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गोरखपुर

क्षेत्रीय भाषाओं में शोध की अपार संभावनाएं: प्रो. हिमांशु

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Thu, 08 Jul 2021 05:20 AM
क्षेत्रीय भाषाओं में शोध की अपार संभावनाएं: प्रो. हिमांशु

गोरखपुर। निज संवाददाता

क्षेत्रीय भाषाओं और साहित्य में कई ऐसे अनछुए विषय हैं जिन पर शोध की अपार संभावनाएं हैं। साहित्य और इतिहास को पढ़ते हुए हमें विदेशी मानदंडों से निकलना होगा, तभी हम साहित्य व इतिहास से भारतीय संदर्भ में इंसाफ कर सकेंगे।

यह बातें दीदउ गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने कही। वे बुधवार को उर्दू विभाग द्वारा आयोजित सात दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने उन्नीसवीं सदी के साहित्यिक और ऐतिहासिक प्रसंगों का जिक्र करते हुए शोध की संभावनाओं पर अपने विचार रखे।

मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के उर्दू विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रईस अनवर ने कहा कि शोधकर्ताओं को प्राचीन उर्दू साहित्य को ध्यान से पढ़ना चहिए, ताकि उनकी भाषा दुरुस्त हो सके और उनके ज्ञान में इजाफा हो। व्याख्यान के बाद विद्याथि्रयों ने प्रश्न पूछे जिनके जवाब वक्ताओं द्वारा दिए गए। प्रथम सत्र का संचालन डॉ. महबूब हसन व दूसरे सत्र का संचालन डॉ. साजिद हुसैन अंसारी ने किया।

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