
पशु तस्कर जवाहिर और फर्जी आईएएस का होगा जेल ट्रांसफर
Gorakhpur News - महुआचाफी कांड के आरोपित जवाहिर यादव और फर्जी आईएएस गौरव कुमार की बदलेगी जेलमहुआचाफी कांड के आरोपित जवाहिर यादव और फर्जी आईएएस गौरव कुमार की बदलेगी जेल
गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता। महुआचाफी कांड के मुख्य आरोपित और पशु तस्करी गिरोह के सरगना जवाहिर यादव तथा खुद को आईएएस अधिकारी बताकर ठगी करने वाला फर्जी आईएएस गौरव कुमार को दूसरे जेल में ट्रांसफर किया जाएगा। इनके जेल बदले जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जेल प्रशासन ने दोनों की गतिविधियों को संदिग्ध और अनुशासनहीन मानते हुए उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी है। रिपोर्ट पर स्वीकृति मिलते ही दोनों आरोपितों को किसी अन्य जेल में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। जेल सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपितों की गतिविधियां सामान्य बंदियों से अलग पाई गईं। मुलाकात, संपर्क और अन्य बंदियों पर प्रभाव जमाने की कोशिशों को लेकर जेल प्रशासन सतर्क है, जिसके बाद दोनों की निगरानी बढ़ा दी गई।
समीक्षा के बाद प्रशासन इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इनकी मौजूदगी से जेल की सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन प्रभावित हो सकता है। पशु तस्करी नेटवर्क का सरगना है जवाहिर यादव कुशीनगर जिले का रहने वाला जवाहिर यादव महुआचाफी कांड का मुख्य आरोपित है। जांच में सामने आया था कि वह संगठित पशु तस्करी नेटवर्क का संचालन कर रहा था। आरोप है कि बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय गिरोह के जरिए पशुओं की अवैध ढुलाई और तस्करी कराई जाती थी। इस नेटवर्क में कई जिलों के तस्कर, वाहन चालक और स्थानीय मददगार शामिल थे। पुलिस ने पैर में गोली मारकर जवाहिर को गिरफ्तार कर जेल भेजवाया। महुआचाफी में दीपक हत्याकांड में शामिल होने की विवचेना एसटीएफ कर रही है। जेल में भी उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। फर्जी आईएएस बनकर करता था ठगी सीतामढ़ी जिले के मेहसौल थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड नंबर 37, मेहसौल पूर्वी निवासी गौरव कुमार खुद को आईएएस अधिकारी बताकर लंबे समय तक लोगों को ठगता रहा। वह सरकारी अफसरों जैसी भाषा, पहनावा और व्यवहार अपनाकर लोगों को भरोसे में लेता था। जांच में खुलासा हुआ कि वह नौकरी दिलाने, तबादला कराने और सरकारी कामों में मदद के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूलता था। उसके खिलाफ कई शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने जांच की, जिसमें उसके सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए। इसके बाद करीब दस दिन पहले उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। दबदबा बनाने की कोशिश बनी वजह जेल सूत्रों के मुताबिक, दोनों ही आरोपित खुद को प्रभावशाली दिखाने और अन्य बंदियों पर दबदबा बनाने की कोशिश कर रहे थे। कुछ मामलों में बाहरी संपर्कों को लेकर भी प्रशासन को संदेह हुआ। इन्हीं कारणों से जेल प्रशासन ने दोनों को संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए जेल बदलने की संस्तुति की है।

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