रामगढ़झील में जैविक प्रदूषण से जलीय जीवन पर संकट

Mar 07, 2026 09:19 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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Gorakhpur News - गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। गोरखपुर के लोकप्रिय पयर्टन स्थल रामगढ़ झील में बढ़ते जैविक प्रदूषण

रामगढ़झील में जैविक प्रदूषण से जलीय जीवन पर संकट

गोरखपुर, मुख्य संवाददाता। गोरखपुर के लोकप्रिय पयर्टन स्थल रामगढ़ झील में बढ़ते जैविक प्रदूषण और शैवाल की अधिकता के कारण जल की गुणवत्ता लगातार बिगड़ती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं किया गया तो ताल में जलीय जीव-जन्तुओं का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। ताल में काफी दुर्गंध भी हो रही है।शिक्षक नेता तारकेश्वर शाही, अधिवक्ता सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, पंकज पांडेय, नन्दलाल, कृष्णमोहन सिंह कहते हैं कि झील के निकट काफी दुर्गंध हो रही है। पानी भी काफी हरा हो गया है। सुबह टहलते वक्त काफी दुर्गंध होती है। हेरिटेज फाउंडेशन के मनीष चौबे बताते हैं कि सामान्य परिस्थितियों में किसी भी जल स्रोत में जलीय जीव-जन्तुओं के स्वस्थ जीवन के लिए कम से कम 4 मिलीग्राम प्रति लीटर घुलित ऑक्सीजन (डीओ) होना आवश्यक होता है।

लेकिन जब जल स्रोत में जैविक प्रदूषण बढ़ जाता है, सूक्ष्म वनस्पतियां व शैवाल तेजी से पनपने लगते हैं, तो स्थिति गंभीर हो जाती है।मनीष के मुताबिक दिन के समय सूर्य के प्रकाश में जल में ऑक्सीजन की मात्रा कुछ हद तक बनी रहती है, लेकिन सूर्यास्त के बाद रात्रि में श्वसन प्रक्रिया के कारण ऑक्सीजन की खपत लगातार बढ़ती जाती है। इसके परिणाम स्वरूप सूर्योदय तक जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम रह जाती है। ऐसी स्थिति में मछलियों और अन्य जलीय जीवों का दम घुटने लगता है और उनकी मृत्यु तक हो सकती है। झील में जैविक प्रदूषण के प्रवाह को रोकने के साथ नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की मात्रा को नियंत्रित करना होगा, ताकि सूक्ष्म वनस्पतियों और शैवाल की अनियंत्रित वृद्धि पर रोक लगाई जा सके। इसके अलावा नियमित रूप से जल के नमूनों की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि ताल में घुलित ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में बनी रहे। बीती सर्दियों में कुछ ऐसी ही स्थितियों में काफी मात्रा में मछलियों की मौत हो गई थी।कांग्रेस नेता ने एक्स पर जताई चिंताउधर यूपी कांग्रेस के उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने अपने एक्स हेंडल पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा,‘यह मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर का रामगढ़ ताल है, जिसकी खूबसूरती खुद एक मिसाल है। लेकिन प्रदूषण के कारण कुछ दिनों पहले यही ताल मछलियों की सामूहिक कब्रगाह भी बन गया था। आज के इस वीडियो से आप इस प्राकृतिक ताल की बेहाली और प्रदूषण को लेकर शासन-प्रशासन की गम्भीरता को कुछ हद तक समझ सकते हैं।’

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