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निरस्त संस्था से बच्चों को विदेश भेजने की कारा ने दी थी एनओसी

देवरिया कांड

देवरिया बालिका गृह कांड की मुख्य आरोपी गिरिजा त्रिपाठी की जिस संस्था की मान्यता पिछले साल जुलाई में ही निरस्त कर दी गई थी उसके द्वारा तीन बच्चों को विदेशी दंपतियों को दत्तक देने के साथ पासपोर्ट जारी करने की हरी झंडी कारा (केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण) ने ही दी हैं। कारा की ही एनओसी पर बच्चों के पासपोर्ट 2018 में जारी किए गए हैं जबकि संस्था इसके पहले ही दागी घोषित की जा चुकी थी। यही नहीं सीबीआई जांच के आदेश के बाद भी कारा की साइट पर संस्था का नाम यथावत है। 

कदम-कदम पर लापरवाही
देवरिया के मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान का मामला 
कारा की वेबसाइट पर अब भी है संस्था का नाम 
मां विंध्यवासिमी महिला प्रशिक्षण एवं समाजसेवा संस्थान की मान्यता जून 2017 में रद्द हुई
दो बच्चियों और एक बच्चे के पासपोर्ट फरवरी और अप्रैल 2018 में जारी हुए पासपोर्ट
डीएम ने संस्था में बच्चों को न भेजने का पत्र एसपी देविरया को लिखा 19 सितंबर 2017 को 
पुलिस ने छापा मारा 11 महीने बाद यानी पांच अगस्त 2018 को 

बालिका गृह में वेतन के नाम पर भी हुआ है  घोटाला

राज्य सरकार की दत्तक ग्रहण एजेंसी सारा भी इस पूरी प्रक्रिया में बराबर की साझीदार है। हैरत की बात यह है कि जिस अपर मुख्य सचिव (बाल कल्याण विभाग) रेणुका कुमार को मामले की जांच सौंपी गई है वह दत्तक ग्रहण प्रक्रिया के समय महिला बाल कल्याण की प्रिंसिपल सेक्रेटरी और सारा (राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन संस्था) की पदेन चेयर पर्सन थीं। 

बालिका गृह कांड : शासन की कार्रवाई से बेफिक्र गिरिजा चलाती रही संस्था

मामले के बारे में जान लें। बीते पांच अगस्त को देवरिया के मां विंध्ययवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान पर पुलिस ने छापा डालकर कई संवासिनियों के यौन शोषण का खुलासा किया था।  इस मामले मे डीएम सहित चार अफसरों पर कार्रवाई हुई । संस्था की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी अपनी एक बेटी और पति समेत जेल में हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने मामले की जांच तत्काल सीबीआई को सौंप दी। हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच करेगी। इस कार्रवाई के क्रम में इस बात का भी खुलासा हुआ कि संस्था तो डेढ़ साल पहले ही ब्लैक लिस्टेड हो चुकी है फिर भी पुलिस छापा डालने के हफ्तेे भर पूर्व तक लड़कियों को भेजती रही। 

 

‘‘इस मामले में कारा ने सीधे अपने केयरिंग (चाइल्ड एडॉप्शन रिसोर्स इन्फार्मेशन एंड गाइडलाइंस सिस्टम)  वेबसाइट पर संस्था को एनओसी दी। सारा नहीं देती है। राज्य सरकार ने कारा को पत्र लिखकर कहा है कि वह अपनी साइट से एनजीओ का नाम हटा दे।’’ 
  रेणुका कुमार, अपर मुख्य सचिव बाल कल्याण विभाग व सारा की तत्कालीन चेयरपर्सन

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की संवैधानिक संस्था कारा से इससे नहीं बची। गिरिजा की संस्था देश विदेश में गोद लेने के इच्छुक दंपितयों को अपने वहां से बच्चे भी उपलब्ध कराती थी । हैरत की बात यह है कि संस्था की जून 2017 में मान्यता रद होने और तीन साल पूर्व अनुदान रोके जाने के बावजूद कारा ने तीन बच्चों (दो बच्चियां और एक बच्चा)को गोद देने की एनओसी दे दी।  गोद लेने वाले दंपितयों में एक स्पेन और दो फ्रांस के हैं। इन तीनों बच्चों के पासपोर्ट इस साल क्रमश: फरवरी और अप्रैल में जारी किए गए हैं और तीनों बच्चे संबंधित देशों को यहां से भेजे भी जा चुके हैं।

खास बात यह है कि गोद लेने की यह प्रक्रिया उस समय पूरी की गई है जिस दरम्यान संस्था पर तमाम अनियमितताओं के आरोप लगे और सीबीआई जांच के लिए चिन्हित की गई। इस अवधि में संस्था द्वारा विदेशी दंपितयों को गोद देने न केवल औपचारिकताएं पूरी की गईं बल्कि देवरिया की स्थानीय खुफिया इकाई  (एलआईयू)और पुलिस ने जांच करने के बाद पासपोर्ट जारी करने की हरी झंडी भी दे दी। इसके बाद  जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू)  और स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (सारा) की मुहर लग गई और अंतत: कारा की फाइनल रिपोर्ट लगने के बाद पासपोर्ट जारी कर दिया गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि देवरिया के तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने सितंबर 2017 में एसपी को पत्र लिखकर अवगत कराया था कि संस्था की मान्यता प्रदेश शासन ने निरस्त कर दी है ऐसे में यहां बच्चों और महिलाओं को पुलिस न रखे। उन्होंने इस आदेश से सभी थानों को भी अवगत कराने की बात पत्र में लिखी थी । इसके बाद भी जिला प्रशासन की ओर से कई और पत्र पुलिस को लिखे गए मगर पुलिस इसे नजरअंदाज करती रही। 

 

 

गिरिजा त्रिपाठी की बेटी कंचनलता को पुलिस ने भेजा जेल

    एक आम आदमी को पासपोर्ट बनवाने में छक्के छूट जाते हैं। मामूली सी कमी मिलने पर भी फार्म निरस्त हो जाता है यहां विदेशी दंपित को गोद देने जैसे संवेदनशील मामले में केंद्रीय मंत्रालय, स्थानीय पुलिस,  एलआईयू ने एकदागी संस्था को उसके पक्ष में रिपोर्ट लगाने में कहीं संदेह तक नहीं किया। माना जा रहा है कि सीबीआई संस्था द्वारा गोद देने के मामले में शामिल  केंद्रीय दत्तक-ग्रहण संसाधन प्राधिकरण) कापा, स्टेट एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी (सारा), जिला बाल संरक्षण इकाई (डीसीपीयू)  एलआईयू, और पुलिस को भी रडार पर लेगी।  

गिरिजा त्रिपाठी के वृद्धा आश्रम पर लगेगा ताला

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  • Web Title:NOC was sent by the repealed institution to send children abroad