Health department become helpless before mosquito experts said in sanvad in gorakhpur - मच्छर को टक्कर: मच्छरों के आगे बेबस है स्वास्थ्य महकमा: VIDEO DA Image

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मच्छर को टक्कर: मच्छरों के आगे बेबस है स्वास्थ्य महकमा: VIDEO

पूर्वी यूपी में मच्छर लगातार ताकतवर और खतरनाक होते जा रहे हैं। जिला भी मच्छरों के वार से अछूता नहीं है। नगर निगम व मलेरिया विभाग के मच्छरों से निपटने के तमाम अभियानों के बाद भी मच्छरजनित बीमारियों के मामले हर साल सामने आ रहे हैं। मच्छरों के कारण पूर्वी में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 'मच्‍छर को टक्‍कर' अभियान के तहत सोमवार को आयोजित संवाद में विशेषज्ञों ने कहा कि मच्छर बीमारी नहीं फैलाते बल्कि मच्छर के काटने पर हमारे अन्दर कुछ ऐसे परिजीवी डाल देते हैं, जिनकी वजह से बीमारी होती है।

इसको वेक्टर कहते हैं। बरसात मच्छरों के प्रजनन का सबसे मुफीद सीजन है। छतों पर फैले कबाड़ में बारिश का जमा पानी में एडिज मच्छर की कालोनियां विकसित हो जाती हैं। गलियों की नाली, तालाब व गड्ढों में रूके पानी में मलेरिया के मच्छर पनपते हैं। एसी, कूलर व गमले के रूके पानी भी मच्छरों के प्रजनन का केन्द्र बन जाते हैं। स्वास्थ्य विभाग के कीट विज्ञानी डॉ. वीके श्रीवास्तव ने बताया कि बरसात के सीजन में मच्छरों का घनत्व तीन से चार गुना तक बढ़ जाता है। ऐसे में मरीजों की संख्या भी बढ़ जाती है।


गांव के अस्पताल से लेकर बीआरडी मेडिकल कालेज तक भर्ती हैं मरीज
इंसेफेलाइटिस, डेंगू और मलेरिया के मरीज पहुंच रहे अस्पताल
फैलेरिया के मरीजों की संख्या भी बढ़ी
मेडिकल कालेज के वार्ड में बढ़ी बेडों की संख्या
गांव के अस्पतालों में बड़ी संख्या में पहुंच रहे मरीज

अस्पताल में बढ़ी मरीजों की संख्या
मच्छरों के प्रकोप के कारण ही बरसात को बीमारी का सीजन माना जाता है। दर्द, तेज बुखार और झटका के मरीजों की भरमार हो जाती है। गांव के अस्पतालों में इलाज के इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। आलम यह है कि मरीज शहर के बड़े अस्पतालों की तरफ रूख कर रहे हैं। जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कालेज में बालरोग विभाग के सभी बेड फुल हैं। गांव में बने इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर में पिछले वर्ष की तुलना में बुखार के भर्ती मरीजों की संख्या दो गुना से अधिक हुई है। 

डॉक्टर व पैरामेडिकल की छुट्टी पर रोक
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टॉफ की सामान्य छुट्टी पर रोक लगा दी है। विशेष परिस्थिति में ही कर्मचारी को अवकाश मिलेगा। बीआरडी में बालरोग विभाग में नर्सों के तबादले पर भी रोक लग गई है। 

धान के खेत में पनपते हैं जापानी इन्सेफेलाइटिस के मच्छर
बरसात को इंसेफेलाइटिस का मुख्य सीजन माना जाता है। धान के खेतों में पनपने वाले मच्छर जापानी इन्सेफेलाइटिस वायरस से संक्रमित होते हैं। इसे फ्लेवी-वायरस कहते हैं। बत्तख, बगुला और सूअर के ही शरीर में इस बीमारी के वायरस पनपते और फलते-फूलते हैं। मच्छरों द्वारा यह वायरस पशु-पक्षियों से इंसानों शरीर में पहुंच जाता है। इस वर्ष बीआरडी मेडिकल कालेज में इस बीमारी के अब तक 189 मरीज भर्ती हो चुके हैं। जिसमें 31 की मौत हो गई। जिला अस्पताल और इंसेफेलाइटिस ट्रीटमेंट सेंटर में भर्ती मरीजों की संख्या 102 तक पहुंच गई है। 

गंदे पानी में पनपते हैं मलेरिया के मच्छर
इस सीजन में जलजमाव की समस्या आम है। शहर से लेकर गांव तक लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। शहर की नालियां चोक हैं।   इसके कारण मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। यह बीमारी मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होती है। यह मच्छर गंदे और दूषित पानी में पनपते हैं। जांच की सुविधाओं के कारण मलेरिया की पहचान सहज होती जा रही है। स्वास्थ्य महकमा पिछले वर्ष मलेरिया के सिर्फ 21 मरीज ही ढूंढ सका। हालांकि बीआरडी मेडिकल कालेज के सेंट्रल पैथोलॉजी की जांच में 272 मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि हुई। इस वर्ष भी 114 मरीजों में इस बीमारी की पहचान हुई है। 

साफ पानी में मौजूद रहते हैं डेंगू का लार्वा 
डेंगू बुखार डेन वायरस के कारण होता है। एक बार शरीर में वायरस जाने के बाद डेंगू के बुखार के लक्षण आमतौर पर 5 से 6 दिन के भीतर दिखाई देने लगते हैं। यह एडीज नामक मादा मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर दिन के समय में काटता है। इसी मच्छर के काटने से चिकनगुनिया भी होता। इसमें शरीर के जोड़ों में तेज दर्द होता है। इस वर्ष सरकारी अस्पतालों में डेंगू के 9 केस सामने आए हैं। बीआरडी मेडिकल कालेज के इंसेफेलाइटिस से जूझ रहे आठ मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई। निजी अस्पतालों में यह संख्या करीब दो से तीन गुना है। डेंगू की अपेक्षा चिकनगुनिया के मरीज कम मिले है।

क्यूलेक्स से फैल रहा फाइलेरिया
जिले में फाइलेरिया का प्रकोप है। जिले में करीब 1500 मरीज चिन्हित हैं। यह बीमारी मादा क्यूलेक्स मच्छर से फैलता है। मादा एक बार में 150-200 अंडे देती है।  और यह भी शाम के समय में लोगों को काटती है। यदि कोई संक्रमित मादा मच्छर अंडे देती है तो उससे पैदा होने वाले सारे मच्छर पहले से ही संक्रमित होंगे। संक्रमित मच्छर किसी भी स्वस्थ्य व्यक्ति को काट कर बीमार बना सकते हैं। हर साल करीब 110 से 130 नए मरीज चिन्हित हो रहे हैं। 

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