Private bus operators raise rent for Chhath - छठ को लेकर प्राइवेट बस संचालकों ने बढ़ा दिया किराया DA Image

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छठ को लेकर प्राइवेट बस संचालकों ने बढ़ा दिया किराया

लोक आस्था के महापर्व में गोरखपुर होते हुए बिहार जाने वाले लोगों की यात्रा मुश्किलों से भरी हुई है। अतिरिक्त किराया देने के बाद भी लोग खड़े होकर यात्रा करने को मजबूर है। लोगों को 3 से 5 घंटे तक अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ रही है। उधर, यात्रियों के सहूलियत को लेकर रोडवेज के दावों की हवा निकल गई है।
बिहार जाने वाली बसों में सीट के लिए हो रही मारामारी, खड़े होकर 3 घंटे का यात्रा
रेल म्यूजियम के पास से 100 से अधिक डग्गामार बसें बिहार के लिए चल रहीं

विभिन्न महानगरों से लोग गोरखपुर तो पहुंच जा रहे हैं, लेकिन बिहार जाने के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गोरखपुर डिपो की बसें बिहार बार्डर के तमकुही रोड तक जा रही हैं। वर्तमान में रोडवेज की बमुश्किल दर्जन भर बसें चल रही हैं, जो चंद मिनटों में ही भर जा रही हैं। लोगों को निर्भरता डग्गामार बसों पर बढ़ गई है। रेल म्यूजियम के पास से रोज 100 से अधिक प्राइवेट बसें तमकुही रोड, गोपालगंज, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर आदि के लिए जा रही हैं। गोरखपुर से मोतिहारी का किराया आम दिनों में 190 रुपये होता है, जो छठ पर्व को लेकर 210 रुपये पहुंच गया है। इसी तरह गोपालगंज का किराया आम दिनों में 110 रुपये होता है, जिसमें 10 रुपये का इजाफा हो गया है। गोपालगंज की बस चलाने वाले रामकिशुन का बताते हैं कि गोरखपुर से मोतिहारी के लिए तो सवारी मिल जा रही है, लेकिन वापसी में काफी दिक्कत हो रही है। आम दिनों में एक चक्कर लगाते थे, अब दो चक्कर लगा रहे हैं। बस संचालक रमेश राय का कहना है कि रोडवेज बस का गोपालगंज का किराया 146 रुपये है, हम तो 120 रुपये ही ले रहे हैं। रेल म्यूजियम से आम दिनों में मोतिहारी और गोपालगंज के लिए दो दर्जन बसें संचालित होती हैं, जो अब 100 तक पहुंच गई है। 
खड़े होकर यात्रा का मजबूरी
प्राइवेट बसों में यात्री खड़े होकर यात्रा करने को मजबूर है। कानपुर से परिवार के साथ मोतिहारी जाने के लिए बस में बैठे विनोद कुमार राय ने बताया कि कुल 8 लोगों को जाना है। महिलाओं को किसी तरह सीट मिली है, पुरुष खड़े होकर ही जाने को मजबूर है। वहीं दिल्ली से आकर छठ पर्व में शामिल होने के लिए गोपालगंज जाने वाले जितिन कुमार का कहना है कि छठ में घर लौटना मजबूरी है। किराया भले ही अधिक लगे लेकिन सहूलियत मिलनी चाहिए। दोनों राज्यों की सरकारी सेवा का कोई मतलब नहीं है। 5 घंटे की यात्रा खड़े होकर करने की मजबूरी है। 
बिहार के लिए सिर्फ 8 बसें
यूपी और बिहार परिवहन विभाग की गोरखपुर से बिहार के बीच कुल 8 बसें संचालित होती है। 6 बसें बिहार राज्य परिवहन निगम की हैं तो वहीं यूपी परिवहन निगम की दो बसें संचालित हो रही है। ये बसें बमुश्किल एक फेरा ही लगा रही हैं। छठ के भीड़ को देखकर यें बसें पूरी तरह नाकाफी साबित हो रही हैं।
‘‘यूपी और बिहार राज्य सरकारों की सहमति से अनुमन्य 8 बसें नियमित रूप से संचालित हो रही है। छठ पर्व को लेकर यह नाकाफी है। बिहार बार्डर के तमकुही रोड के लिए 10 अतिरिक्त बसें चलाई जा रही हैं। अनुबंधित बसों का फेरा बढ़ाया जा रहा है।’’
केके तिवारी, एआरएम, गोरखपुर डिपो 

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