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जिले में 15 हजार से अधिक एनजीओ, आपदा में चुनिंदा ही दिखते

गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता जिले में 15 हजार स्वयं सेवी संगठन हैं लेकिन आपदा में...

जिले में 15 हजार से अधिक एनजीओ, आपदा में चुनिंदा ही दिखते
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरTue, 27 Feb 2024 11:45 AM
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गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता
जिले में 15 हजार स्वयं सेवी संगठन हैं लेकिन आपदा में चुनिंदा संगठन ही दिखते हैं। कोरोना में कुछ एनजीओ ने शानदार काम किया तो वहीं ज्यादातर नदारद रहे। इसी तरह आपदा हो या पर्यावरण संरक्षण अथवा अवाम को मुख्य धारा से जोड़ने की पहल, कुछ संगठनों का काम नजीर बनता है तो कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से भी नहीं हिचकते।

सत्यापन में एनजीओ मिला ही नहीं

बरगदवा स्थित एक एनजीओ ने असहाय महिलाओं, बच्चों, लड़कियों को आश्रय देने के लिए महिला कल्याण निदेशालय में आवेदन किया था। इस पर निदेशालय ने संस्थान के पास निराश्रितों को ठहराने की व्यवस्था है भी कि नहीं, इसका सत्यापन कराया तो कई दिन की तलाश के बाद भी संस्था का पता ही नहीं चला जबकि आवेदन में संस्था का पता गोलघर दर्शाया गया था।

मौके पर नहीं मिला संस्था का अस्तित्व

बेतियाहाता स्थित एक समिति ने एकल श्रमजीवी महिला छात्रावास संचालन करने के लिए महिला कल्याण निदेशालय में आवेदन किया था। इसका भी उद्देश्य असहाय बालिकाओं के लिए छात्रावास संचालन करना था। निदेशालय ने सत्यापन कराया तो इस संस्था का भी अस्तित्व नहीं मिला। बताया जा रहा है कि यह संस्था कागजों में ही कल्याण कारी कार्य कर रही है।

काम करने वालों को सराहना भी

गोरखपुर में पर्यावरण संरक्षण हो या मानव तस्करी के खिलाफ अभियान, कुछ संस्थाएं बेहतर काम कर रही हैं। पुलिस से लेकर एसएसबी तक इन संस्थाओं के काम की सराहना करती हैं। कुछ संस्थाएं महिला समूहों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी हैं तो कुछ ने टेराकोटा व रेडीमेड गारमेंट के क्षेत्र में महिलाओं को प्रशिक्षण देने का दायित्व बखूबी निभाया है।

गोरखपुर-बस्ती मंडल में 90 हजार संगठन

गोरखपुर-बस्ती मंडल में पंजीकरण अधिकतर गैर सरकारी संस्थाओं का रजिस्ट्रेशन कल्याणकारी व शैक्षिक कार्य के नाम पर हुआ है। फ‌र्म्स, सोसाइटी एवं चिट फंड में गोरखपुर- बस्ती मंडल में लगभग 90 हजार समितियां, संगठन पंजीकृत हैं। इनमें 50 हजार से अधिक एनजीओ हैं। 50 से अधिक एनजीओ कुछ प्रभावशाली लोगों के संरक्षण में चल रहे हैं। कागजों में तो ये लोग एनजीओ से सीधे नहीं जुड़े रहते लेकिन परिवारीजन, रिश्तेदार के नाम पर सब कुछ वे ही देखते हैं।

समाज सेवा बहुत ही संवेदनशील विषय है। इसलिए जरूरी है कि इससे जुड़े लोग बेहद ही संजीदगी से काम करें और जब भी कोई आपात स्थिति आए तो उसमें खड़े रहें। यह सही है कि हजारों की संख्या में एनजीओ रजिस्टर्ड हैं, लेकिन धरातल कम ही दिखते हैं।

सिराज वजीह, पर्यावरणविद एवं समाजसेवी

स्वय सेवी संगठन को अपनी ज़िम्मेदारी व जवाबदेही स्वय समझनी होगी। केवल नाम गिनाने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया जाना चाहिए। देखा जाए तो सोसाइटी एक्ट में हज़ारों स्वयसेवी संस्थाएँ रजिस्टर्ड है लेकिन धरातल पर बहुत ही दिखते हैं। स्थायित्व व भरोसे के लिये सदैव अनवरत कार्य करना होगा। किसी भी आपदा के समय गिने चुने ही एनजीओ नज़र आते हैं।

राजेश मणि, निदेशक मानव सेवा संस्थान सेवा

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