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ट्रेनों में रुक गई जहरखुरानी, जानिए कैसे टूटा इनका नेटवर्क

गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता ट्रेनों में चलने वाले जहरखुरानों का नेटवर्क टूटा तो वारदात...

ट्रेनों में रुक गई जहरखुरानी, जानिए कैसे टूटा इनका नेटवर्क
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरThu, 29 Feb 2024 09:45 AM
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गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता
ट्रेनों में चलने वाले जहरखुरानों का नेटवर्क टूटा तो वारदात भी कम हो गई। जीआरपी के सिरदर्द बने मास्टरमाइंट जहरखुरान पति-पत्नी की मौत और दो सरगना के झांसी जेल में बद होने से जरखुरानी न के बराबर हो गई है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2011 से 2015 तक गोरखपुर जंक्शन थाने पर जहरखुरानी के कुल 47 मामले रिपोर्ट किए जबकि 2016 से 2020 तक संख्या में थोड़ी गिरावट आई और संख्या 38 पर आ गई। इसके बाद जहरखुरानों के मास्टरमाइंड और सरगना के मौत के बाद इसमें काफी कमी आई। 2021 से लेकर 15 फरवरी 2024 तक महज चार मामले ही दर्ज किए गए।

इसके अलावा जानकारों का कहना है कि स्पेशल ट्रेनों में वेटिंग टिकटों पर यात्रा की मनाही स्टेशनों और ट्रेनों की भीड़ कुछ कम हो गई है। ऐसे में जनरल के यात्रियों के साथ जहरखुरानों, बदमाशों और चोर- उचक्कों के प्रवेश पर भी पूरी तरह से रोक लग गई। जो यात्री स्टेशन पहुंच रहे हैं और यात्रा कर रहे हैं, उनकी निगरानी लगातार हो रही है।

जीआरपी थाना प्रभारी विजय सिंह ने बताया कि 2011 से अब तक कुल 89 मामले जहरखुरानी की घटना से सम्बन्धित पंजीकृत हैं। 2020 के बाद मामलों में काफी गिरावट आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह से कुछ के जेल जाने और एक मास्टरमाइंड दंपत्ति की मौत है। देवरिया के ये मास्टर माइंड बहुत ही शातिराने तरीके से लोगों से दोस्ती करते थे और उन्हें नशीली दवाएं खिलाकर सामान लेकर निकल जाते थे। इसके साथ ही लगातार ट्रेनों में जागरूकता अभियान भी काफी काम आया। इससे लोग काफी जागरूक हुए और अनजान लोगों से कुछ भी लेकर खाना बंद कर दिया।

पत्नी-पत्नी दिखते थे संभ्रांत, मेलजोल बढ़ा करते थे वारदात

मूल रूप से बिहार के रहने वाले पति-पत्नी बेहद ही संभ्रांत दिखते थे। वे इसी का फायदा उठाते थे। ये दोनों स्टेशन से ही यात्रियों की रेकी करते थे। काफी आसानी से घुल-मिल जाने वाले यात्रियों से दोस्ती करते थे और घर से लाई नशीली चाय पिलाकर बेहोश कर देते थे। बेहोश होते ही वे सारा सामान लेकर गायब हो जाते थे। ये दोनों मास्टर माइंड 100 से अधिक घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं।

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