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गोरखपुर

योगियों के आचरण को अपनाने की आवश्यकता: राघव ऋषि

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Wed, 01 Sep 2021 04:50 AM
योगियों के आचरण को अपनाने की आवश्यकता: राघव ऋषि

गोरखपुर। निज संवाददाता

कथा व्यास राघव ऋषि ने कहा कि मनुष्य की उपयोगिता तभी है जब उसका उपयोग हो। संतों, योगियों जैसे वस्त्र धारण कर लेने मात्र से कोई योगी नहीं बन सकता है। संतों और योगियों के आवरण नहीं, आचरण को अपनाने की आवश्यकता है। इससे ही मनुष्य उपयोगी बन सकेगा।

वे ऋषि सेवा समिति द्वारा देवकी लॉन, भगत चौराहा में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के छठवें दिन मंगलवार को श्रोताओं को राम कथा का रसपान करा रहे थे। राघव ऋषि ने भरत प्रसंग का श्रवण कराते हुए कहा कि अब तक भरत के समान धीर, वीर योगी नहीं हुआ है। जिस प्रकार शरीर से आत्मा निकल जाए तो उस शरीर की कोई उपयोगिता नहीं रह जाती, उसी तरह की दशा भरतजी की श्रीराम से बिछड़ने पर हो गई। भरत जैसा भातृ प्रेम हर मनुष्य को अपनाने की जरूरत है। कथा के दौरान ‘राम भक्त ले चला रे राम की निशानी गीत सौरभ ने प्रस्तुत कर लोगों को मंत्र मुग्ध कर दिया।

इस अवसर रमेश सिंह, गौरी शंकर गुप्ता, प्रवीण शास्त्री, रुद्र त्रिपाठी, सतीश सिंह, पं. विनोद शुक्ल, रमाशंकर त्रिपाठी, मुन्ना लाल, बीएन द्विवेदी, बनवारी लाल निगम, मंजू सिंह, नीलम शुक्ला, निर्मला दूबे, विमला निगम, शकुंतला वर्मा, रेखा सिंह, राजू सिंह, राजू तिवारी, संतोष, विनय पांडेय व रमेश राज आदि उपस्थित रहे।

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