अब गोरखपुर में उपजे हिमांचली सेब का उठाइए लुत्फ

Apr 09, 2026 08:46 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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Gorakhpur News - गोरखपुर के प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र कुमार सिंह ने सेब की खेती का मिथक तोड़ा है। उन्होंने 50 डिसमिल में अमरूद के बीच हिमाचली सेब की प्रजातियां लगाई हैं। ये पौधे 45-50 डिग्री तापमान सहन कर सकते हैं और मई-जून में फल देने लगते हैं। धर्मेंद्र की प्रेरणा कृषि विज्ञान केंद्र से मिली है।

अब गोरखपुर में उपजे हिमांचली सेब का उठाइए लुत्फ

गोरखपुर, मुख्य संवाददाता आम धारणा है कि सेब की खेती सिर्फ कश्मीर या हिमाचल की ठंडी वादियों में ही हो सकती है। लेकिन, उनौला दोयम के प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र कुमार सिंह इस मिथक को तोड़ दिया रहे हैं।50 डिसमिल में अमरूद की रेड डायमंड और ताइवान पिंक की प्रजातियों के बीच हरमन-99 और अन्ना हिमाचली सेब की प्रजातियों के 98 पौधों पर फल आ गए हैं। उप कृषि निदेशक धनंजय सिंह एवं जिला उद्यान अधिकारी पारस नाथ ने पिछले दिनों पौधों का निरीक्षण कर प्रगतिशील किसान धर्मेंद्र का हौसला बढ़ाया। उम्मीद जताई कि दूसरे किसान भी धर्मेंद्र से प्रेरणा लेंगे।45 से 50 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान सहन करने वाले सेब की इस प्रजाति के लिएदोमट बलुआही मिट्टी सबसे उपयुक्त है।

धर्मेंद्र बताते है कि खासियत यह कि इसमें नए कल्ले (टहनियों) पर ही फूल लगते हैं, जिससे सघन बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। पौधे लगाने का सही समय दिसंबर से जनवरी के बीच होता है। उन्होंने जनवरी में पौधों की रोपाई कर दिया था फरवरी महीने में पेड़ों पर फूल (मंजर) आने शुरू हुए मार्च-अप्रैल में फल लगे।उनका दावा है कि मई-जून की गर्मी में ये रसीले सेब पककर तैयार हो जाते हैं। 400 रुपये प्रति पौधा की दर से सेव की इन दोनों प्रजातियों के 120 पौधे धर्मेंद्र ने मंगाए थे, जिन्हें मल्चिंग विधि से बेड बना कर रोपा और ड्रीप एरिगेशन विधि से सिंचाई की।अमरूद के बीच लगाए सेब के पौधोंधर्मेंद्र ने सेब के पौधों को 300 ताइवान पिंक और 200 रेड डायमंड अमरूद के पौधों के बीच लगाए। उनके अमरूद के पौधों में पुन: फूल गलने लगे हैं। एक बारगी वे अमरूद के फल बेच चुके हैं। कहते हैं कि सेब के पौधों काफी मंहगे हैं लेकिन एक बार लगाने पर 18 से 20 साल फल देते हैं। लेकिन इन पौधों की काफी देखभाल और कटिंग करनी होती है। धर्मेंद्र को यह प्रेरणा बेलीपार स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से मिली। साल 2021 में संस्थान ने हिमाचल से सेब की कुछ प्रजातियां थी जिनमें 2023 में फल आ गए।

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