डीजल की महंगाई और किल्लत किसानों पर बढ़ाएगी आर्थिक बोझ
Gorakhpur News - गोरखपुर में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से किसानों की जेब पर असर पड़ेगा। कृषि वैज्ञानिक डॉ रामचेत चौधरी के अनुसार, खेती का बड़ा हिस्सा डीजल पर निर्भर है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी। छोटे और मध्यम किसानों को ज्यादा नुकसान होगा, खासकर सिंचाई और जुताई में।
गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और किल्लत का सीधा असर खरीफ की बुआई की तैयारी में जुटे किसानों की जेब पर पड़ेगा। कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ रामचेत चौधरी कहते हैं कि खेती-किसानी का बड़ा हिस्सा आज भी डीजल पर निर्भर है। खेत की जुताई से लेकर सिंचाई, फसल कटाई और मंडी तक अनाज पहुंचाने में डीजल का उपयोग होता है। ऐसे में डीजल महंगा होने से किसानों की उत्पादन लागत बढ़ना तय है। राहत जल्द नहीं मिली तो इसका असर फसलों की कीमत और आम लोगों की रसोई तक पड़ेगा।
खरीफ की बुआई की तैयारी
वर्तमान में खरीफ की बुआई के लिए किसान खेतों की जुताई करा रहे हैं। इसके लिए इस्तेमाल होने वाली मशीन ट्रैक्टर, ईधन के रूप में डीजल का इस्तेमाल होता है। ऐसे में डीजल के दाम बढ़ने से खेत की जुताई, बुवाई और कटाई का खर्च बढ़ जाएगा। जिन किसानों के पास खुद का ट्रैक्टर नहीं है, उन्हें किराये पर मशीनें लेने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। इसका असर छोटे और मध्यम किसानों पर ज्यादा पड़ेगा।
सिंचाई पर भी बढ़ा बोझ
खरीफ सीजन में गोरखपुर जनपद में सर्वाधिक खेती धान की होती है। धान की फसल को ज्यादा ही पानी चाहिए होता है, इसके लिए भी अधिकांश किसान डीजल पंप पर ही निर्भर हैं। प्रगतिशील किसान श्रद्धानंद तिवारी उर्फ उत्तम बाबा कहते हैं कि गांवों में आज भी किसान डीजल इंजन ही सिंचाई कर रहे हैं। धान, गन्ना और सब्जियों जैसी फसलों में बार-बार पानी की जरूरत होती है, इसलिए इन फसलों की लागत और ज्यादा बढ़ सकती है। पहले ही खाद, बीज और कीटनाशक महंगे हैं, अब डीजल मुश्किलें बढ़ा रहा।
सरकारी सहायता की उम्मीद
‘अनुदान पर ट्रैक्टर एवं फार मशीनरी बैंक की सुविधा लेने वालों के लिए जल्द ही जुताई बुआई की दरें तय की जाएगी। ताकि छोटे किसानों को मनमानी और अनावश्यक बोझ से बचाया जा सके।’
धनंजय सिंह, उप कृषि निदेशक गोरखपुर
सामान्य प्रश्न
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


