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दो हजार से ज्यादा राजस्व वाद खारिज

केस-1 सदर तहसील क्षेत्र के योगेश ने महाडीह की रहने वाली शीला देवी से अगस्त

दो हजार से ज्यादा राजस्व वाद खारिज
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरFri, 08 Dec 2023 01:45 AM
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केस-1
सदर तहसील क्षेत्र के योगेश ने महाडीह की रहने वाली शीला देवी से अगस्त 2020 में जमीन रजिस्ट्री कराई। तय समय में खारिज-दाखिल का आवेदन नायब तहसीलदार कोर्ट में पहुंचा तो एक व्यक्ति ने आपत्ति लगा दी। हालांकि इसके बाद आपत्ति के पक्ष में कोर्ट में कोई दस्तावेज दाखिल नहीं किया जा सका। इसके बाद वाद का निस्तारण करने के बजाए उसे खारिज कर दिया गया।

केस-2

जटेपुर की रहने वाली शशिलता ने सितंबर में एक जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। सामान्य प्रक्रिया में खारिज-दाखिल की फाइन नायब तहसीलदार के कोट में आवंटित हुई। 34 दिन पूरा हो जाने के बाद बीते सप्ताह फाइल को बिना किसी के आधार के खारिज कर दिया गया। अब वादी खारिज-दाखिल के लिए दोबारा वाद दाखिल करा रहा है लेकिन आनलाइन अपडेट न होने की वजह से दाखिल नहीं हो पा रहा है।

राजस्व मामलों में मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद पुराने मामलों का निस्तारण तो जरूर हुआ लेकिन आंकड़ों को सुधारने के लिए एक महीने में जिले के सभी राजस्व कोर्ट से दो हजार से ज्यादा मामले को खारिज कर दिए गए। वादों के खारिज करने के बाद उसे ऑनलाइन अपडेट भी नहीं किया गया। इसके चलते वादी दोबारा से वाद दाखिल करने के लिए परेशान हैं।

ऑनलाइन अपडेट न होने की वजह से बार कोड नहीं जेनरेट हो रहा है। जिससे वाद नहीं दाखिल नहीं हो पा रहा है। खारिज किए जाने वाले में सबसे अधिक मामले खारिज-दाखिल के हैं। कलेक्ट्रेट के अधिवक्ता मुन्ना श्रीवास्तव का कहना है कि गोरखपुर सदर तहसील में एक महीने में 1200 से अधिक मामले खारिज कर दिए गए। किसी में साक्ष्य का ना होना बताया गया है तो किसी में वादी के पेश न होने की बात कही गई है। अधिवक्ता का कहना है कि साक्ष्य की कमी है तो वादी नोटिस देकर साक्ष्य प्रस्तुत कराना होता है न कि बिना सूचना खारिज कर दिया जाए। यही हाल सभी तहसीलों का है। किसी तहसील में 200 से तो किसी में 150 वादों को साक्ष्य या वादी के न मौजूद होने का आधार बनाकर खारिज कर दिया गया है।

खारिज-दाखिल में भी फंसाते हैं पेंच

भूमि का बैनामा कराने के बाद खारिज दाखिल की प्रक्रिया होती है। भूमि खरीदने वाले लोगों का नाम चढ़ने के बाद खतौनी जारी होती है। ज्यादातर मामले खरीद-दाखिल के फंसते हैं। इसके बाद खरीदार जब भूमि पर कब्जा करने पहुंचते हैं, तो कब्जे की समस्या आती है। इसके लिए मामला पैमाइश का अटकता है। ऐसे वाद भी खारिज किए जा रहे हैं।

कमिश्नर की सख्ती के बाद पुराने मामलों का निस्तारण

सीएम के सख्त निर्देश के बाद कमिश्नर ने सख्ती बरती है। इसका असर दिखाई देने लगा है। बीते 15 दिनों में पांच हजार से ज्यादा मामलों का निस्तारण हो गया। यह सभी मामले दो से तीन साल पुराने थे।

कई बार नोटिस के बाद भी जब साक्ष्य या गवाह उपस्थित नहीं होते हैं तो वाद खारिज हो जाते हैं। अगर बिना आधार के वाद खारिज किए गए हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।

कृष्णा करुणेश, जिलाधिकारी

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