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मानक के अनुसार सड़क होगी तभी स्वीकृत होगा मकान-दुकान का मानचित्र

मानक के अनुसार सड़क होगी तभी स्वीकृत होगा मकान-दुकान का मानचित्र

संक्षेप:

Gorakhpur News - नए बिल्डिंग बायलाज में बदलाव से आवास बनाने में खड़ी हुई बड़ी बाधा आवास के

Dec 24, 2025 02:45 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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गोरखपुर, वरिष्ठ संवाददाता प्रमुख बाजार के साथ ही मोहल्लों में ट्रैफिक जाम और गाड़ी खड़ी करने की समस्या को देखते हुए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने आवासीय से लेकर कमर्शियल भवनों के मानचित्र को स्वीकृत करने को लेकर सख्ती कर दी है। नए बिल्डिंग बायलॉज को कड़ाई से लागू करते हुए जीडीए ने निर्णय लिया है कि शहर के नए इलाकों में आवासीय मानचित्र तभी मंजूर होगा, जब मौके पर 9 मीटर चौड़ी सड़क होगी। इसी तरह कमर्शियल भवनों के मानचित्र को लेकर 12 मीटर चौड़ी सड़क की अनिर्वायता कर दी गई है। सख्ती से प्राधिकरण में दर्जनों मानचित्र लटक गए हैं।

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प्रदेश में पिछले जुलाई महीने में नया बिल्डिंग बायलॉज लागू हुआ है। इसके प्रावधानों को लेकर प्राधिकरण सजग है। पिछले दिनों प्रदेश भर के प्राधिकरणों ने आवासीय और कमर्शियल भवनों के मानचित्र स्वीकृति को लेकर सड़क के मानक को लेकर शासन से गाइड लाइन मांगा था। जिसके बाद शासन ने सभी प्राधिकरणों को पत्र भेजकर साफ कर दिया है कि आवासीय मानचित्र के लिए 9 मीटर और कमर्शियल भवनों के लिए 12 मीटर चौड़ी सड़क का कड़ाई से अनुपालन होगा। इसे लेकर प्राधिकरण के अधिकारी जिले के प्रमुख आर्किटेक्ट के साथ वर्कशॉप में सभी बिंदुओं पर चर्चा कर चुके हैं। नए गाइडलाइन के चलते प्राधिकरण में दर्जनों मानचित्र अटके हुए हैं। पिछले दिनों प्राधिकरण की मानचित्र से होने वाली आय को लेकर स्थानीय के साथ शासन स्तर पर चिंताएं सार्वजनिक हुईं हैं। दरअसल, शहर में प्राधिकरण के ले-आउऊ अप्रूव कालोनियों को छोड़ दें तो ज्यादातर मोहल्लों में 20 से 25 फीट चौड़ी सड़क ही दिखती है। आर्किटेक्ट मनीष मिश्रा का कहना हैं कि आवासीय भवनों के लिए 9 मीटर चौड़ी सड़क की अनिवार्यता का अनुपालन होने से 90 फीसदी मानचित्र अटक सकते हैं। इससे प्राधिकरण को राजस्व की हानि तो होगी ही, अवैध निर्माण पर अंकुश लगाना मुश्किल साबित होगा। ऐसे में आवास की जरूरतों को देखते हुए प्राधिकरण बीच का रास्ता निकालने की जरूरत है। हालांकि शहर के पुराने मोहल्लों जिसे प्राधिकरण में निर्मित क्षेत्र माना गया है वहां आवास के लिए 4 मीटर सड़क का मानक होने की बात कही जा रही है। इसमें घंटाघर, माया बाजार, जाफरा बाजार, रेती रोड, लाल डिग्गी जैसे घनी आबादी वाले इलाके आ सकते हैं। अभी तक सड़क चौड़ीकरण की प्रत्याशा में स्वीकृत होते हैं मानचित्र पहले रोड चौड़ीकरण की प्रत्याशा में ही मानचित्र पास हो जाता था। अब नए बिल्डिंग बायलाज में विद्यमान रोड को ही आधार माना गया है। पहले मानचित्र पास कराने के लिए रोड वाइडनिंग (चौड़ीकरण) का नियम था। यदि किसी की जमीन के सामने कम चौड़ी सड़क भी होती थी तो नक्शा पास कर दिया जाता था। भूखंड के मालिक को रोड वाइडनिंग के लिए जगह छोड़नी पड़ती थी। मौके पर जाने वाले प्राधिकरण के अवर अभियंता इसकी जांच करते थे और रोड वाइडनिंग की प्रत्याशा में नक्शे का आवेदन अनुमोदित हो जाता था। कोट- नए बिल्डिंग बायलॉज में सड़क की चौड़ाई को लेकर बदलाव किया गया है। कुछ बिंदुओं पर भ्रम दूर करने के लिए जीडीए समेत अन्य प्राधिकरणों ने भी शासन से मार्गदर्शन मांगा है। शासन के दिशा निर्देशों पर अमल किया जाएगा। -आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए