एमबीबीएस के तीन छात्रों का रिजल्ट नहीं दे रहा डीडीयू
Gorakhpur News - फॉलोअप तीनों एमबीबीएस छात्र 1998 से लेकर 2010 बैच के हैं वर्ष 2024 में

गोरखपुर वरिष्ठ संवाददाता। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के तीन एमबीबीएस छात्र डीडीयू की वजह से डॉक्टर नहीं बन पा रहे हैं। गोरखपुर विश्वविद्यालय दो साल से एमबीबीएस कर चुके छात्रों का रिजल्ट रोक रखा है। यह छात्र 1998 से लेकर 2010 बैच के हैं। इन छात्रों के रिजल्ट जारी करने के लिए दो साल से गोरखपुर विश्वविद्यालय नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से गाइड लाइन मांग रहा है। एनएमसी का जवाब अब तक विश्वविद्यालय को नहीं मिला है। बताया जाता है कि तीनों छात्र लंबे समय से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। 2024 में तीनों ने एमबीबीएस अंतिम वर्ष की परीक्षा दी।
उसके बाद से उनके रिजल्ट घोषित नहीं हुआ है। इसको लेकर गोरखपुर विश्वविद्यालय और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बीच पिछले दो वर्ष से पत्राचार चल रहा है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्र का प्रवेश एमसीआई मानक के तहत हुआ था जिसमें एमबीबीएस करने का कोई समय नहीं तय था। रिजल्ट जारी न होने से वे डॉक्टर नहीं बन पा रहे हैं। वहीं गोरखपुर विवि प्रशासन से इस मामले में बात करने की कोशिश की गई मगर उनसे संपर्क नहीं हो सका। विश्वविद्यालय ने जताई थी आपत्ति दरअसल] बीआरडी मेडिकल कॉलेज की संबद्धता वर्ष 1972 से लेकर 2024 तक दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयू ) से थी। एमबीबीएस छात्रों के अंक पत्र और प्रमाण पत्र विश्वविद्यालय से ही जारी होते थे। परीक्षा भी विश्वविद्यालय लेता था। वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक अमरेन्द्र सिंह ने तीन छात्रों के परिणाम को लेकर सवाल उठाया। अपने पत्र में उन्होंने बताया कि इस वर्ष परीक्षा देने वाले तीन छात्र क्रमशः 1998, 2009 और 2010 बैच में प्रवेश लिया है। इतने लंबे समय तक कोई कैसे एमबीबीएस की पढ़ाई कर सकता है, जबकि यह कोर्स 4.5 वर्ष का है । बीआरडी ने दिया एमसीआई मानक का हवाला विवि के इस पत्र का मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जवाब दिया है। कॉलेज ने उस समय लागू एमसीआई के मानकों का हवाला दिया, जिसमें एमबीबीएस को पूरा करने के लिए किसी समय-सीमा का उल्लेख नहीं है। एमसीआई के नियमों के हवाले से ही बीआरडी प्रशासन ने तीनों छात्रों का रिजल्ट घोषित करने की बात कही थी। विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में उठा मामला इस मामले को वर्ष 2024 में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद में रखा गया था। कार्य परिषद ने पूरे मामले में एनएमसी से दिशा निर्देश लेने की सलाह दी थी। इस पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस संदर्भ में एक पत्र एनएमसी को भेजा है। उसका जवाब अब तक नहीं मिला है। कॉलेज ने इस मामले में अब तक चार से अधिक रिमाइंडर भेजे हैं। जब से मामला लंबित है, अगर रिजल्ट जारी हो जाता तो छात्र अब तक इंटर्नशिप पूरा करके चले गए होते। बेवजह दो साल से छात्र फंसे हुए हैं। रिजल्ट घोषित होने के बाद उन्हें एक वर्ष का इंटर्नशिप करना होगा। जब छात्रों ने प्रवेश लिया था तब एमसीआई के मानक लागू थे। उसमें कहीं भी एमबीबीएस के लिए कोर्स को पूरा करने के लिए कोई मियाद तय नहीं थी। यही जवाब गोरखपुर विश्वविद्यालय को भेजा गया है। डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

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