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29 जून, 2020|11:46|IST

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गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने वालों का लगा रेला, जानें क्‍या है महात्‍म्‍य 

मकर संक्रांति कल यानि 15 जनवरी को है लेकिन गोरखनाथ मंदिर में आज से ही खिचड़ी चढ़ाने वालों का रेला लग गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर खिचड़ी चढ़ा रहे हैं। 

मंदिर में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए हैं। मुख्‍य द्वार से गर्भ गृह तक जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई है। पांच रास्ते बनाए गए हैं। पुरुष और महिलाओं के लिए अलग-अलग दो-दो रास्ते बनाए गए हैं। 

श्रद्धालुओं की देखरेख और व्‍यवस्‍था के लिए बड़ी संख्‍या में स्‍वयंसेवकों की तैनाती की गई है। प्रशासन और पुलिस बल के अलावा विभिन्‍न बलों के जवान तैनात हैं। उनके अलावा एनसीसी कैडेटस, गोरखनाथ मंदिर के कर्मचारी और हिन्‍दू युवा वाहिनी सहित विभिन्‍न हिन्‍दूवादी संगठनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्‍या में जगह-जगह तैनात किए गए हैं। दो-तीन दिन पहले से ही गोरखनाथ बाबा को खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालु  जुटने लगे थे। दिल्ली के करोलबाग क्षेत्र से भी 45 से अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं।

सीएम ने लिया तैयारियों का जायजा
मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मंगलवार को एक बार फिर तैयारियों का जायजा लिया। वह सोमवार को गोरखपुर पहुंचे थे। इस दौरान उन्‍होंने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के साथ व्‍यवस्‍था से जुड़े सभी लोगों को श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का खास ख्‍याल रखने का निर्देश दिया। 

खिचड़ी चढ़ाने का ये है महात्‍म्‍य 

मान्यता है कि त्रेता युग में हिमांचल के कांगड़ा स्थित ज्वाला देवी मंदिर से भ्रमण करते यहां आए गुरु गोरक्षनाथ का चमत्कारी खप्पर लाखों टन खिचड़ी चढ़ाने पर भी नहीं भरा। सदियों से चली आ रही इस परम्परा में शामिल होने के लिए गोरखपुर में श्रद्धालुओं का तांता लगने लगा है। 15 जनवरी को मकर संक्रांति के मौके पर बड़ी तादाद में देश-विदेश के लोग गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाएंगे।

कांगड़ा में आज भी हो रहा इंतजार
गुरु गोरक्षनाथ का खप्पर भरने और उनके लौटने का इंतजार हिमांचल के कांगड़ा में आज भी हो रहा है। ज्वाला देवी स्थान पर आज भी अदहन खौल रहा है। दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक त्रेता युग में गुरु गोरक्षनाथ भ्रमण करते हुए कांगड़ा के ज्वाला देवी स्थान पर पहुंचे थे। माता ज्वाला ने उनका स्वागत किया और भोजन का आमंत्रण दिया लेकिन देवी स्थान पर वामाचार विधि से पूजन-अर्चन होता था। वहां मद्य और मांस युक्त तामसी भोजन पकता था जिसे गुरु गोरक्षनाथ ग्रहण नहीं करना चाहते थे। माता ज्वाला के आमंत्रण को विनम्रतापूर्वक स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि वह खिचड़ी ही खाते हैं वह भी भिक्षा मांग कर। 


 

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  • Web Title:long que on khichadi in gorakhnath temple on makar sankranti