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गोरखपुर में न्यूक्लियर रिएक्टर से पैदा होगी 100 मेगावाट बिजली

गोरखपुर में न्यूक्लियर रिएक्टर से पैदा होगी 100 मेगावाट बिजली

संक्षेप:

Gorakhpur News - भारतीय कंपनी रुस के तकनीकी सहयोग से धुरियापार में लगाएगी प्लांट सरकार ने निजी सहयोग

Feb 10, 2026 02:41 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता धुरियापार में 100 मेगावाट क्षमता का परमाणु ऊर्जा संयंत्र (न्यूक्लियर रिएक्टर) लगेगा। संयंत्र लगाने के लिए दिल्ली की फेयरवुड कंपनी के निदेशक पीटर फ्रेड के साथ उनके सलाहकार जीएन सिंह राठौर ने गीडा सीईओ अनुज मलिक के सामने सोमवार को प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया। कंपनी को 100 मेगावाट प्लांट के लिए 3 से 4 एकड़ जमीन की जरूरत है। भविष्य में कंपनी की ओर से तीन से चार प्लांट लगाने की योजना है। न्यूजीलैंड के मूल निवासी पीटर फ्रेड गीडा सीईओ से मुलाकात के लिए सोमवार की सुबह दिल्ली से गोरखपुर पहुंचे थे। एनई रेलवे में ओएसडी रहे कंपनी के सलाहकार जीएन सिंह राठौर ने बताया कि कंपनी धुरियापार में प्लांट लगाने की इच्छुक है।

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सीईओ के समक्ष प्रस्तुतिकरण दे दिया गया है। प्लांट में 3000 से लेकर 3500 करोड़ का निवेश होगा। स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) से बिना ब्रेक डाउन निर्बाध बिजली की आपूर्ति होगी। सिविल वर्क के लिए कंपनी ने एलएंडटी के साथ एमओयू किया है। इसके साथ ही न्यूक्लियर रिएक्टर के लिए रूस की रोसाटॉम कंपनी से करार (एमओयू) हुआ है। जीएन सिंह राठौर ने बताया कि कोयला और अन्य प्रदूषण वाली वस्तुओं से मुक्त पूरा प्लांट इको फ्रेंडली होगा। ग्रीन एनर्जी दुनिया में सभी पावर प्लांट से सबसे अधिक सुरक्षित मानी जा रही है। यूरेनियम आधारित संयंत्र पूरी तरह रेडीमेड होगा। प्लांट कंटेनर के बराबर होगा। इसके स्थापित होने के बाद 6 से 7 साल तक निर्बाध बिजली मिलेगी। उन्होंने बताया कि भविष्य को देखते हुए कंपनी थोरियम आधारित संयंत्र को लेकर रिसर्च कर रही है। भारत में थोरियम की पर्याप्त उपलब्धता है। शोध सफल रहा तो काफी कम लागत में लोगों को ग्रीन एनर्जी की उपलब्धता होगी। 2000 से अधिक लोगों को मिलेगा रोजगार कंपनी ने जो प्रस्तुतिकरण दिया है, उसके मुताबिक, 500 लोगों को प्रत्यक्ष और 1500 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। क्या होता है स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर की क्षमता 30 से 300 मेगावाट तक होती है। इन्हें कारखाने में घटकों के रूप में बनाया जाता है, उसके बाद साइट पर असेंबल किया जाता है। जिससे रेडियोधर्मी रिसाव का खतरा कम होता है। यह संयंत्र पूरी तरह प्रदूषण मुक्त होते हैं।