अपराधियों की डिजिटल पहचान के लिए गोरखपुर में लगेंगी 1289 मशीनें
गोरखपुर, विवेक पाण्डेयअपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी के लिए पुलिस अब पूरी तरह तकनीक का सहारा ले रही है। जिले में 1289 आधुन

गोरखपुर, विवेक पाण्डेय अपराधियों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी के लिए पुलिस अब पूरी तरह तकनीक का सहारा ले रही है। जिले में 1289 आधुनिक मशीनों के जरिए अपराधियों का डिजिटल डाटा तैयार किया जाएगा। 861 मशीनों की इंस्टॉलेशन पूरी हो चुकी है। इन मशीनों से आरोपितों की फोटो, अंगुलियों के निशान, आंखों की पुतली यानी आइरिस और डीएनए से जुड़ी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।
सिस्टम का कार्यान्वयन
जिले के सभी थानों, चौकियों, जेलों और विशेष इकाइयों में चरणबद्ध तरीके से क्रिमिनल प्रोसीजर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम लागू किया जा रहा है। इसके तहत मोबाइल कैप्चर यूनिट मशीनों के माध्यम से अपराधियों का बायोमेट्रिक डाटा तैयार होगा। सिस्टम पूरी तरह सक्रिय होने के बाद अपराधियों का डिजिटल प्रोफाइल तैयार होगा, जिससे उनकी पहचान और आपराधिक इतिहास तक तत्काल पहुंच संभव हो सकेगी। नई तकनीक के तहत गिरफ्तार होने वाले आरोपितों का बायोमेट्रिक और डिजिटल रिकॉर्ड सीधे ऑनलाइन सर्वर पर अपलोड किया जाएगा। इसमें आरोपित की फोटो, दसों उंगलियों के निशान, आंखों की पुतली और आवश्यकता पड़ने पर डीएनए संबंधी विवरण भी सुरक्षित रखा जाएगा। इससे किसी भी आरोपी के लिए अपनी पहचान छिपाना आसान नहीं होगा।
सिस्टम की स्थिति
अभी पूरी तरह शुरू नहीं हो पाया है सिस्टम
पुलिस मुख्यालय से जारी निर्देशों के अनुसार अधिकृत उपयोगकर्ता द्वारा आरोपितों का इनरोलमेंट किया जाएगा। इसमें फोटो, आइरिस, फिंगरप्रिंट और डीएनए डाटा अपलोड होगा। इसके बाद पर्यवेक्षी अधिकारी उस डाटा का सत्यापन और अनुमोदन करेंगे। अधिकारियों ने निर्देश दिए हैं कि जहां मशीनें लग चुकी हैं, वहां तत्काल इनरोलमेंट शुरू कराया जाए। पुलिस विभाग के अनुसार प्रदेश में पहले चरण के 64 में से 60 और दूसरे चरण के 57 में से केवल तीन जिलों हमीरपुर, कासगंज और जीआरपी सहारनपुर में ही इनरोलमेंट शुरू हो सका है। इसे लेकर मुख्यालय ने नाराजगी जताई है।
अपराधियों की पहचान
कहीं भी छिप नहीं पाएंगे अपराधी
एनसीआरबी ने क्रिमिनल प्रोसीजर आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को अब सीसीटीएनएस/आईसीजेएस प्रगति डैशबोर्ड से भी जोड़ दिया है। ऐसे में सभी इकाइयों को जल्द सिस्टम चालू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि प्रदेश की रैंकिंग प्रभावित न हो। सिस्टम के संचालन के लिए हर थाने में पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डाटा अपलोड करने, सत्यापन करने और रिकॉर्ड अपडेट रखने की जिम्मेदारी तय की जा रही। अधिकारियों का कहना है कि इस व्यवस्था से दूसरे जिले या राज्य में छिपे अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी आसान होगी। साथ ही अपराधियों का स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से जांच प्रक्रिया भी तेज और प्रभावी बनेगी।
सामान्य प्रश्न
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