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29 फरवरी, 2020|5:20|IST

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अधिकार पत्र से अधिक वनटांगियों ने मांग लिए पीएम आवास

मुख्यमंत्री के हाथ से राजस्व गांव का प्रमाणपत्र मिलने के बाद जिले के 18 वनग्राम सुर्खियों में हैं। सभी विकास योजनाएं उनकी बस्तियों तक पहुंचाई जा रही हैं। सड़क, बिजली, पानी के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं की भी जमीन तैयार की गई है। ऐसे में विडंबना प्रधानमंत्री आवास को लेकर सामने आई है। वन अधिकार कानून के अस्तित्व में आने के बाद 25 जुलाई 2011 को तीन हजार छह सौ 96 परिवारों को अधिकार पत्र सौंपा गया। उनके नाम जमीन पट्टा की गई। अब पांच हजार आठ सौ 49 वनटांगिया परिवारों ने पीएम आवास की मांग की है। ऐसे में पट्टा और आवास की मांग के अंतर को पाटना थोड़ा मुश्किल दिख रहा है।  

वर्ष 2006 में वन अधिकार कानून (अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन अधिकारों की मान्यता कानून 2006) बनने के बाद टांगिया परिवारों को उनकी खेती और आवास की जमीन पर मालिकाना हक मिल गया। इस पर अमल 25 जुलाई 2011 को हुआ। तीन चरणों में कुल तीन हजार छह सौ 96 परिवारों को उनकी जमीनों से संबंधित अधिकार पत्र सौंपा गया। इसके तहत उन्हें घर और खेती की जमीन पर मालिकाना हक तो मिल गया, पर राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिलने से वनटांगिया सामुदायिक विकास से वंचित थे।

नए साल के पहले दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैरहवा चंदनचाफी वनग्राम में आकर सभी 18 वनग्रामों को राजस्व गांव का प्रमाण पत्र सौंप दिया। इसके बाद सभी जिला स्तरीय अफसरों की सर्वोच्च प्राथमिकता सूची में वनटांगिया बस्ती आ गई। इसको क्रियान्वित कराने में हर तरफ जल्दबाजी दिख रही है। इससे गाइडलाइन के प्रावधान भी पीछे छूट जा रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि जब तीन हजार छह सौ 96 परिवारों को ही अधिकार पत्र व पट्टा सौंपा गया है। ऐसे में पट्टेधारकों से अधिक परिवारों को आवास कैसे मुहैया कराया जाएगा। 
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तिनकोनिया में 160 पट्टा, 368 को आवास 
वनग्राम तिनकोनिया में वर्ष 2011 में 160 टांगिया परिवारों को अधिकार पत्र सौंपा गया। अब राजस्व गांव का दर्जा मिलने के बाद 368 लोगों ने प्रधानमंत्री आवास की मांग की है। 
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...तो स्पेशल पैकेज में शामिल हैं टांगिया  
सीडीओ राम सिंहासन प्रेम का कहना है कि जिले के 18 वनग्राम को राजस्व गांव का दर्जा मिल चुका है। अब वहां विकास योजनाएं पहुंचनी शुरू हो गईं हैं। ऐसे में जिनके पास पक्का घर नहीं है उन्हें पीएम आवास योजना का लाभ मिलना है। वनटांगियों को आवास दिलाने के लिए स्पेशल पैकेज बनाकर ग्राम्य विकास विभाग को भेजा गया है। 
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सदर तहसील क्षेत्र के वन ग्राम में विकास को लेकर गणतंत्र दिवस के बाद तहसील स्तरीय वनाधिकार समिति की बैठक बुलाई जाएगी। उसमें वन विभाग, समाज कल्याण व वनटांगिया बस्ती के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे। विकास की राह में जहां कहीं कानूनी अड़चन आएगी, उसे दूर कराया जाएगा। कानून के तहत योजनाएं लाभार्थियों तक पहुंचाई जाएंगी। 
ज्ञानेश्वर-एसडीएम सदर

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  • Web Title:PMs residence demanded more than rights holders