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गोरखपुररेलवे स्टेडियम को निजी हाथों में देने की तैयारी

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Jun 2021 04:50 AM
रेलवे स्टेडियम को निजी हाथों में देने की तैयारी

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

खाली पड़ी जमीन भूमि और पुरानी कालोनियों के बाद रेलवे बोर्ड स्टेडियमों को भी निजी हाथों में सौंपने की तैयारी में जुट गया है। एनई रेलवे के गोरखपुर के सैयद मोदी रेलवे स्टेडियम, लखनऊ, वाराणसी व रायबरेली सहित देशभर के 15 स्टेडियमों के टेक्नो इकोनॉमिक स्टडीज की जिम्मेदारी आरएलडीए को सौंप दी है।

रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश पर आरएलडीए ने एनई रेलवे सहित सभी संबंधित जोन के स्टेडियमों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। अधिकारी भी स्टेडियम का क्षेत्रफल, बिल्डिंग, लोकेशन और वर्तमान में हो रही खेल गतिविधियों का रिकॉर्ड सहेजने लगे हैं। रेलवे बोर्ड के अफसर के अनुसार आरएलडीए स्थानीय स्तर पर होने वाले खेलकूद, लोकप्रिय खेल, युवाओं व आमजन की रुचि और माहौल की पड़ताल कर स्टेडियम को कामर्शियल उपयोग बनाने पर मंथन करेगा। आरएलडीए की रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड निर्णय लेगा कि स्टेडियम का कॉमर्शियल उपयोग किस प्रकार किया जाए।

लीज पर दे सकेंगे स्टेडियम

खेल या कार्यक्रमों के नाम पर मैदान लीज पर दिया जा सकती है या स्टेडियम के आसपास की खाली भूमि का होटल और मॉल के रूप में उपयोग किया जा सकता है। रेलवे स्टेडियम का क्रिकेट मैदान ही रणजी व नेशनल स्तर की क्रिकेट प्रतियोगिताओं के माध्यम से कमाई का जरिया बन सकता है। हालांकि कुछ संस्थाएं क्रिकेट का प्रशिक्षण व प्रतियोगिताओं के जरिये धन इकट्ठा कर स्टेडियम को दुरुस्त रखती हैं।

अभी तय नहीं कौन सा स्टेडियम

रेलवे बोर्ड ने आरएलडीए को जो पत्र लिखा है उसमें स्पष्ट नहीं है कि वह स्टेडियम कौन सा होगा। गोरखपुर मुख्यालय पर रेलवे के पास दो स्टेडियम है। एक सैयद मोदी स्टेडियम तो दूसरा क्रिकेट ग्राउंड।

कर्मचारी संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

कर्मचारी संगठनों ने विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। पीआरकेएस के प्रवक्ता एके सिंह के अनुसार बोर्ड का यह आत्मघाती फैसला है। एनई रेलवे मजदूर यूनियन के महामंत्री केएल गुप्त ने कहा है कि सरकार रेलवे के अस्तित्व को मिटाने पर तुली है। यही स्थिति रही तो ट्रेनें, स्टेशन और कॉलोनियों के बाद अब खाली जमीनें भी बिक जाएंगी। रेलवे के पास अपना कुछ नहीं रह जाएगा।

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