
15 स्थानों पर पानी के नमूने जांचे, 27 जगह पाइप लाइन की मरम्मत
Gorakhpur News - इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। नगर निगम ने जलापूर्ति और सीवर व्यवस्था की निगरानी के साथ मलिन बस्तियों में पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए विशेष अभियान चलाया है।
गोरखपुर मुख्य संवाददाता। इंदौर में दूषित पेयजल से हुई मौतों के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में गोरखपुर नगर निगम ने जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए व्यापक अभियान शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुपालन में गोरखपुर नगर निगम ने पेयजल एवं सीवर व्यवस्था की सघन निगरानी शुरू कर दी है। शनिवार को नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर जलकल विभाग ने विशेष अभियान चलाया गया, जिसके तहत महानगर में 15 विभिन्न स्थानों पर ओटी (आर्थोटोलिडाइन) टेस्ट के माध्यम से पानी के नमूने एकत्र कर जांच के लिए भेजे गए।
इसके साथ ही विरासत गलियारा और ग्रीन सिटी में सड़क चौड़ीकरण और अन्य स्थान पर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन का 27 स्थानों पर मरम्मत कर जल रिसाव को तत्काल ठीक कराया गया। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा, स्वच्छ जल संबंधी कार्यो में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी तय कर संबंधित के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महानगरवासियों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। मलिन और सघन बस्तियों में अभियान शुरू शनिवार से महानगर की सभी 110 मलिन बस्तियों में स्वच्छ और निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए भी विशेष अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए जलकल महाप्रबंधक रघुवेंद्र कुमार, सहायक अभियंता सत्येश कुमार, अवर अभियंता धीरज वर्मा, राकेश यादव, सूर्य सेन को निर्देशित किया गया है। जलकल विभाग की टीमें नलकूपों, हैंडपंपों, पाइप लाइनों और पानी की टंकियों की लगातार जांच कर रही हैं, ताकि किसी भी स्तर पर दूषित पानी की आपूर्ति न हो। शुक्रवार को ही इस संबंध में प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद द्वारा नगरीय निकाय निदेशक, नगर आयुक्तों एवं जल निगम के प्रबंध निदेशक को जारी शासनादेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सीवर, नाली और पेयजल पाइप लाइन में कहीं भी टूट-फूट या रिसाव पाए जाने पर उसे तत्काल ठीक कराया जाए। साथ ही जलापूर्ति वाली पानी की टंकियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। पानी के नमूनो की होगी जांच सहायक अभियंता जलकल सत्येश कुमार ने बताया कि उपभोक्ताओं के नल के उपयोग प्वाइंट से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाएगी। जांच में क्लोरीन की मात्रा के लिए ओटी टेस्ट, वायरस (वायरोलॉजिकल), बैक्टीरिया (बैक्टीरियोलॉजिकल) और रासायनिक विश्लेषण शामिल होगा। नमूनों की जांच स्थानीय स्तर पर कराने के साथ लखनऊ के लैब में भी कराया जाएगा। यही नहीं, मलिन बस्तियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पुरानी पेयजल पाइप लाइनों को प्राथमिकता के आधार पर बदलने और किए गए कार्यों का विवरण एक सप्ताह के भीतर शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

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