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मच्‍छर काे टक्‍कर: आंगन में तुलसी, दरवाजे पर नीम लगाएं, मच्छरों से मिलेगी राहत

‘हिन्दुस्तान’ के अभियान ‘मच्छर को टक्कर’ की कड़ी में बुधवार को ‘संवाद’ आयोजित किया गया। ‘संवाद’ का विषय ‘सावधानिया और बचाव’ रखा गया था जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों से जुटे लोगों ने खुलकर अपनी बातें रखी। सभी ने इस बात पर बल दिया कि यदि साफ-सफाई बेहतर हो जाए और जलजमाव न होने पाए तो मच्छर पैदा ही नहीं होंगे। मच्छर पैदा नहीं होंगे तो बीमारियां कम होंगी। यह भी बात रखी गई कि मच्छरदानी का प्रयोग किया जाए। घर में तुलसी के पौधे जरूर लगाएं और नीम तथा गुगुल जलाकर घर में धुंआ फैलाएं। ‘मच्छर को टक्कर’ देने में हम बहुत कुछ सफल हो जाएंगे।

‘हिन्दुस्तान’ के अभियान ‘मच्छर को टक्कर’ के तहत आयोजित संवाद में छात्रों, कर्मचारियों, अधिवक्ताओं, व्यापारियों तथा चिकित्सकों ने हिस्सा लिया। सबने माना कि बीमारियों से बचाव के लिए जरूरी है कि मच्छरों को पैदा ही न होने दें। इस दौरान चिकित्सकों ने सलाह दी कि आंगन में तुलसी और घर में बाहर नीम का पेड़ लगाएं। नीम की लकड़ी और गुगुल जलाकर मकान के अंदर धुंआ करें, मच्छर कम हो जाएंगे। 
संवाद की शुरुआत विजय श्रीवास्तव ने की। उन्होंने कहा कि संवाद का विषय अच्छा है‘मच्छर को टक्कर’। इस अभियान की सफलता के लिए जरूरी है कि हम अपने घर से सफाई की शुरुआत करें और फिर पूरे मोहल्ले को इसके लिए जागरूक करें। अधिवक्ता आशीष पांडेय ने कहा कि हम जहां भी रहते हैं इस बात का ध्यान दें कि बेवजह जल जमाव न होने पाए। सफाई होती रहे। नगर निगम पर दबाव बनाएं कि वह कूड़े का निस्तारण कराए। अधिवक्ता प्रवीण शुक्ला ने कहा कि मच्छर गंभीर समस्या हैं। इनसे निजात के लिए जागरूकता जरूरी है। हिन्दुस्तान का यह अभियान इसके लिए बड़ी कड़ी साबित होगा। दवा व्यापारी दिलीप सिंह ने कहा कि हम खुद साफल्सफाई करते रहें। अपने घर से शुरू करें और फिर समाज में जागरूकता पैदा करें।

सीआरडीपीजी कालेज की शिक्षिका डॉ. रेखा रानी ने कहा कि सफाई जरूरी है। आज सब कुछ पालीथीन में मिल रहा है। पालीथिन से नालियां जाम हो जाती हैं। नालियों में पानी जमा होने से मच्छर पैदा होते हैं। सफाई हो तो मच्छर कम होंगे। उन्होंने सलाह दी कि मच्छरदानी जरूर लगाएं।


वैद्य अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि ‘मच्छर को टक्कर’ देनी है तो नाले-नालियों की सफाई बेहतर हो। गोबर नालियों में न बहने पाए। फागिंग बेहतर हो। घर-आंगन में तुलसी और दरवाजे पर नीम जरूर लगाएं। साथ ही नीम की लकड़ी और गूगुल का धुंआ करें। मच्छर कम पैदा होंगे। या फिर भाग जाएंगे। विश्वमोहन त्रिपाठी ने कहा कि हम जो कहें उस पर अमल करें। इससे जागरूकता फैलेगी।

प्रभात पांडेय ने कहा कि हम घर में सफाई तो कर लेते हैं लेनकिन लेकिन कूड़ा डंपिंग सिस्टम खराब है। अनिल मौर्य ने कहा कि सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए। अरविंद मौर्य ने कहा कि जागरूकता पैदा की जाए कि लोग गंदगी न फैलाएं। अरुण पांडेय ने कहा कि साफ-सफाई पर जोर दिया जाए। पानी जमा न होने दें। विजय श्रीवास्तव ने कहा कि जलजमाव से मच्छर पैदा होते हैं। डा. अर्चना ने कहा कि बीमारियों से बचाव सबसे बेहतर उपाय है। हम घर में तुलसी के पौधे लगाएं। नालियों में पानी जमा न होने दें। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।

चुनिंदा जगहों पर सफाई करके मच्छरों के आतंक से नहीं बचा जा सकता। संपूर्णता के साथ नाले से लेकर कूड़ेदान की सफाई होगी तभी मच्छर के लार्वा खत्म होंगे। सफाई को हथियार बनाकर मच्छर के आतंक से मुक्ति मिल सकती है।
अनिल मौर्या, व्यापारी

नागरिक सुबह 10 बजे के बाद कूड़ा सड़क पर नहीं फेंके तो नगर निगम को कटघरे में खड़ा किया जा सकता है। सफाई कर्मी कूड़ा उठा कर चला जाता है तो कई लोग सड़क पर कूड़ा फेंक देते हैं। जिससे गंदगी होती है। 
अरविन्द मौर्या, सामाजिक कार्यकर्ता

सफाई जरूरी है। गंदगी से मच्छर पैदा होते हैं ऑर मच्छरों से बीमारी हो रही है। सिर्फ राजेन्द्र नगर क्षेत्र में 1000 गायों का गोबर नालों में बहाया जा रहा है। हमें तुलसी और खानपान सुधार कर इम्यून सिस्टम को सुधारना होगा। 
वैद्य डॉ अरुण श्रीवास्तव, चिकित्सक

सफाई की शुरूआत घर से करनी होगी। सभी को सफाई को लेकर जागरूक होना होगा। खुद नागरिक सजग होंगे तो नगर निगम की जिम्मेदारी भी तय होगी। नालियों की तल्लीझार सफाई साल में एक बार नहीं कई बार होनी चाहिए।
 विजय श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता

सभी को अपने घर के अगल-बगल के लोगों को भी सफाई को लेकर जागरूक करना होगा। अपने अगल-बगल सफाई के लिए लोगों को प्रेरित करें। मच्छरों के खात्में के लिए फागिंग नियमित होनी चाहिए न की इसकी खानापूर्ति हो। 
विश्व मोहन त्रिपाठी

जनजागरूकता फैलानी होगी। नागरिकों को बेहतर सफाई रखनी होगी। साफ पानी एकत्र नहीं होना चाहिए। फागिंग प्रत्येक सातवें दिन होना चाहिए। शहर में फागिंग आई वाश के लिए होती है। 
संजय उपाध्याय

हमें अपने में सुधार लाना होगा। हमें खुद में परिवर्तन लाना चाहिए। जब हम खुद जागरूक होंगे तभी सरकारी एजेंसियों पर सवाल उठा सकते हैं। सिर्फ यह कहकर काम नहीं चलेगा कि हम टैक्स देते हैं, नगर निगम सफाई करे। 
दिलीप सिंह

मच्छर से टक्कर बेहतर सफाई प्रबंधन से ही होगी। कूड़े का प्रबंधन होगा तभी मच्छरों पर अंकुश लगेगा। दुखद यह है कि नगर निगम जहां तहां कूड़ा फेंक दे रहा है। फागिंग सिर्फ रस्मी तौर पर होती है। 
डॉ.रेखा रानी

पूरे शहर में यदि सर्वे हो तो बमुश्किल 10 फीसदी लोग ही ऐसे मिलेंगे जिन्होंने फागिंग मशीन देखी होगी। हमें तो लगता है कि फागिंग के दौरान सिर्फ डीजल का धूंआ निकलता है, केमिकल होता ही नहीं है। 
प्रभात कुमार पांडेय

मच्छरों से ही अधिकतर बीमारियां होती हैं। मच्छरों पर अंकुश लगाने में हम कामयाब हो गए तो आधी जंग जीत गए। नालियों में पॉलीथिन होने से पानी का बहाव नहीं हो पाता है। जिससे मच्छर पनपते हैं। 
अरूण पांडेय

नालियों के चोक होने से मच्छरों के प्रजनन में मदद मिलती है। नालियों का ड्रेनेज नहीं होने से मच्छर पैदा होते हैं। नगर निगम को नालियों का ड्रेनेज ठीक करना होगा। 
डॉ.अर्चना

घरों में मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी ही सबसे सुरक्षित विकल्प होता है। चंद रुपये में मिलने वाला मेडिकेटेड मच्छरदानी से बचाव संभव है। सरकार को मच्छरदानी उपलब्ध कराना होगा। 
आकाश पांडेय 
 
मच्छर जन और धन दोनों की हानि होती है। मच्छरों ने नाम पर नगर निगम लाखों रुपये फूंकता है। हकीकत यह है कि फागिंग मशीनों में डीजल तो फूंका जाता है लेकिन केमिकल नहीं होता है। 
प्रवीन शुक्ला, अधिवक्ता

शहर की एक भी नाली मानक के अनुरूप नहीं है। नालियों का बहाव ठीक नहीं होने से मच्छर पनपते हैं। करोड़ों रुपये खर्च के बाद भी पानी का बहाव नहीं होना इंजीनियरों का दोष है। 
आशीष पांडेय, अधिवक्ता

मच्छरों से बचने को जरूरी है यह उपाय
वैद्य अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि मच्छरों से होने वाली बीमारियों से बचने के कुछ कारगर उपाय हमें करने चाहिए। मसलन रात में गूगुल और नीम की लकड़ी जलाकर घर में धुंआ करें। रोज सुबह नीम की 11 पत्तियां, 7 दाना काली मिर्च और तुलसी की 11 पत्तियां खाएंगे, स्वस्थ रहेंगे।


 

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  • Web Title:Machchar ko takkar sanvad in Gorakhpur