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गोरखपुरअब हर सीएचसी पर बनेंगे मिनी पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Sat, 12 Jun 2021 04:21 AM
अब हर सीएचसी पर बनेंगे मिनी पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता

कोरोना की तीसरे लहर में बच्चों पर प्रभाव की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। कोविड अस्पताल और ऑक्सीजन प्लांट की संख्या बढ़ाने के साथ ही अब बच्चों के लिए पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है।

अभी तक जहां सिर्फ तीन सीएचसी में मिनी पीकू बने हैं वहीं अब इसे बढ़ाकर सभी 30 सीएचसी पर करने की तैयारी है। इसके लिए शासन के पास बजट संशोधन के लिए पत्र भेजा जा चुका है। संभावना है कि अगले सप्ताह तक उपकरण गोरखपुर आ जाएं। सभी सीएचसी में 20-20 बच्चों को भर्ती करने की सुविधा होगी। इस तैयारी के बाद अगर बच्चे कोरोना से प्रभावित होते भी हैं तो उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा आसानी से मिल सकेगी। सीएचसी पर मिनी पीकू का उद्देश्य इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए था। बीते कुछ वर्षों से इंसेफेलाइटिस का प्रकोप काफी कम होने से इनका उपयोग नहीं हो रहा था। अब जब एक बार फिर बच्चों पर खतरे की बात आ रही है तो जिला प्रशासन इन सभी को नए सिरे से अपडेट करने में जुट गया है।

पीकू में अभी यह है सुविधा

गोरखपुर के तीनों पीकू में 20-20 बेड उपलब्ध है। इसी तरह जिला अस्पताल में एक पीकू स्थापित हैं, जिसमें 50 बेड बच्चों के लिए हैं। अब इन सभी बेड का इस्तेमाल कोरोना से पीड़ित बच्चों के लिए होगा। इसके अलावा बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 200 से अधिक बेड बच्चों के लिए उपलब्ध हैं जिनका उपयोग आवश्यकता पड़ने पर कोरोना प्रभावित बच्चों के लिए किया जाएगा।

डेडिकेटेड बेड का हो रहा इंतजाम

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 50-50 बेड के ऑक्सीजन युक्त कोविड अस्पताल को शुरू किया जा रहा है। इन 50 बेड में से 10-10 बेड महिलाओं एवं बच्चों के लिए आरक्षित होंगे। इन बेडों पर महिलाओं व बच्चों का ही इलाज होगा। डीएम के विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि कोरोना संक्रमित बच्चों और महिलाओं के लिए डेडिकेटेड बेड का इंतजाम किया जा रहा है। यह इंतजाम ब्लॉक स्तर पर भी किया जाएगा।

पीकू से लाभ

पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीकू) से बच्चों में आक्सीजन की कमी को दूर किया जाता है। यहां चिकित्सक के अलावा किसी और प्रवेश की अनुमित नहीं होती है ऐसे में संक्रमण का भी खतरा काफी कम रहता है।

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