अल्ट्रासाउंड-सीटी स्कैन में मिली गांठ, सर्जरी में सुराख देख हैरान

Apr 04, 2026 01:59 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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Gorakhpur News - केस रिपोर्ट -बार-बार उल्टी और मिचली की समस्या लेकर इलाज के लिए पहुंचती थी

अल्ट्रासाउंड-सीटी स्कैन में मिली गांठ, सर्जरी में सुराख देख हैरान

मनीष मिश्र गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सिजोफ्रेनिया से पीड़ित महिला की रहस्यमय बीमारी ने डॉक्टरों को हैरान कर दिया। अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की जांच में जो बीमारी दिखी, वह सर्जरी करने पर नहीं मिली। इस पर चिकित्सकों को इलाज का पैटर्न बदलना पड़ा। यह मामला अंतरराष्ट्रीय जर्नल पबमेड व क्लीनिकल केस रिपोर्ट में प्रकाशित हुआ है।सिजोफ्रेनिया से पीड़ित महिला को फाइलेरिया की हिस्ट्री थी। वह बीमारी के लक्षणों को सही से बता नहीं पा रही थी। उसे खाने के बाद मिचली और उल्टी की समस्या हो रही थी। ऐसे में डॉक्टर एसिडिटी का इलाज कर रहे थे। अल्ट्रासाउंड और सीटी‑स्कैन की रिपोर्ट में पित्ताशय (गॉलब्लेडर) के पास कमर के दाहिनी तरफ ऊपरी हिस्से से लेकर निचली दाहिनी जांघ तक एक बड़ी सिस्टिक गांठ दिखी।

जब जनरल सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. अशोक यादव की टीम ने सर्जरी के लिए उसके पेट में चीरा लगाया तो गांठ की जगह बड़ा छेद मिला। इसे गॉलब्लेडर मुकोसेल माना गया।जनरल सर्जरी के तत्कालीन विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक यादव की देखरेख में पेट खोलने के लिए बड़े चीरे की सर्जरी की गई। सर्जन की टीम ने पेट के अंदर पित्ताशय के इलाके को खोला तो तस्वीर एकदम बदल गई। जो इमेजिंग में मुकोसेल लग रहा था, वह असल में पित्ताशय की दीवार में एक बड़े छेद से निकले तरल पदार्थ के चलते बना गुब्बारा था। पता चला कि गांठ की जगह पित्ताशय के दाहिने भाग की दीवार पर एक वर्ग सेंटीमीटर का छेद था। उससे पित्त और अन्य तरल पदार्थ पेट में फैल रहे थे। यह गांठ नहीं बल्कि गॉलब्लेडर फटने का मामला था।एमबीबीएस छात्र की नजर ने बदली इलाज की दिशामामले की पहचान करने वाली टीम में शामिल एमबीबीएस 2020 बैच के छात्र डॉ. दिव्यांश तिवारी ने कहा कि मरीज के लक्षण बहुत ही असामान्य थे। उन्होंने देखा कि न तो क्लासिक पेट दर्द, न बुखार और न ही पीलिया थी, जैसा कि आमतौर पर पित्ताशय की बीमारी में देखा जाता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सिजोफ्रेनिया के कारण लक्षण छिपे हो सकते हैं। इस मामले ने यह साबित कर दिया कि अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग रिपोर्ट पूरी तरह सटीक नहीं हो सकती है।आमतौर पर अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन से पेट के अंदर 99.9 फीसदी बीमारी की सटीक पहचान हो जाती है। इस महिला की बीमारी ने इस जांच को गच्चा दे दिया। दिमागी बीमारी वाले मरीजों में लक्षण बहुत हद तक छिपे या बदले हुए दिखते हैं।-डॉ. अशोक यादव, तत्कालीन विभागाध्यक्ष, जनरल सर्जरी, मेडिकल कॉलेज

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