गोरखपुर:आवारा कुत्तों की डिवर्मिंग पर जोर, नगर निगम अभी तक नाकाम

गोरखपुर:आवारा कुत्तों की डिवर्मिंग पर जोर, नगर निगम अभी तक नाकाम

संक्षेप:

Gorakhpur News - गोरखपुर में निराश्रित कुत्तों के लिए डिवर्मिंग की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पशु चिकित्सक डॉ. शारतेन्दु का कहना है कि नियमित डिवार्मिंग कुत्तों की सेहत और मानव सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में निर्देश दिए हैं, लेकिन नगर निगम ने अभी तक कोई कदम नहीं उठाया है।

Dec 11, 2025 12:06 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
share

गोरखपुर में आवारा कुत्तों के लिए एंटी-रैबीज टीकाकरण के साथ-साथ डिवर्मिंग भी बहुत जरूरी है। कुत्तों के शरीर में पाए जाने वाले ये परजीवी कीड़े न केवल उनके खुद के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक होते हैं, बल्कि इनमें से कई इंसानों में भी संक्रमण फैला सकते हैं। एबीसी नियमों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में भी डिवर्मिंग को आवश्यक बताया गया है, लेकिन गोरखपुर नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों के लिए डिवर्मिंग की कोई व्यवस्था नहीं है।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

पशु चिकित्सक डॉ. शारतेन्दु ने बताया कि नियमित डिवर्मिंग से पालतू जानवरों की सेहत ठीक रहती है, और उनके परिवार के सदस्य भी संक्रमण से बचे रहते हैं। कुत्तों में कई तरह के खतरनाक परजीवी कीड़े होते हैं, जो उनकी आंत, त्वचा, खून और दिल तक को प्रभावित कर सकते हैं। टेपवर्म, हुकवर्म, राउंडवर्म और हार्टवर्म जैसे कीड़े गंभीर एनीमिया, कमजोरी और जानलेवा बीमारियां पैदा कर सकते हैं, जो इंसानों के लिए भी खतरनाक हैं।

डॉक्टर के मुताबिक, कुत्तों की डिवर्मिंग हर तीन महीने पर की जानी चाहिए, जिसका सालाना खर्च लगभग 400 रुपये आता है। गोरखपुर में लगभग 70 हजार आवारा कुत्तों की डिवर्मिंग पर सालाना 2.80 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके अलावा, एंटी-रैबीज समेत अन्य बीमारियों के टीके पर सालाना 1500 रुपये का खर्च आता है। इन गंभीर खतरों को देखते हुए, नगर निगम को जल्द से जल्द डिवर्मिंग की व्यवस्था करनी चाहिए।