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गोरखपुर

सीएम के यहां पहुंचे ‘प्रार्थनापत्रों पर पुलिस की जांच

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Tue, 27 Jul 2021 04:52 AM
सीएम के यहां पहुंचे ‘प्रार्थनापत्रों पर पुलिस की जांच

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में फरियादियों की लम्बी कतार यह साबित कर रही है कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं। सबसे ज्यादा पुलिस से जुड़ी शिकायतें मुख्यमंत्री तक पहुंच रहीं हैं। मुख्यमंत्री ने इस पर न सिर्फ अपनी नाराजगी जताई बल्कि इन शिकायतों के आधार पर पुलिस अफसरों को थाने और चौकी पर चल रहे काम का आईना भी दिखाया। इसके बाद एडीजी अखिल कुमार ने बढ़ते शिकायतों को लेकर जांच शुरू करा दी है।

एडीजी अखिल कुमार ने पुलिस कप्तानों को आदेश दिया है कि मुख्यमंत्री के यहां पहुंची सभी शिकायतों के शिकायतकर्ताओं को इस जांच में शामिल करते हुए उनसे यह जानने की कोशिश की जाए कि वह मुख्यमंत्री के यहां जाने से पहले पुलिस चौकी, थाना से लगायत अन्य किसी पुलिस अफसर के पास गए थे? अगर गए थे तो किन-किन लोगों के यहां गए थे और वहां से उन्हें क्या जवाब मिला जिसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री के पास जाना पड़ा। यही नहीं, फरियादी जिनके पास भी जाने की बात बताएगा उनसे भी पूछा जाएगा कि उन्होंने इस शिकायत पर अब तक क्या किया है?

तीन दिन में मांगी रिपोर्ट : एडीजी ने पूरे मामले की जांच कराकर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा आगे से मुख्यमंत्री के जनता दरबार में कम से कम शिकायतें जाएं, इसके लिए थाने से लेकर अफसरों तक ही फरियाद सुनने की व्यवस्था पर बल दिया है।

शिकायतों का रोजाना ब्योरा रखेंगे सर्किल अफसर

एक दिन में थाने में कुल कितनी शिकायतें आईं और उन पर क्या-क्या कार्रवाई हुई, शाम तक इसका पूरा लेखा-जोखा सीओ अपनी डायरी में रखेंगे। थाने की शिकायत रजिस्टर में सभी शिकायतों को दर्ज किया जाएगा और शाम तक थाने के मुंशी या फिर दीवान इसके बारे में सीओ को जानकारी देंगे। यही नहीं, अगर उससे जुड़ी शिकायतें थाने के अलावा सीओ, एडिशन एसपी, एसएसपी या फिर अन्य अधिकारियों के पास जाती है तो फिर उसका भी रिकॉर्ड रहेगा। मुख्यमंत्री के जनता दरबार में अगर इनमें से कोई शिकायतकर्ता पहुंचेगा तो यह बताया जा सकेगा कि उसके मामले में कितनी कार्रवाई हुई है। अगर कार्रवाई नहीं हुई है तो क्यों नहीं हुई है। यही नहीं अगर कोई चौकी-थाना या अफसरों के यहां गए बिना सीधे मुख्यमंत्री के जनता दरबार में पीड़ित पहुंच जाएगा तो उसका भी आंकड़ा पुलिस अफसरों के पास होगा और यह बताया जा सकेगा कि यह फरियादी अभी थाने स्तर पर नहीं आया है।

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