानदेय बकाया
केंद्र पुरोनिर्धारित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत जिले के करीब 168 मदरसों में तैनात करीब 504 शिक्षकों का 2 से 3 साल का मानदेय बकाया है। कई माह से राज्यांश भी नहीं मिला है। शिक्षक मोहम्मद आजम कहते हैं कि मदरसों में आधुनिक शिक्षा की वकालत करने वाली केंद्र और प्रदेश सरकार के कथनी और करनी में काफी अंतर दिख रहा है। दोनों सरकारें मदरसों में आधुनिकीकरण शिक्षा को बढ़ावा देने का दावा करती है लेकिन आधुनिकीकरण शिक्षकों को मानदेय देने में कोताही बरत रही हैं। शिक्षिक गौसिया सुम्बुल ने बताया कि शिक्षक मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में भी गुहार लगा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

‘‘शासन की तरह से अभी मानदेय के लिए बजट नहीं मिला है। जैसे ही मानदेय के लिए बजट मिलता है, शिक्षकों के खाते में स्थानांतरित किया जाता है।’’
संजय कुमार मिश्र, जिला अल्पसंख्यक अधिकारी

काली पट्टी बांध कर कर रहे शिक्षण कार्य
जनपद के 504 शिक्षक मानदेय न मिलने के विरोध में इन दिनों हाथ पर काली पट्टी बांध कर शिक्षण कार्य कर रहे हैं। आंदोलित शिक्षकों की मांग है कि मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षकों का बकाया मानदेय जल्द दिया जाए। शिक्षकों को स्थायी करने के साथ ही केंद्र सरकार के बराबर उप्र सरकार द्वारा अंशदान दिया जाए। प्रतिमाह मानदेय दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

200 शिक्षक शामिल होंगे धरने में
अखिल भारतीय मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक संघ के प्रदेश संयोजक बदरे आलम अंसारी का कहना है कि  शब-ए-बारात, रमजान और ईद में भी न केंद्रांश मिला न राज्यांश। नाराज शिक्षक बांह पर काली पट्टी बांध कर मदरसों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। 23 जुलाई को लखनऊ के इको गार्डन में प्रदेश भर के प्रभावित मदरसा शिक्षका धरना देंगे। लखनऊ के धरने में गोरखपुर से 200 शिक्षक शामिल होंगे।

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  • Web Title:Problems in the treatment of thalassemia sufferers not honorable for two years