गोरखपुर में पराली संकट दोगुना, पांच साल में रिकॉर्ड 341 केस दर्ज
संक्षेप: Gorakhpur News - गोरखपुर-बस्ती मंडल में 15 सितंबर से 12 नवंबर के बीच पराली जलाने की 341 घटनाएं हुईं, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुनी है। महराजगंज में सबसे ज्यादा 117 मामले दर्ज हुए हैं। प्रशासन ने जुर्माना लगाने की तैयारी की है, और कृषि वैज्ञानिकों ने पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में चेताया है।
गोरखपुर में धान कटाई के चरम मौसम में पराली जलाने के मामलों ने एक बार फिर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। गोरखपुर-बस्ती मंडल में इस वर्ष 15 सितंबर से 12 नवंबर के बीच पराली जलाने की 341 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जबकि वर्ष 2020 में इसी अवधि में यह आंकड़ा 189 था। यानी बीते पांच वर्षों में पराली जलाने की घटनाएं लगभग दोगुनी हो गई हैं। सबसे ज्यादा 117 मामले महराजगंज जिले में दर्ज हुए हैं, जबकि गोरखपुर में 67, सिद्धार्थनगर में 42, बस्ती में 40, देवरिया में 38, संतकबीरनगर में 28 और कुशीनगर में 09 मामले सामने आए हैं।

प्रशासनिक सख्ती और सेटेलाइट निगरानी के बावजूद कई स्थानों पर किसानों द्वारा पराली जलाने की घटनाएं रुक नहीं रहीं। बुधवार को दोनों मंडल में रिपोर्ट 61 मामलों में सर्वाधिक 23 महराजगंज में, सिद्धार्थनगर में 12, गोरखपुर और बस्ती में 09-09, देवरिया में 05, संतकबीरनगर में 02 और कुशीनगर में 01 मामले रिपोर्ट हुए। वहीं, सेटेलाइट से मिलने वाली गलत सूचनाओं ने किसानों और अधिकारियों दोनों को परेशान कर दिया है।
उप कृषि निदेशक गोरखपुर धनंजय सिंह ने बताया कि गोरखपुर में सेटेलाइट के माध्यम से 67 घटनाएं चिह्नित हुई है, जिनमें 20 वास्तविक पराली जलाने के मामले मिले। 23 कूड़ा जलाने और 24 ऐसी गतिविधियां मिली जहां प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंचीं तो वहां पराली जलाने का कोई प्रूफ नहीं मिला है।

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