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पूर्वांचल में तुरुप का इक्का बनी निषाद पार्टी

पूर्वांचल में तुरुप का इक्का बनी निषाद पार्टी

पूर्वी यूपी में सामाजिक रूप से अति पिछड़े निषाद, मछुआ और मंझवार समाज की रहनुमाई करने वाली निषाद पार्टी राजनीतिक दलों के लिए तुरुप का इक्का बन गई है। डेढ़ साल में पार्टी ने दो बार अलग-अलग दलों से गठबंधन किया। दोनों ही बार उसे लोकसभा चुनाव में जीत हासिल हुई।

13 जनवरी 2013 को निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल(निषाद पार्टी) का गठन हुआ। पार्टी के छह साल के इतिहास में तीन गठबंधन किए। वर्ष 2017 के विधान सभा चुनाव में पार्टी ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरने का एलान किया। पीस पार्टी के साथ गठबंधन में निषाद पार्टी को कोई खास सफलता नहीं मिली। निषाद पार्टी के सिंबल पर ज्ञानपुर विधानसभा सीट पर विजय मिश्र चुनाव जीते जबकि पीस पार्टी के सिंबल पर चार प्रत्याशी जीत कर विधानसभा पहुंचे। पार्टी का प्रदर्शन गोरखपुर और जौनपुर की विधानसभा सीटों पर बेहतर रहा। विधानसभा चुनाव के बाद निषाद पार्टी ने पीस पार्टी से किनारा कर लिया।

2018 में सपा से मिलाया था गठबंधन

निषाद पार्टी के सितारे वर्ष 2018 के लोकसभा उपचुनाव में बुलंद हुए। पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ गलबहियां की। सीएम योगी आदित्यनाथ के इस्तीफे से खाली हुई गोरखपुर सदर लोकसभा सीट पर लोकसभा उपचुनाव में डॉ. संजय निषाद ने पुत्र ईंजीनियर प्रवीण निषाद को सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया। करीब चार दशक बाद भाजपा की परंपरागत गोरखपुर सीट पर कमल मुरझा गया। निषाद पार्टी की मदद से पहली बार सपा के खाते में यह सीट मिली। इस सफलता से निषाद पार्टी के रणनीतिकारों की बांछें खिल गई।

चार अप्रैल को भाजपा के पाले में पहुंच गई निषाद पार्टी

गोरखपुर व बस्ती मंडल में करीब 20 लाख निषाद वोटर है। इसके अलावा जौनपुर, भदोही समेत एक दर्जन जिलों में निषाद वोटरों की संख्या अच्छी खासी है। इस वोट बैंक में सेंधमारी के लिए भाजपा ने निषाद पार्टी को साधने की कोशिश की। यह रणनीति सफल रही। चार अप्रैल को निषाद पार्टी भाजपा की अगुआई वाली एनडीए में शामिल हो गई। भाजपा ने गोरखपुर के सांसद ईंजीनियर प्रवीण निषाद को संतकबीर नगर से मैदान में उतारा। इस चुनाव में एक बार फिर निषाद पार्टी का सिक्का चला। प्रवीण निषाद संतकबीर नगर से सांसद चुने गए। इसके साथ निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने डेढ़ दर्जन सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों का प्रचार किया।

आरक्षण आंदोलन से हुआ पार्टी का जन्म

अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल निषादों को अनुसूचति जाति का दर्जा दिलाने के नाम पर निषाद पार्टी का गठन हुआ। पार्टी ने निषादवंशी 553 जातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र दिलाने के लिए मुहिम शुरू की। इसमें निषादों के साथ ही केवट, मल्लाह, मझवार, मछुआ सहित विभिन्न उपजातियां शामिल रहीं।

निषाद राजनीति को किया स्थापित

राजनैतिक व सामाजिक रूप से उपेक्षित निषादों को पूर्व मंत्री जमुना निषाद ने बड़ी पहचान दी। उनके निधन के बाद खाली हुई राजनैतिक विरासत को निषाद पार्टी ने धीरे-धीरे सहेजना शुरू किया। इसमें जून 2015 में सहजनवा का कसरवल कांड अहम मोड़ साबित हुआ। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद समाज के बड़े नेता के तौर पर उभरे।

दिल्ली बुलाए गए प्रवीण निषाद और संजय निषाद

गुरुवार को चुनाव परिणाम के बाद एक बार फिर से निषाद पार्टी की बल्ले-बल्ले हो गई है। पहली बार पार्टी केन्द्र की सत्ता में सहभागी बनी है। शुक्रवार को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने फोन कर इंजीनियर प्रवीण निषाद को जीत की बधाई दी। इसके बाद उन्होंने संतकबीर नगर के सांसद के साथ निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद को दिल्ली बुला लिया। देर शाम को पिता-पुत्र दिल्ली रवाना हो गए।

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  • Web Title:Nishad Party become Turup Ka Ikka in This Election