पिता-पुत्र ने बनाई मशीन, मधुमक्खियों को नहीं होगा नुकसान

Jan 20, 2026 09:10 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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Gorakhpur News - गोरखपुर जिले के हरपुर गांव में राजू सिंह और उनके पुत्र आदर्श सिंह ने 'फ्लो बी हाइव' नामक आधुनिक मधुमक्खी पालन तकनीक विकसित की है। यह तकनीक मधुमक्खियों को बिना नुकसान पहुंचाए और बिना बॉक्स खोले शुद्ध शहद निकालने में मदद करती है। इससे किसान केवल 5-10 मिनट में अकेले शहद निकाल सकते हैं।

पिता-पुत्र ने बनाई मशीन, मधुमक्खियों को नहीं होगा नुकसान

गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। गोरखपुर जिले के हरपुर गांव के प्रगतिशील मधुमक्खी पालक राजू सिंह और उनके इंजीनियर पुत्र आदर्श सिंह ने मधुमक्खी पालन को सुविधाजनक बना दिया है। दोनों ने मिलकर ‘फ्लो बी हाइव’ आधुनिक बॉक्स विकसित किया है, जिससे बिना बॉक्स खोले और बिना मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाए शुद्ध शहद निकाला जा सकता है। 34 साल से शहद उत्पादन से जुड़े राजू सिंह की संस्था ‘हाई ग्रोथ एग्रो इंटरप्राइजेज’ इस तकनीक को देश भर के किसानों तक पहुंचाना चाहते हैं। गोरखपुर महोत्सव 2026 में प्रदर्शित उनके इस बाक्स की क्रियाविधि को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देखा और सराहा भी। पारंपरिक पद्धति में शहद निकालने के लिए धुएं का प्रयोग, फ्रेम निकालना और मशीनों की मदद लेनी पड़ती थी, जिससे मधुमक्खियों को नुकसान होता है।

शहद की शुद्धता भी प्रभावित होती है। लेकिन ‘फ्लो बी हाइव’ तकनीक में एक विशेष चाबी घुमाते ही फ्रेम के भीतर बनी कोशिकाएं खुल जाती हैं और शहद सीधे पाइप के माध्यम से जार या बोतल में निकल आता है। यह प्रक्रिया बिल्कुल नल खोलने सरीखी है। सुरक्षित रहती हैं मधुमक्खियां इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें मधुमक्खियां सुरक्षित रहती हैं। उन्हें किसी प्रकार का तनाव नहीं होता। साथ ही शहद सीधे छत्ते से निकलने और हाथ न लगने के कारण 100 प्रतिशत शुद्ध रहता है। जहां पुराने तरीकों में शहद निकालने में घंटों का समय और कई मजदूरों की जरूरत पड़ती थी, वहीं इस नई तकनीक से एक किसान मात्र 5 से 10 मिनट में अकेले शहद निकाल सकता है। ऐसे काम करता है बाक्स ‘फ्लो बी हाइव’ बॉक्स के अंदर खास तरह के प्लास्टिक/फूड-ग्रेड फ्रेमों में पहले से बनी आंशिक षट्कोणीय कोशिकाएं होती हैं, जिन पर मधुमक्खियां प्राकृतिक मोम चढ़ा शहद भरती हैं। जब शहद पक जाता है, तो मधुमक्खियां उन कोशिकाओं को मोम से सील कर देती हैं। यह संकेत होता है कि शहद निकालने के लिए तैयार है। बॉक्स के बाहर बने स्लॉट में एक विशेष चाबी डाल घुमाई जाती है, फ्रेम के अंदर की कोशिकाएं हल्के से खिसक जाती हैं। उनके बीच बने चैनल से शहद गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे की ओर बहता है। पाइप के जरिए सीधे जार या बोतल में इकट्ठा हो जाता है। इस दौरान बॉक्स खोलने की जरूरत नहीं पड़ती। शहद निकालने के समय मधुमक्खियां फ्रेम की सतह पर रहती हैं, इसलिए उन्हें कुचलने या परेशान करने का खतरा नहीं होता। धुआं देने की भी जरूरत नहीं पड़ती। शहद निकल जाने के बाद चाबी को वापस घुमाने पर कोशिकाएं फिर अपनी मूल स्थिति में आ जाती हैं। मधुमक्खियां तुरंत दोबारा उन पर मोम चढ़ा शहद भरना शुरू कर देती हैं।

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