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कहीं बाहर जाना जरूरी नहीं, गोरखपुर में रहकर भी बन सकते हैं आईएएस

गोरखपुर। अजय श्रीवास्तव
उम्र 23 वर्ष। शांत चित। लेकिन चेहरे पर आत्मविश्वास की साफ झलक। देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता के बाद परिवार के साथ हित-मित्रों से सहज। हम बात कर रहे हैं सौरभ दीक्षित की। मूल रूप से कुशीनगर जिले के अहिरौली दीक्षित गांव के रहने वाले सौरभ तारामंडल क्षेत्र के गौतम बिहार कालोनी में रहते हैं।

पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे सौरभ दीक्षित ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में पहले ही प्रयास में 162वीं रैंक हासिल की है। शहर के धर्मपुर के लिटिल फ्लावर स्कूल से हाईस्कूल और इंटरमीडियट की परीक्षा में 95 फीसदी से अधिक अंक से उत्तीर्ण करने वाले सौरभ ने पहले ही प्रयास में कानपुर आईआईटी में दाखिला पा लिया था। सिविल इंजीनियरिंग ट्रेड से बीटेक करने के बाद सौरभ आईएएस की परीक्षा में शामिल हुए।

सौरभ के पिता वाचस्पति दीक्षित मनोरंजन कर विभाग में सहायक आयुक्त के पद से रिटायर हैं। माता शुभ्रा दीक्षित का देहांत पांच वर्ष पहले हो चुका है। पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे सौरभ परिवार के लाडले हैं। सौरभ की तीनों बहन डा.नीलम शुक्ला, नीरजा मिश्रा और डा माधवी मिश्रा की शादी हो चुकी हैं।

सौरभ के बड़े भाई मधुकर दीक्षित दुबई में मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत हैं। सौरभ के पीपीएस चाचा कमलेश कुमार उनके प्रेरणास्रोत रहे हैं। वह वर्तमान में बहराइच जिले में एडिशनल एसपी के पद पर कार्यरत हैं। 'हिन्दुस्तान' ने सौरभ से उनके सफलता से लेकर भविष्य की योजनाओं को लेकर विस्तार से बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश-


देश की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल करने की सूचना कब मिली?

मालूम था कि परिणाम आएगा। नेट पर सुबह से सर्च कर रहा था। शाम को परिणाम देखा। 162वीं रैंक मिली। वैसे उम्मीद टाप 50 की थी।


मेन्स में कौन सा विषय था?


-समाजशास्त्र


सिविल इंजीनियरिंग से बीटेक करने के बाद भी स्कोर के लिहाज से कम लोकप्रिस सब्जेक्ट को चुनने के पीछे क्या वजह रही।

कोई भी सब्जेक्ट लो-स्कोरिंग नहीं होता है। सामाजशास्त्र विषय के पिछले वर्षों का प्रश्न पत्र और पाठ्यक्रम देखा। पाठ्यक्रम छोटा था। इसमें मेरी रूचि भी थी। पेपर अच्छा हुआ। अभी यह नहीं पता कि कितने नंबर मिले हैं। वैसे आईएएस परीक्षा में स्कोरिंग सब्जेक्ट का समय-समय पर बदलता रहता है। लोक प्रशासन का दौर सभी को याद है।

समाज शास्त्र विषय ही क्यों चुना?

कुशीनगर में गांव है। शुरू से परिवार का गांव से जुड़ाव रहा। पाठ्यक्रम में पहला पेपर सिद्धांत था तो दूसरा सामाजिक परिवेश को लेकर था। पाठ्यक्रम देखकर लगा इसे समझना आसान है। अपना विजन अच्छे से प्रस्तुत कर सकता हूं। शादी, तलाक, ग्रामीण समाजशास्त्र, परिवार आदि विषयों पर अच्छी तरह समझ ने सफलता दे दी।


आप आईपीएस में जाना चाहते हैं, ऐसा क्यो?

पुलिस सेवा में जाने के पीछे मां की प्रेरणा है। जो पांच वर्ष पूर्व हमें छोड़ कर चली गईं। मां गृहणी थीं लेकिन आसपास के लोगों में उनकी समाजिकता, मदद करने का जुनून ने हमेशा प्रेरित किया। चाचा भी पीपीएस सेवा में हैं। गर्मी की छुट्टियों में उनके पास जाते थे जो उनकी कार्यशैली को देखकर लगता था कि पुलिस सेवा और सिविल सेवा में ही वंचितों की मदद की जा सकती है।


कितनी देर पढ़ाई जरुरी है आईएएस जैसी परीक्षा में सफल होने के लिए?


12 से 13 घंटे रेगुलर पढ़ाई की। पढ़ाई में रेगुलरिटी जरुरी है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि तीन दिन 16-16 घंटे पढ़ लिया, इसके बाद कुछ दिन पढ़ाई छोड़ दी। जरुरी है भी है कि ऐसे लोगों के साथ रहें जो आपको हमेशा प्रेरित करें। इसके साथ ही खुद का परीक्षण करना भी बेहद जरुरी है।

समान्य अध्ययन की तैयारी कैसे की?


अब किताबी ज्ञान से कुछ नहीं होने वाला। हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम के राष्ट्रीय समाचार पत्र रेगुलर पढ़ता था। पढ़ने के साथ ही नोट्स भी बना लेता था। इंटरनेट पर नेशनल न्यूज पेपर का ई-वर्जन जरुर देखता था। निबंध के लिए भी जरुरी है कि सामाजिक परिवेश को अच्छी तरह जानें। ऐसा सामाज की गतिविधियों में खुद को डुबोने से ही हो सकता है। एनसीआरटी की किताबों को बिटविन द लाइंस पढ़ना जरुरी है।


इंटरनेट और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर तर्क-कुर्तक होते हैं। आपका क्या मानना है?


इंटरनेट ने पूरी दुनिया को मुट्ठी में ला दिया है। अब यह जरुरी नहीं है
कि दिल्ली और इलाहाबाद जाकर सिविल र्सिवसेज की तैयारी की जाए। इंटरनेट पर सभी कुछ उपलब्ध है। तमाम वेबसाइट हैं जिनपर करंट अफेयर से लेकर सब्जेक्ट का मैटेरियल उपलब्ध है। इंटरनेट का सार्थक उपयोग सफलता की गारंटी है।


जिंदगी में किससे प्रेरित हैं?


वर्तमान परिवेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काम करने की स्टाइल का कायल हूं। वह अच्छे लगते हैं। लेकिन मां मेरी प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने हमेशा समाजसेवा के लिए प्रेरित किया। अपनी सफलता को मां को सर्मिपत करता हूं। बड़े भाई ने हमेशा प्रेरित किया। वह उम्र में पांच साल बड़े हैं लेकिन दोस्त की तरह जिंदगी के हर मोड़ पर सलाह दिया।


आईएएस की तैयारी कहां रह कर की?


वर्ष 2015 में बीटेक करने के बाद मुंबई में मल्टीनेशनल कंपनी हाउसिंग डाट काम में जाब करने लगा। लेकिन फरवरी 2016 से पूरी तरह आईएएस की परीक्षा में जुट गया। गोरखपुर में ही रहकर तैयारी की। मेन्स देने के बाद दिल्ली चला गया था।


टापर की दिनचर्या कैसी होनी चाहिए?


जैसी आम इंसान की होती है वैसी ही। परीक्षा को बोझ मानकर तैयारी से कभी सफलता नहीं मिल सकती। रेगुलर पढ़ाई की। दोस्तों और परिवार के बीच खूब मस्ती भी की।


सिविल र्सिवसेज की तैयारी करने वाले छात्रों को क्या संदेश देना चाहते हैं?


सिविल र्सिवस को हौवा न मानें। मैं भी सफल नहीं हुआ था तो लगता था कैसे लोग होंगे जो सफल होते होंगे। लेकिन अब तो साफ है कि सामान्य पढ़ाई से आईएएस में सफलता हासिल की जा सकती है। मन शांतकर तैयारी करें। सफलता कदम चूमेगी।  

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  • Web Title:Need not to go anywhere for IAS preparation