32 हिस्ट्रीशीटर बने पुलिस के लिए चुनौती, ढूंढे नहीं मिल रहे
Gorakhpur News - गोरखपुर में 32 हिस्ट्रीशीटर पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं। पुलिस को उनके वर्तमान ठिकाने का पता नहीं चल पा रहा है, क्योंकि वे अपने पते पर नहीं रह रहे हैं। यक्ष एप के माध्यम से सत्यापन में यह जानकारी सामने आई है कि कई हिस्ट्रीशीटर वर्षों से गायब हैं।

गोरखपुर, शिवम सिंह अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जिन हिस्ट्रीशीटरों की गतिविधियों पर पुलिस को लगातार नजर रखनी थी, उनमें से शहर के 32 हिस्ट्रीशीटर अब खुद पुलिस के लिए चुनौती बन गए हैं। इसका खुलासा यक्ष एप पर पुलिस सत्यापन में हुआ है।पुलिस को उनके बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पा रही है। वे हिस्ट्रीशीटर अपने दर्ज पते पर नहीं रह रहे हैं और कई के बारे में यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी मौत हो चुकी है या वे अभी जिंदा हैं। दिक्कत यह है कि जब तक की हिस्ट्रीशीटर की मौत की पुष्टि न हो जाए तक तक हिस्ट्रीशीट नष्ट नहीं की जा सकती है।पुलिस
रिकॉर्ड के अनुसार, इन सभी हिस्ट्रीशीटरों की हिस्ट्रीशीट उनके आपराधिक गतिविधियों को देखते हुए लंबे समय पहले खोली गई थी, ताकि उनकी नियमित निगरानी की जा सके। थाने स्तर पर बीट पुलिस और चौकी प्रभारियों को समय-समय पर इनके सत्यापन और गतिविधियों की रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन लंबे समय से इनका सत्यापन नहीं हो पाया। अब इनमें से 32 हिस्ट्रीशीटर पुलिस की पहुंच से बाहर हो गए हैं। हाल ही में यक्ष एप लांच होने के बाद सभी थानों में खोली गई हिस्ट्रीशीटों का सत्यापन कर उनकी ऑनलाइन फीडिंग का काम शुरू किया गया।इसके बाद जब पुलिस टीम संबंधित पते पर पहुंची तो पता चला कि कई हिस्ट्रीशीटर वर्षों पहले ही वहां से जा चुके हैं। कुछ के मकान बंद मिले, जबकि कई जगह पड़ोसियों ने बताया कि वे लंबे समय से दिखाई नहीं दिए। पुलिस को इन हिस्ट्रीशीटरों का वर्तमान ठिकाना पता नहीं चल पा रहा है। ऐसे में यह भी तय नहीं हो पा रहा है कि वे दूसरे जिले या राज्य में रह रहे हैं या फिर उनकी मौत हो चुकी है। पुलिस को उनके पुराने परिचितों, रिश्तेदारों और संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही आधार, बैंक और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से भी उनकी वर्तमान स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।अपराध की गंभीरता के हिसाब से खोली जाती है हिस्ट्रीशीटबदमाश के आपराधिक इतिहास की फाइल को ही हिस्ट्रीशीट कहते हैं। अपराध की गंभीरता को देखते हुए बदमाशों की निगरानी के लिए हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। बदमाश लगातार अपराध कर रहा हो तो निगरानी के लिए यह व्यवस्था होती है। बदमाश को पहले एक्टिव लिस्ट पर लाया जाता है, फिर उसकी निगरानी हिस्ट्रीशीट के माध्यम से होती है। इसके लिए थाने पर फ्लाई सीट रजिस्टर होता है। इसमें हिस्ट्रीशीटरों की इंट्री होती है। हर हिस्ट्रीशीटर की निगरानी के लिए एक-एक सिपाही की ड्यूटी लगती है। नियमों के मुताबिक हिस्ट्रीशीटर को सप्ताह में एक बार थाने या चौकी पर आकर हाजिरी भी देनी होती है। अपराध की गंभीरता के हिसाब से हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। मसलन, लूट, हत्या या डकैती जैसे जघन्य अपराध में दो ही केस पर हिस्ट्रीशीट खोली जा सकती है।
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