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अब कर्मचारियेां को खुद ही बताना होगा कि उन्हें क्यों दिया जाए सम्मान, जानिए क्यो हुई ऐसी व्यवस्था

गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता उतकृष्ट काम करने वाले रेलकर्मियों-अधिकारियों को मिलने वाले महाप्रबंधक अवार्ड में...

अब कर्मचारियेां को खुद ही बताना होगा कि उन्हें क्यों दिया जाए सम्मान, जानिए क्यो हुई ऐसी व्यवस्था
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरMon, 26 Feb 2024 12:00 PM
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गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता
उतकृष्ट काम करने वाले रेलकर्मियों-अधिकारियों को मिलने वाले महाप्रबंधक अवार्ड में अहम बदलाव किया गया है। 2025 से मिलने वाले अवार्ड में उतकृष्ट रेलकर्मियों की सूची ब्रांच अफसर नहीं देंगे। अब खुद रेलकर्मियों को ही बताना होगा कि वे महाप्रबंधक अवार्ड के दावेदार हैं। उन्हें एचआरएमएस पोर्टल पर बताना होगा कि उन्होंने बीते साल में क्या बेहतर किया और क्यूं उन्हें यह सम्मान दिया जाए। यह व्यवस्था 2025 से लागू होगी।

रेल प्रशासन का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और अधिक से अधिक कर्मचारी अपनी दावेदारी करेंगे और अपनी बेहतर चीजों को बता सकेंगे। एचआरएमएस से आने वाले दावों की रेल अफसर पुष्टि करेंगे और वरीयता के आधार पर अंतिम सूची फाइनल करेंगे। अभी तक पूरे जोन में अलग-अलग विभाग के ब्रांच अफसर या सुपरवाइजर ही कर्मचारियों का नाम तय करते आ रहे हैं।

ऐसे देने करनी होगी दावेदारी

रेलवे द्वारा एक निर्धारित समय पर सभी के एचआरएमएस पर अलर्ट जाएगा। उसमें बताया जाएगा कि किस तारीख से किस तारीख के बीच वह अपनी दावेदारी कर सकते हैं। तारीख मिल जाने के बाद कर्मचारियों को विस्तार से जानकारी देनी होगी। जैसे किसी लोको पायलट ने ट्रैक पर कोई खतरा देख बिना किसी देरी करते हुए ट्रेन को आपात स्थिति में रोक दिया जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई तो इस उपलब्धि को दिए गए कॉलम में तारीख के बताना होगा।

पहले कैश हटाया और अब चयन

कर्मचारियों-अधिकारियों को सम्मान पत्र के साथ मिलने वाला नकद रेल प्रशासन ने पहले ही हटा दिया है। नकद हटाए जाने के बाद ये नई व्यवस्था की गई है। दरअसल पहले रेलकर्मियों को गोल्ड प्लेटेड मेडल, प्रमाण पत्र और 2000 से 3000 के बीच नकदी देने की व्यवस्था थी।

महाप्रबंधक अवार्ड में 2025 से अहम बदलाव किया गया है। रेलकर्मियों-अधिकारियों को एचआरएमएस पर खुद ही बताना होगा कि वे अवार्ड के लिए दावेदार हैं। एचआरएमएस पर पूरी जानकारी उपलब्धि के साथ बतानी होगी। उसी के आधार पर अंतिम चयन किया जाएगा।

पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ

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