
रामगढ़झील में फिर मरीं मछलियां, दुर्गंध से परेशानी
Gorakhpur News - ((अधिकारी का वर्जन आना है)) सचित्र मरी मछलियों को कुत्ते और पक्षी आबादी
गोरखपुर। मुख्य संवाददाता। रामगढ़झील में मछलियों के मरने का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। शुक्रवार को रामगढ़झील में काफी संख्या में मछलियां मृत मिलीं। मछलियों को कुत्ते और पक्षी झील से निकालकर आसपास की कॉलोनी तक पहुंचा रहे हैं। स्मार्टव्हील मोहद्दीपुर से सहारा इस्टेट की ओर निर्माणाधीन रिंग रोड के निकट रहने वाले लोग दुर्गंध और सड़ी मछलियों के घरों के आसपास पहुंचने से परेशान हैं। पैडलेगंज से मोहद्दीपुर स्मार्टव्हील और स्मार्टव्हील से सहारा इस्टेट तक काफी संख्या में मृत एवं सड़ी हुई मछलियां किनारों पर पड़ी है। कुत्ते और पक्षी इन मछलियों को श्रीरामपुरम, मोहद्दीपुर, कैलाशपुरम, गणेशपुरम, यादव टोला, पार्वतीनगर, दईमाई, गिरधरगंज झारखण्डी आवास विकास कॉलोनी तक फैला रहे हैं।
साथ ही हवा का रूख बदलने पर इन कॉलोनियों में दुर्गंध फैल जा रही है। स्थानीय नागरिक सुनील मणि त्रिपाठी, उत्कर्ष त्रिपाठी, संजय पाण्डेय, रमेश कुमार, शैलेंद्र सिंह कहते हैं कि यह सिलसिला पिछले चार दिन से जारी है। लेकिन गोरखपुर विकास प्राधिकरण झील की साफ-सफाई और उसके जल की गुणवत्ता को लेकर कोई गंभीरता नहीं बरत रहा है। जैविक प्रदूषण बढ़ने से पानी गाढ़ा और हरा हुआ हेरिटेज फाउंडेशन के मनीष चौबे और आशीष कुमार ने रामगढ़झील की मछलियों के मरने की जानकारी मिलने पर निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि रामगढ़झील के जल जैविक प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ गया है। नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस की मात्रा बढ़ने से सूक्ष्म वनस्पतियों एवं शैवाल की वृद्धि ज्यादा होने लगती है। इसके साथ ही घुलित ऑक्सीजन भी काफी कम हो जाता है। मांग किया कि तत्काल जलीय जीव-जन्तुओं के स्वस्थ जीवन के लिए न्यूनतम 4 मिग्रा / लीटर की घुलित ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। रामगढ़झील में लगे 31 फाउंटेशन में अधिकांश बंद पड़े रामगढ़झील में जलनिगम नगरीय ने 31 फाउंटेन भी लगाया है। दावा था कि इनके संचालन से रामगढ़झील के पानी को साफ रखने में मदद मिलेगी लेकिन अधिकांश फब्बारें चल नहीं रहे हैं। यह फाउंटेन गोरखपुर विकास प्राधिकरण को हैंडओवर हैं। पिछली बार मछलियां मरीं तो कुछ को जीडीए ने ठीक भी कराया था।

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