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नहीं तय हो सकी जिम्मेदारी, कौन देगा बिजली चोरी का हिसाब

जनवरी में आयोजित गोरखपुर महोत्सव में डीडीयू के जिम्मेदारों की मिलीभगत से हुई बिजली चोरी का हिसाब कौन देगा, अब तक तय नहीं है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी ने मामले बाबत 10 लाख रुपये के बिजली बिल की वसूली विश्वविद्यालय अभियंता से की जाने की बात कही है, लेकिन नोटिस के दो माह बाद भी अभियंता की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। इन सबके बीच विश्वविद्यालय के आला अधिकारियों की खामोशी मामले को ठंडे बस्ते में डालने का इशारा कर रही है।

जनवरी में फरवरी में गोरखपुर विश्वविद्यालय में करीब 42 लाख रुपये बिजली का बिल आया था। आमतौर पर यह राशि 30 लाख रुपये के आस-पास होती थी। 12 लाख रुपये अधिक आने की पड़ताल हुई तो पता लगा कि यह बिल गोरखपुर महोत्सव में लगे स्टाल्स के बिजली का खर्च है। महोत्सव में नियमानुसार स्टाल लगाने वालों को अस्थाई बिजली कनेक्शन लेना था और ऐसा कराया जाना विश्वविद्यालय अभियंता की जिम्मेदारी थी। पड़ताल में पता चला कि दुकानदारों ने विश्वविद्यालय की ही बिजली का इस्तेमाल कर लिया है। वित्त अधिकारी ने मामले के लिए विश्वविद्यालय के इंजीनियरिंग विभाग को जिम्मेदार ठहराया और 10 लाख रूपये वसूले जाने को कहा, लेकिन वसूली बाबत अब तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी।

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  • Web Title:In University, responsibility not fix