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1 सितम्बर, 2020|4:10|IST

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घर का चूल्हा जला रहा है मासूम ‘श्रवण कुमार

घर का चूल्हा जला रहा है मासूम ‘श्रवण कुमार

श्रवण कुमार की कहानी आपने जरूर पढ़ी होगी। उसे पढ़ते समय आपकी आंखों में भले न आंसू आए हों लेकिन इस मासूम ‘श्रवण कुमार के संघर्षों की कहानी विचलित करने वाली है। आठ साल की उम्र में एक बेटा अपनी और अपने दिव्यांग मां-बाप की भूख मिटाने के लिए सब्जियों का ठेला लगा रहा है। वह सब्जियां बेच कर दो जून की रोटी का जुगाड़ करता तब घर पर चूल्हा जल पाता। इस बेबस परिवार के दर तक न तो सरकारी योजनाएं पहुंची और न ही दानवीर।

एम्स के बगल में स्थित आदर्श नगर मोहल्ले में विजय पासवान अपनी पत्नी मैनावती देवी के साथ टिनशेड के मकान में रहते हैं। उनका आठ साल का बेटा अरुण नन्ही उम्र में ही मां-बाप का सहारा बन गया है। गरीब विजय मजदूरी कर परिवार का पालनपोषण करते थे। नवम्बर 2019 में दुर्घटना में उनके पैर में गंभीर चोट आई। पैर में रॉड डालना पड़ा। अब वह चल-फिर भी नहीं पाते। चोट अभी पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है। पैर के अंदर मवाद है। वहीं अरुण की मां दोनों हाथों से दिव्यांग है। कुछ दिन तक तो जैसे-तैसे मामला चला पर जब दिक्कत होने लगी तब मैनावती ने सब्जी की दुकान लगा ली। मां के हाथों में दिक्कत होने से अरुण भी सब्जी बेचने लगा। पढ़ाई की उम्र में गरीबी ने एक झटके में अरुण के हाथों से किताबें छीन ली।

अरुण कहता है कि पैसा न होने से कई दिनों तक घर में चूल्हा नहीं जला था। इस पर उसने सोचा कि वह ठेले पर घूम कर सब्जी बेचेगा। अपनी बेबसी वह इस तरह बयां करता है, साहब! गरीब का बेटा हूं पढाई करू या फिर दो वक़्त की रोटी का जुगाड़।

इस दर पर सरकारी योजनाएं पहुंचीं ही नहीं

सरकारी योजनाओं ने भी इस परिवार से मुंह मोड़ लिया है। 70 प्रतिशत से ज्यादा का दिव्यांग सर्टिफिकेट होने के बाद मां को दिव्यांग पेंशन नहीं मिलती। गरीबी रेखा से नीचे का जीवन है पर राशनकार्ड नहीं है। आवास भी मिला, टिनशेड में रहते हैं। सौभाग्य की बिजली भी इनके यहां नहीं पहुंच पाई है। दानदाता बहुत हैं लेकिन मदद मिली तो पांच सौ रुपये की। वह भी इलाके के पूर्व पार्षद ने दिया।

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  • Web Title:Home stove is burning innocent 39 Shravan Kumar