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गोरखपुर

22 साल से एचआईवी संक्रमित, 110 लोगों को दिया रोजगार

हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरPublished By: Newswrap
Tue, 01 Dec 2020 03:02 AM
22 साल से एचआईवी संक्रमित, 110 लोगों को दिया रोजगार

एचआईवी संक्रमण से जूझ रहे एक युवक का जज्बा मिसाल बन गया है। उसने न सिर्फ खुद को संभाला वरन अब वह 110 लोगों को रोजगार भी दे रहा है। उसके साथ रोजगार पाने वालों में 60 एचआईवी संक्रमित हैं। इतना ही नहीं युवक पूर्वी यूपी के चार जिलों में संक्रमितों को जिन्दगी के जंग में मदद कर रहा है।

कुशीनगर के कसया रहने वाला 42 वर्षीय युवक पिछले 22 साल से एचआईवी से संक्रमित है। इस बीमारी को अभिशाप मानने की बजाय युवक ने उसे चुनौती के तौर पर लिया। उसने एचआईवी संक्रमितों की मदद के लिए कुशीनगर में वर्ष 2007 में स्वयं सेवी संस्था कुशीनगर वेलफेयर फॉर पीपुल लिविंग विथ एड्स सोसायटी शुरू की। इस समय संस्था कुशीनगर समेत पूर्वी यूपी के चार जिलों में एचआईवी संक्रमितों की मदद कर रही है। इस संस्थान में 110 कर्मचारी हैं, जिनमें से 60 एचआईवी संक्रमित है। इसके अलावा 100 से अधिक संक्रमित बतौर स्वयंसेवक जुड़े हैं।

डॉक्टर बनना चाहते थे

पिता सिंचाई विभाग के कर्मचारी थे। वह बेटे को डॉक्टर बनाना चाहते थे। युवक ने डॉक्टर बनने के लिए तैयारी की। हालांकि इसी दौरान बीमारी का पता चला जिसके बाद पढ़ाई छूट गई।

दो साल रहा अवसाद में

युवक ने बताया कि बीमारी का पता चलने के बाद समाजिक रूप से बहिष्कृत जैसा हो गया। लोग दूर-दूर रहने लगे। इससे परिवार ही अवसाद में चला गया। इस अवसाद से उबर ने में दो साल लगे।

दो बेटियों का पिता है युवक

युवक ने बताया कि अवसाद से उबरने के बाद नए सिरे से जिंदगी शुरू की। लोगों को जोड़ने लगा। क्षेत्र में संक्रमितों की मदद करना शुरू किया। इस दौरान शादी हुई। आज दो बेटियों का पिता हूं। दोनों एचआईवी निगेटिव हैं।

एचआईवी संक्रमित 17 युगल मिला चुका है विहान नेटवर्क

जिले में एचआईवी संक्रमित लोगों को नई जिन्दगी देने का काम विहान नेटवर्क कर रहा है। इस नेटवर्क से करीब छह हजार संक्रमित जुड़े हैं। नेटवर्क के समन्वयक अकबर अली ने बताया कि नेटवर्क संक्रमितों के जीवन को सरल व सहज बनाने में मदद करता है। अब तक 17 जोड़ों की शादी करा चुका है। इसमें युवक और युवती दोनों संक्रमित हैं। इसके अलावा नेटवर्क की मदद से संक्रमितों को रोजगार मिला है। संक्रमितों के पास समय से एआरटी दवा पहुंचाने और जो लोग दवा नहीं ले रहे हैं उनका फॉलोअप करने की जिम्मेदारी भी है। नेटवर्क के साथ जुड़कर संक्रमित स्वयंसेवा भी करते हैं।

छूने से नहीं होती है यह बीमारी

बीआरडी के एआरटी के डॉ. रवि श्रीवास्तव ने बताया कि एचआईवी एक संक्रामक बीमारी है। इस बीमारी को लेकर कई भ्रम समाज में हैं। लोग संक्रमित मरीजों को स्पर्श करने से डरते हैं। उनके साथ रहने, छूने और खाना खाने से कतराते हैं। यह महज एक भ्रम है।

खून के संपर्क में आने से होती है यह बीमारी

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सर्जन डॉ. अशोक यादव ने बताया कि यह बीमारी ब्लड के सम्पर्क में आने की वजह से ही मुख्य रूप से होती है। इस तरह के मरीजों से इससे बचना चाहिए। एचआईवी संक्रमित के साथ खाने-पीने या मेलजोल से संक्रमण नहीं होता है। यह पूरी तरह से महज अफवाह है कि कपड़े पहनने या उसके जूठे बर्तन में खाने या छूने से बीमारी फैलती है।

मरीजों की न करें उपेक्षा

बीआरडी मेडिकल कालेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. राजेश राय ने बताया कि एचआईवी पॉजिटिव मरीजों के साथ उपेक्षा वाला बर्ताव नहीं करना चाहिए। अन्य रोगों की तरह इसका भी उपचार किया जाता है।

लक्षण

- बुखार

- ठिठुरन

- जोड़ों में दर्द

- मांसपेशियों में दर्द

- गले में खराश

- पसीना (खासकर रात में)

- बढ़ी हुई ग्रंथियां

- लाल चकत्ता

- थकावट

- कमजोरी

- वजन में गिरावट

एचआईवी संक्रमण के कारण

- असुरक्षित यौन संपर्क

- संक्रमित रक्त चढ़ाने से

- संक्रमित इंजेक्शन, ब्लेड से

इनसे नहीं होता एचआईवी

- त्वचा के स्पर्श से

- थूकना

- दांत काटने

- छीकने

- स्नानगृह, तौलिया और बर्तनों के प्रयोग से

- मच्छरों के काटने से

संक्रमित व्यक्ति ऐसे करें बचाव

- हर बार यौन संपर्क बनाते समय नया कंडोम इस्तेमाल करें

- एचआईवी संक्रमित हैं तो अपने यौन साथी को बताएं

- स्वच्छ सुई का प्रयोग करें, शराब और धूम्रपान न करें

- व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं जैसे रेजर, टूथब्रश या चिमटी को अलग रखें

- रक्तदान अथवा अंगदान ना करें, स्तनपान न कराएं।

- गर्भधारण से पूर्व विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।

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