Gorakhpur News: हर दिन 197 कुत्तों के टीकाकरण से रेबीज फ्री सिटी बनेगा गोरखपुर
Gorakhpur News: राजीव दत्त पाण्डेय गोरखपुर। भारत को 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने के लक्ष्य के

Gorakhpur News: राजीव दत्त पाण्डेय गोरखपुर। भारत को 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने के लक्ष्य के साथ ‘नेशनल एक्शन प्लान फॉर डॉग मेडिएटेड रेबीज एलिमिनेशन’ (एनएपीआरई) संचालित किया जा रहा है। सीएम सिटी गोरखपुर को रेबीज मुक्त बनाने के लिए हर साल करीब 63 हजार निराश्रित कुत्तों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाने की जरूरत होगी। इसके लिए नगर निगम को प्रतिदिन औसतन 197 कुत्तों के टीकाकरण का लक्ष्य रखना होगा, यदि अवकाश निकाल साल के 320 कार्य दिवस ही माने। करीब 90 हजार की अनुमानित निराश्रित कुत्तों की आबादी के 70 फीसदी हिस्से का टीकाकरण होने पर तीन से चार साल में पशुजनित रेबीज पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है।
एक साल में 63 हजार टीकाकरण का लक्ष्य
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रति निराश्रित कुत्ते के टीकाकरण पर 310 से 320 रुपये खर्च मानें तो नगर निगम को हर साल करीब दो करोड़ रुपये की धनराशि खर्च करनी होगी। शहरी क्षेत्र और उसके आसपास के निराश्रित कुत्तों का नियमित एंटी रेबीज टीकाकरण कराने की जिम्मेदारी नगर निकायों की है। एबीसी रूल्स-2023 और शासन के निर्देशों के तहत नगर निगम स्तर से ही मास डॉग वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाना है। कुत्ते के काटने के बाद मनुष्यों को एंटी रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोब्युलिन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है। लेकिन सीएम सिटी गोरखपुर में अभी तक मास स्ट्रीट डॉग वैक्सीनेशन और डॉग डीवर्मिंग अभियान शुरू नहीं हो सका है। जबकि गोरखपुर नगर निगम सदन से निराश्रित कुत्तों के नियंत्रण के लिए 20 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव स्वीकृत है।
तीन से चार साल में असर दिखने की उम्मीद
गोरखपुर महानगर और उसके 10 किलोमीटर के बफर क्षेत्र को मिलाकर करीब 90 हजार निराश्रित कुत्ते माने जा रहे हैं। इनमें से 70 फीसदी यानी 63 हजार कुत्तों का टीकाकरण जरूरी है। सालभर में यह लक्ष्य पूरा करने के लिए नगर निगम को प्रतिदिन औसतन 197 कुत्तों का टीकाकरण करना होगा। नियमित अभियान चलने से टीकाकरण का दायरा तेजी से बढ़ाया जा सकेगा।
मास डॉग वैक्सीनेशन को रेबीज की रोकथाम के लिए सबसे प्रभावी और कम लागत वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों में माना जाता है। विश्व स्तर पर मानव रेबीज के 99 फीसदी से अधिक मामलेinfected कुत्तों के काटने से जुड़े हैं। कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण कर वायरस के प्रसार की कड़ी को उसके स्रोत पर ही तोड़ा जा सकता है। कुत्तों की आबादी के करीब 70 फीसदी हिस्से का टीकाकरण होने पर हर्ड इम्युनिटी विकसित होती है, जिससे वायरस के फैलने की क्षमता काफी कम हो जाती है। ऐसा आगरा नगर निगम में हासिल किया गया है। टीकाकरण की तुलना में कुत्ते के काटने के बाद इंसान को एंटी रेबीज उपचार उपलब्ध कराना अधिक खर्चीला है और कई ग्रामीण क्षेत्रों में यह चुनौतीपूर्ण भी है। कुत्तों की आबादी के 70 फीसदी हिस्से का नियमित एंटी रेबीज टीकाकरण होने पर तीन से चार वर्ष में पशुजनित रेबीज पर प्रभावी लगाम लगने की उम्मीद है।
कई नगर निगमों में चल रहा अभियान
आगरा, कानपुर, सहारनपुर, मथुरा-वृंदावन और गाजियाबाद नगर निगमों में मास एंटी रेबीज वैक्सीनेशन अभियान नियमित रूप से चल रहा है। मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने अप्रैल 2026 से जुलाई 2026 तक 34,555 निराश्रित कुत्तों का टीकाकरण किया है। वहीं, गोरखपुर नगर निगम में अभी मास वैक्सीनेशन अभियान नहीं चल रहा है। यहां संचालित एबीसी सेंटर में जिन कुत्तों की नसबंदी की जाती है, उन्हें ही एंटी रेबीज का टीका लगाया जाता है। जुलाई माह में 952 निराश्रित कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण हुआ।


