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चुनावी मुद्दा: करोड़ों बढ़ गई लागत, फिर भी पुल अधूरे

करोड़ों बढ़ गई लागत, फिर भी पुल अधूरे

लंबे आंदोलन, सियासी दांवपेच के बाद शुरू हुए उत्तरी पूर्वांचल के कई पुल अफसरों की लापरवाही और सरकारों की उपेक्षा के चलते अधूरे पड़े हैं। गोरखपुर से इलाहाबाद और संतकबीरनगर से गोरखपुर की दूरी को कम करने वाले पुल करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तैयार नहीं हो सके। सरकारों के साथ प्राथमिकताएं बदलने से इन पुलों की न सिर्फ लागत बढ़ गई बल्कि लोगों की दुश्वारियों को भी लंबा कर दिया।

गोरखपुर-बस्ती मंडल में उम्मीद के तीन पुल लंबे समय से अधूरे पड़े हैं। घाघरा नदी पर पिछले छह वर्षों से निर्माणाधीन कम्हरिया घाट अधूरा है। गोरखपुर से इलाहाबाद के बीच की दूरी को कम करने के लिए पुल निर्माण को 172 करोड़ रुपए स्वीकृत हुआ था। नाबार्ड ने पुल निर्माण के लिए 97 करोड़ तथा 76 करोड़ संपर्क मार्ग के लिए स्वीकृत किया। पुल 30 महीने में पूरा होना था, लेकिन तय समय में महज 28 फीसदी ही काम पूरा हुआ। सेतु निगम ने पुल के निर्माण के लिए नागपुर की खरे एंड तारकुंडे इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को और संपर्क मार्ग के लिए लखनऊ की फर्म को जिम्मा दिया था।

सरकार बदली तो कम्हरिया घाट पुल पर तेज हुआ काम

प्रदेश में नई सरकार के गठन के बाद काम में एक बार फिर तेजी आई। सेतु निगम ने लागत को पुनरीक्षित कर 220 करोड़ कर दिया। मंजूरी के बाद निगम ने पूर्व की फर्म की जमानत राशि (7 करोड़) को जब्त कर दूसरी फर्मों को काम सौंप दिया। मार्च 2018 में सेतु निगम ने लखनऊ की दो फर्मों मित्तल कंस्ट्रक्शन और आरके कंस्ट्रक्शन को पुल बनाने का जिम्मा दिया। निर्माण कार्य में जुटी फर्म के इंजीनियर धीर सिंह ने बताया कि बारिश से पहले 25 पिलर का निर्माण पूरा हो जाएगा। आठ पिलर पर छत डाली जा चुकी है।

निर्माण में देरी से बढ़ी लागत

पुल प्रारम्भिक लागत देरी के बाद लागत

बढ़या-ठाठर पुल 7.75 करोड़ 14.74 करोड़

कम्हरियाघाट पुल 172 करोड़ 220 करोड़

बरहज में घाघरा पुल 73 करोड़ 111 करोड़

10 साल में भी पूरा नहीं हो सका बढ़या ठाठर पुल

संतकबीर नगर और पीपीगंज के हजारों नागरिकों के उम्मीदों का बढ़या ठाठर पुल का काम 8 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद ठप पड़ गया था। पिछले दिनों शासन ने संशोधित इस्टीमेट की मंजूरी दी है। अब पुल का निर्माण 14.74 करोड़ से होगा तो एप्रोच पर 29 करोड़ खर्च होंगे। इस पुल से गोरखपुर और संतकबीर नगर के करीब 100 गांव के लोगों को सहूलियत मिलेगी। उन्हें 18 से 25 किमी की अतिरिक्त दूरी नहीं तय करनी पड़ेगी। इस पुल का शिलान्यास 2009 में हुआ था। करीब 300 मीटर लंबे पुल के लिए 7.75 करोड़ रुपये मंजूर हुए थे। कार्यदायी संस्था सेतु निगम ने निर्माण शुरू किया। साढ़े नौ करोड़ खर्च के बाद भी सिर्फ 49 फीसदी कार्य ही पूरा हुआ। बढ़या ठाठर के विजय दूबे और बिसनपुर के संतोष कुमार का कहना है कि नेता सिर्फ वादा कर रहे हैं। नागरिकों को भी नेता सच नहीं बता रहे हैं।

कुशीनगर में भी एप्रोच निर्माण में लेटलतीफी

कुशीनगर से महराजगंज जनपद को जोड़ने के लिए खोटही के काशी छपरा पुल करीब सात करोड़ की लागत से बनकर तैयार है। इसके एप्रोच के लिए करीब 4 करोड़ का बजट मिलने में हुई देरी से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ का एप्रोच मार्ग बन गया है। पीडब्ल्यूडी के एई वीके राय ने कहा कि इस एप्रोच मार्ग को 10 मई तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

बस्ती में खखरा-अमानाबाद पुल के पूरा होने का इंतजार

दो दर्जन गांव को मुख्य बाजार लालगंज से जोड़ने के लिए कुआनो नदी पर खखरा अमानाबाद के पास 2015 में पुल स्वीकृत हुआ। 4 करोड़ की लागत से बनने वाले पुल का काम बजट के अभाव में ठप पड़ा रहा। पुल का निर्माण 2016 में शुरू होकर 2017 के अंत तक बनकर तैयार हो गया लेकिन एप्रोच मार्ग के लिए बजट का टोटा हो गया।

बरहज और मऊ के लोगों की उम्मीद का पुल अधूरा

मऊ और देवरिया के बरहज के बीच की दूरी को 30 से 35 किमी तक कम करने की उम्मीदों के साथ घाघरा पर निर्माणाधीन पुल 6 वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। अक्तूबर 2013 में पुल को मंजूरी मिली तो इसकी लागत सिर्फ 73 करोड़ थी। रकम खर्च होने के बाद सिर्फ 56 फीसदी निर्माण कार्य ही पूरा हो सका। सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक एसपी सिंह का कहना है कि पुल के निर्माण के लिए पुनरीक्षित प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए भेजा गया था। बजट की मंजूरी मिल चुकी है। पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मार्च 2021 तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा।

कम्हरियाघाट पुल का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। पुरानी फर्म को ब्लैक लिस्टेड पर जमानत राशि को जब्त कर लिया गया है। मार्च 2021 पुल निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। दिसम्बर 2020 तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा। वहीं बढ़या-ठाठर पुल पर आवाजाही मई से शुरू हो जाएगी। देवरिया के बरहज में घाघरा नदी पर निर्माणाधीन पुल को लेकर बजट का संकट दूर हो गया है। पुल निर्माण चालू है। इसे भी मार्च 2021 में चालू करा दिया जाएगा।

दीपक गोविल, मुख्य परियोजना प्रबंधक, गोरखपुर-बस्ती मंडल

03महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण अधूरा है गोरखपुर और बस्ती मंडल में

172करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे कम्हरिया घाट पर पुल बनाने के लिए

30महीने में पूरा होना था काम। तय समय में महज 28 फीसदी ही काम हो पाया

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  • Web Title:Many bridges are incomplete in Gorakhpur