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गोरखपुर, निज संवाददाता।
अभियान थिएटर ग्रुप द्वारा आयोजित पांच दिवसीय रंग महोत्सव के तीसरे दिन रंग विमर्श में ‘बेहतर रंगमंच की रेसिपी विषय पर मंथन किया गया। वरिष्ठ रंगकर्मी नीरज कुंदेर ने अभिनेता पीयूष मिश्रा से बात की। बतौर वक्ता पीयूष ने अपने अंदाज में जवाब दिया।
एक सवाल के जवाब में पीयूष ने कहा कि रंगकर्म में जितनी परेशानी पहले थी, उतनी ही आज भी है। परेशानी के कारण इससे दूर नहीं होना चाहिए। जो भी अभिनय की दुनिया में आना चाहता है, उसे रंगमंच जरूर करना चाहिए। उन्होंने कलाकारों को सलाह दी कि पहले चार से पांच साल जमकर थिएटर करें, तब फिल्मी दुनिया की ओर रुख करें। उन्होंने अभिनय से पहले पढ़ाई पर भी जोर देते हुए कहा कि बच्चों को पहले 15 साल तक पढ़ाई कराएं, उसके बाद उनका भविष्य को लेकर निर्णय उन्हीं पर छोड़ दें।
भाग्य व परिश्रम के द्वंद्व के सवाल पर पीयूष ने कहा कि सफलता के लिए केवल भाग्य काफी नहीं है। सभी को संघर्ष करना ही पड़ता है। दर्शकों की मांग पर उन्होंने जब अपना लिखा गीत ‘आरंभ है प्रचंड सुनाया तो तालियों से पूरा हॉल गूंज उठा। इस अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन राय, संयोजक श्रीनारायण पांडेय आदि उपस्थित रहे।
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