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एनईआर को मिली पहली मेमू ट्रेन, अगले हफ्ते से भरेगी फर्राटा

एनईआर को मिली पहली मेमू ट्रेन, अगले हफ्ते से भरेगी फर्राटा

कम दूरी के स्टेशनों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को मेमू ट्रेन का तोहफा मिल गया है। यह ट्रेन एनईआर की पहली मेमू ट्रेन होगी। माधोसिंह स्टेशन पर इसकी रैक आ चुकी है। रूट तैयार होते ही मेमू पटरियों पर दौड़ने लगेगी।

यात्रियों को राहत देने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे डेमू के साथ ही अब मेमू यानी बिजली से चलने वाली (मेन लाइन इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट) ट्रेन अगले सप्ताह से पटरियों पर फर्राटा भरेगी। इन मेमू ट्रेनों को अक्सर लेटलतीफी का शिकार हो जाने वाली पैसेंजर ट्रेनों की जगह चलाया जाएगा। इन दोनों ट्रेनों के चल जाने से सर्वाधिक लाभ स्थानीय नौकरीपेशा यात्रियों को होगा। इससे अपने गन्तव्य तक पहुंचने में समय की काफी बचत होगी। अभी डीजल से चलने वाली जो डेमू ट्रेनें चल रही हैं वह अक्सर की इंजन फेल होने के चलते ठप हो जा रही हैं। इससे यात्रियों को जहां दिक्कत हो रही है वहीं रेलवे को एक इंजन व्यवस्थित कर डेमू का चलाना पड़ रहा है।

सवारी ट्रेनों की अपेक्षा तेज चलती हैं मेमू

मेमू की खासियत यह है कि यह सवारी ट्रेनों से तेज गति से चलती है। अगर सवारी ट्रेनें किसी गन्तव्य तक चार घंटे का समय लेती है तो मेमू तीन से सवा तीन घंटे में पहुंचा देगी। मेमू ट्रेनों में झटके भी काफी कम लगते हैं।

इन रूट पर मेमू चलाने की योजना

गोरखपुर-गोण्डा

गोरखपुर-अयोध्या

गोरखपुर-सीवान-छपरा

भटनी-गोरखपुर-बस्ती

मेमू एक नजर में

- बहुत जल्दी रफ्तार पकड़ लेती है।

- सामान्य कोच की तुलना में इस ट्रेन के कोच में अधिक जगह होती हैं

- एक कोच में आराम से 125 यात्री यात्रा कर सकते हैं

- एक इंजन फेल हो जाए तो दूसरे इंजन से चलाया जा सकता है

- इसके दोनों ओर इंजन होते हैं

- इसमें इंजन बदलने की कोई जरूरत नहीं, दोनों ओर से चलाया जा सकता है

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