बोले गोरखपुर : ओवरहेड टैंक बने-पाइपलाइन बिछी, फिर भी प्यासा चरगांवा

Jan 06, 2026 11:55 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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Gorakhpur News - गोरखपुर के वार्ड 8 चरगांवा में सरकारी पाइपलाइन और ओवरहेड टैंक होने के बावजूद लोगों को पानी नहीं मिल रहा है। लगभग 35,000 की आबादी निजी बोरबेल पर निर्भर है। नागरिकों ने जलापूर्ति की कमी और खराब सड़कों की शिकायत की है। स्थानीय पार्षद ने समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया है।

बोले गोरखपुर : ओवरहेड टैंक बने-पाइपलाइन बिछी, फिर भी प्यासा चरगांवा

यहां सरकारी पाइपलाइन घरों तक पहुंच चुकी है, ओवरहेड टैंक खड़े हैं, फिर भी लोगों को पानी मयस्सर नहीं है। यह तस्वीर है गोरखपुर के वार्ड संख्या 8 चरगांवा की। यहां सरकारी जलापूर्ति सिर्फ कागजों में चल रही है। हकीकत में करीब 35 हजार की आबादी निजी बोरबेल पर निर्भर है। वार्ड में सड़कें जर्जर, जलनिकासी का अभाव और पार्को की बदहाली भी आम है। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान’ ने बोले गोरखपुर की कड़ी में चरगांवा वार्ड के नागरिकों से उनकी समस्याओं पर बात की तो लोगों ने मूलभूत सुविधाओं की कमी के प्रति खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने 1990 के दशक में वार्ड संख्या 8 चरगांवा में राप्तीनगर फेज-2, फेज-3 और फेज-4 जैसी बड़ी आवासीय कॉलोनियां विकसित कीं।

जलापूर्ति के लिए तीन बड़े ओवरहेड टैंक बनाए गए। साल 2019 में जल निगम ने क्षेत्र में जलापूर्ति बहाल करने के उद्देश्य से पाइपलाइन बिछाई। लोगों के घरों तक कनेक्शन भी दिए गए। इसके बाद नगर निगम ने जलापूर्ति व्यवस्था का हैंडओवर भी ले लिया। लेकिन वर्षों बाद भी पाइपलाइन और कनेक्शन होने के बाद भी नलों से पानी नहीं आता। ये योजनाएं धरातल पर बेअसर साबित हो रही हैं। वार्ड की बड़ी आबादी आज भी निजी ट्यूबवेल के जरिए भूमिगत जल पर निर्भर है। क्षेत्रीय पार्षद सरोज पासवान बताती हैं कि नगर निगम द्वारा हैंडओवर लेने के बाद नियम के अनुसार संपत्तिकर के साथ जलकर का बिल आने लगा। इस कारण स्थानीय नागरिकों और नगर निगम के बीच अक्सर विवाद की स्थिति बन जाती है। पार्षदों के दबाव में नगर निगम फिलहाल संपत्तिकर के साथ जलकर की वसूली नहीं कर रहा है। लेकिन जलापूर्ति न होने से नागरिकों में काफी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि चरगांवा में सेठी फ्लावर मिल के पीछे और आगे, हनुमान मंदिर के पीछे की कॉलोनियों तथा बैंक ऑफ बड़ौदा के सामने के घरों में जलापूर्ति की पाइप लाइन डाली गई है। घरों में कनेक्शन भी मौजूद हैं, लेकिन वर्षों से जलापूर्ति ठप है। सिर्फ सीमित हिस्सों में ही कभी-कभार पानी की आपूर्ति हो पाती है। ध्रुव नारायण सिंह, डॉ. घनश्याम रमन, नित्यानंद तिवारी, एके सिंह, चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई गई जलापूर्ति योजनाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं। लोग मजबूरी में निजी ट्यूबवेल लगवाने को विवश हैं, जिससे भूजल स्तर पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और जल निगम से जल्द स्थायी समाधान की मांग की है। तीन मिनी ट्यूबवेल लगे, एक ही चालू राप्तीनगर चतुर्थ चरण के उद्घोष पार्क, मिलेनियम सिटी और पोखर-भिंडा करीम नगर में जलापूर्ति के लिए तीन मिनी ट्यूबवेल लगाए गए हैं, लेकिन वर्तमान में इनमें से सिर्फ पोखर-भिंडा करीम नगर का मिनी ट्यूबवेल ही सक्रिय है। उद्घोष पार्क और मिलेनियम सिटी के मिनी ट्यूबवेल महीनों से खराब पड़े हैं, जिससे बड़ी आबादी को नियमित जलापूर्ति नहीं मिल पा रही है। मिनी ट्यूबवेल खराब होने की शिकायतें कई बार संबंधित विभाग से की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन लोगों को निजी सबमर्सिबल या ट्यूबवेल के सहारे अपनी जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं। 35 साल से बेकार पड़े ओवरहेड टैंक ओवरहेड टैंक से जलापूर्ति का लाभ पूरे इलाके को नहीं मिल पा रहा है। मिलेनियम सिटी क्षेत्र में ओवरहेड टैंक के माध्यम से कुछ हिस्सों में ही सीमित जलापूर्ति की जा रही है। मिलेनियम सिटी का ओवरहेड टैंक पोखर भिंडा मिनी ट्यूबवेल से भरता है। वहीं, जीडीए द्वारा वर्षों पहले बनाए गए ओवरहेड टैंक आज भी अनुपयोगी पड़े हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क (जिओ पार्क), सरस्वती शिशु मंदिर पार्क और नवल्स एकेडमी के पास बनाए गए ओवरहेड टैंक पिछले करीब 35 वर्षों से एक बार भी इस्तेमाल नहीं किए गए। करोड़ों रुपये की लागत से बने ये टैंक अब सिर्फ लापरवाही और योजनागत विफलता की निशानी बनकर रह गए हैं। यहां पार्षद निधि से सुधरी स्थिति स्थानीय पार्षद सरोज पासवान ने अपनी पार्षद निधि से हरसेवकपुर नम्बर एक, पोखर भिंडा, करीमनगर और श्रीराम पुरम कॉलोनी में जलापूर्ति के लिए पाइपलाइन डलवाया है। यहां अधिकांश हिस्सों में घरेलू कनेक्शन के जरिए जलापूर्ति मिल रही है। जर्जर सड़कों के सीसी बनाने का इंतजार चरगांवा मुख्य मार्ग से एके राय के मकान होते हुए अखिलेश कुमार पाठक के मकान तक एवं अन्य गलियों जर्जर हैं। इसी तरह आनंद बिहार कॉलोनी की सड़कें, नागे यादव के मकान से मनोज श्रीवास्तव के मकान तक व अन्य गलियां और अजय द्विवेदी के मकान से अमित वर्मा के मकान होते हुए शिव मंदिर तक जाने वाली सड़क जर्जर है। राप्तीनगर फेज-4 में केशभान तिवारी के मकान से अमित श्रीवास्तव के मकान तक एवं अन्य गलियां जर्जर है। चरगांवा में सेंट्रल बैंक से जायसवाल मार्ट होते हुए रत्नेश गुप्ता के मकान तक, नमकीन गली में मुरारी के मकान से सुनील यादव के मकान तक व अन्य गलियों की हालत खराब है। राप्तीनगर फेज-4 स्पोर्ट्स कॉलेज के पीछे उत्सव गेस्ट हाउस से शिंदू सिंह के मकान तक व अन्य गलियों में जर्जर सड़क और जलनिकासी की सुविधा की दरकार है। 500 मीटर लम्बी सड़क क्षतिग्रस्त राप्तीनगर फेज फेज 4 के मध्य से गुजरने वाली तकरीबन 500 मीटर लम्बी यदुवंशी स्वीट्स से इंद्रप्रस्थ कॉलोनी तक जाने वाली सड़क क्षतिग्रस्त है। सड़क के दोनों तरफ बनी नालियों पर अतिक्रमण है। कई स्थान से क्षतिग्रस्त नालियों का पानी खाली प्लाट में फैल गंदगी फैलाता है। बारिश में सड़क और नाली का पानी एक हो जाता है। फेज फोर में ठकुराई पार्क और नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क की सड़कें भी क्षतिग्रस्त हैं। यहां भी जलनिकासी चौपट है। उपेक्षित पड़े पार्कों को दिन बहुरने का इंतजार वार्ड संख्या 08 चरगांवा के पार्क नगर निगम की उदासीनता का शिकार बने हुए हैं। शिक्षक नेता जगदीश पाण्डेय ठकुराई के घर के सामने जीडीए द्वारा बनाया गया पार्क जंगली घास से अटा पड़ा है। नेताजी सुभाष नगर पार्क में बच्चों के झूले टूटे हैं, पाथवे क्षतिग्रस्त है और दशकों पुरानी पानी की टंकी आज तक उपयोग में नहीं आई। हाईमास्ट और अधिकांश स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हैं। इंद्रप्रस्थ कॉलोनी का पार्क भी 25 वर्षों से उपेक्षा झेल रहा है। न टॉयलेट ब्लॉक है, न गार्डेन चेयर, न पाथवे और न ही जलापूर्ति की व्यवस्था। शाम होते ही अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व पार्क को नशे का अड्डा बना लेते हैं। पार्षद सरोज पासवान भी स्वीकार करती हैं कि वार्ड में 46 पार्क हैं, लेकिन अधिकतर में कोई ठोस काम नहीं हुआ है। बोले जिम्मेदार अपने वार्ड में क्षतिग्रस्त सड़कों के सीसी बनाने, जलनिकासी के लिए आरसीसी नालियां और साइट पटरी बनाने के लिए 08 परियोजनाएं बना कर त्वरित आर्थिक विकास परियोजना में स्वीकृति के लिए प्रस्तावित है। कुल 5.73 किमी सड़क निर्माण पर 13.24 करोड़ खर्च का इस्टीमेट है, लेकिन अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिली है। कई बार बोर्ड की बैठक में भी समस्याओं को उठाने के साथ महापौर के समक्ष भी उठा चुकी हूं। जलापूर्ति की सुविधा बहाली के लिए भी नगर निगम में संघर्ष जारी है। सरोज पासवान, पार्षद, चरगांवा वार्ड 8 बोले नागरिक नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क में ओपेन जिम और आस-पास की सड़कों को सीसी बनाने के साथ जलनिकासी का इंतजाम कराया जाए। सड़कों से अतिक्रमण भी हटाए जाएं। ध्रुव नारायण सिंह आठ साले पहले सड़कें बनी लेकिन रखरखाव के अभाव में सड़कें क्षतिग्रस्त और नालियां जर्जर हो गईं। पिछले दिनों पैचवर्क कराया गया, वह भी कुछ ही दिनों में बदहाल हो गया। डॉ घनश्याम रमन नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क में पानी की टंकी हाथी का दांत बनी खड़ी है। जलापूर्ति के लिए लगाई गई पाइपलाइन भी सूखी पड़ी है। जिम्मेदारों को सुविधाओं की ओर ध्यान देना चाहिए। नित्यानंद तिवारी बारिश के दिनों में सड़कों पर जलभराव हो जाता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क और जगदीश पाण्डेय के घर के समक्ष स्थित पार्क के आसपास खाली प्लॉट में लोगों के घरों के पानी का निकास है। एके सिंह खराब पड़े मिनी ट्यूबवेल को जल्द दुरुस्त कराया जाए और वर्षों से निष्क्रिय ओवरहेड टैंकों को चालू कर नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को भूजल दोहन से राहत मिल सके। चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव जीडीए की कॉलोनी में बेहतर नागरिक सुविधाएं मिलेंगी इस सोच के साथ यहां भूखण्ड खरीद कर मकान बनाया लेकिन इतने वर्षों बाद भी कॉलोनी में जलापूर्ति तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वीरेंद्र प्रताप सिंह कॉलोनी में नागरिक सुविधाओं का अकाल है। सड़कें जर्जर हैं, जलनिकासी और जलापूर्ति का भी इंतजाम नहीं है। पार्क बदहाल पड़े हैं, तमाम शिकायतों के बाद भी काम नहीं हो रहा। डॉ. राजीव उपाध्याय खाली प्लाट में लोगों से घरों से निकला पानी दुर्गंध और आसपास के मकानों में सीलन की वजह बनता है। क्षतिग्रस्त नालियां बनाई जाएं। पुरानी नालियों पर अतिक्रमण भी हटाया जाए। स्मृति शर्मा कॉलोनी की तमाम सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें नहीं जलती हैं। पार्कों में भी रात ढलते अंधेरा हो जाता है। कुछ लाइट ही जलती हैं, नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्ट्रीट लाइटें और सोलर लाइटें लगाई जाए।’ ईशा शर्मा हाथी का दांत बनी पानी की टंकी ध्वस्त कर नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क में टॉयलेट ब्लॉक, लाइटें, ओपन जिम, किड्स जोन और जलापूर्ति की सुविधा दी जाए। जिससे राहत मिले। राजकुमार चौहान कॉलोनी को बने 25 वर्ष हो चुके हैं। जलनिकासी और सड़कें बदहाल हैं। वार्डो के पार्कों में जंगली घास फैली है। बच्चों के झूले, ओपन जिम जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। दुर्गा प्रसाद मिश्र मेरे घर के सामने की जमीन पर 10 साल पहले जीडीए में भाग दौड़ के बाद चाहरदीवार कर पाथवे बना लेकिन रखरखाव के अभाव में यहां बदहाली का आलम है। व्यवस्था में सुधार होना चाहिए। जगदीश प्रसाद पाण्डेय ठकुराई समस्याएं 1. ओवरहेड टैंक और पाइपलाइन होने के बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं। 2. अधिकांश मिनी ट्यूबवेल खराब, लोग निजी ट्यूबवेल पर निर्भर। 3. सड़कों की हालत जर्जर, बारिश में जलभराव और आवागमन बाधित। 4. पार्क उपेक्षित, न लाइट, न झूले, न बुनियादी सुविधाएं। 5. क्षतिग्रस्त नालियां और अतिक्रमण से जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह चौपट। सुझाव 1. सभी ओवरहेड टैंक चालू कर नियमित और समान जलापूर्ति सुनिश्चित करें। 2. खराब मिनी ट्यूबवेल तुरंत दुरुस्त कर हर घर स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित हो। 3. जर्जर सड़कों का सीसी निर्माण और आरसीसी नालियां जल्द बनें। 4. पार्कों का सौंदर्यीकरण कर लाइट, झूले, ओपन जिम स्थापित करें। 5. नालियों से अतिक्रमण हटाकर प्रभावी जलनिकासी व्यवस्था लागू की जाए।

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