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नए सत्र से चार साल का होगा स्नातक

गोरखपुर, निज संवाददाता।

नए सत्र से चार साल का होगा स्नातक
हिन्दुस्तान टीम,गोरखपुरSat, 24 Feb 2024 02:00 AM
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गोरखपुर, निज संवाददाता।
दीनदयाल गोरखपुर विश्वविद्यालय में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नए सत्र से स्नातक चार साल का होगा। हर साल के बाद पाठ्यक्रम छोड़ने पर खाली हाथ न लौटने का विकल्प खुला रहेगा।

पहले साल के बाद सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद डिप्लोमा और तीसरे साल पर डिग्री मिल जाएगी। जो चार साल का स्नातक कोर्स पूरा करेगा, उसे स्नातक आनर्स की डिग्री तो मिलेगी ही, बिना परास्नातक के शोधार्थी बनने का अवसर दिया जाएगा। यही नहीं, स्नातक के साथ कौशल विकास का एक पाठ्यक्रम करने का अतिरिक्त अवसर भी मिलेगा। ऐसे पाठ्यक्रम शुरू करने का अवसर संबंद्ध कॉलेजों को भी दिया जाएगा।

सांस्कृतिक व खेल गतिविधियों पर नए सत्र से विशेष जोर रहेगा। विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों वाले जिलों में भी अंतर महाविद्यालयी खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी तो अंतर महाविद्यालयी सांस्कृतिक आयोजन भी किए जाएंगे। इसके लिए गतिविधि कैलेंडर को विश्वविद्यालय प्रशासन अंतिम रूप दे रहा है। कॉलेज का वातावरण सुखद व आनंददायी हो, इसके लिए परिसर को ग्रीन कैंपस बनाया जा रहा है। संवाद भवन और दीक्षा भवन को अधिक आकर्षक बनाने की तैयारी है।

परिसर में सड़क से लेकर पगडंडी तक चमकाने की योजना विश्वविद्यालय ने बना ली है। नए सत्र की शुरुआत से इन योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य भी बना लिया गया है। परास्नातक पाठ्यक्रम में शोध और इंटर्नशिप का विकल्प मिलेगा। शोध का नया और छात्र केंद्रित अध्यादेश भी नए सत्र से लागू हो जाएगा, जिससे शोध में पंजीकरण से लेकर प्रस्तुतिकरण तक आसान हो जाएगा।

ऑनलाइन पोर्टल से आसान होगी प्रक्रिया

विश्वविद्यालय कई ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रहा है। उससे प्रवेश से लेकर परीक्षा व परिणाम तक की प्रक्रिया आसान होगी। यहां तक कि डिग्री तक के लिए अलग पोर्टल तैयार किया जा रहा है। विश्वविद्यालय महाविद्यालयों का डाटा भी अपनी वेबसाइट पर उपलब्ध कराने जा रहा है।

नए सत्र में दीनदयाल गोरखपुर विश्वविद्यालय नए कलेवर में दिखेगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का परिसर में पूरा असर रहेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। अकादमिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से नए सत्र से सभी नई योजनाओं का संचालन शुरू हो जाएगा। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम इसमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।

प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू

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