
टूटते तारों से जगमगाएगा आसमान, आज रात बरसेंगी उल्काएं
Gorakhpur News - जैमिनिड्स उल्काओं से मध्य रात्रि आकाश में दिखाई देगा अद्भुत नजारा अनुकूल मौसम में प्रति
गोरखपुर, निज संवाददाता। वर्ष 2025 अपनी विदाई से पहले रोमांचक खगोलीय घटना का गवाह बनने वाला है। 14 दिसंबर यानि रविवार की रात आकाश में उल्का वर्षा का शानदार नजारा दिखाई देगा। दिसंबर माह में होने वाली इस प्रसिद्ध खगोलीय घटना को मिथुन (जैमिनिड्स) उल्का वर्षा कहा जाता है। अनुकूल मौसम रहने पर इस बार प्रति घंटे 40 से 70 उल्काएं देखी जा सकती हैं। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि यह उल्का वर्षा रविवार की रात से शुरू होकर मध्य रात्रि के बाद अपने चरम पर होगी। गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में यह दृश्य रात्रि 12 बजे से भोर 4 बजे तक सबसे अधिक स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि पृथ्वी वार्षिक परिभ्रमण के दौरान सूर्य की परिक्रमा करती है, इस दौरान पृथ्वी कई बार उन कक्षाओं से होकर गुजरती है, जहां धूमकेतुओं द्वारा छोड़ा गया मलबा मौजूद होता है। ये धूमकेतु लंबी दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में सूर्य की परिक्रमा करते रहते हैं और अपने पीछे छोटे-बड़े कण छोड़ जाते हैं। जब पृथ्वी इन कणों से होकर गुजरती है तो ये अंतरिक्षीय टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जाते हैं। वायुमंडल में प्रवेश करते ही गुरुत्वाकर्षण बल और वायुमंडलीय घर्षण के कारण ये कण जल उठते हैं और कुछ क्षणों के लिए रात के आकाश में चमकते हुए दिखाई देते हैं। इनकी गति लगभग 70 किलोमीटर प्रति सेकंड या उससे अधिक होती है, जिसके चलते अधिकांश उल्काएं 130 से 180 किलोमीटर की ऊंचाई पर ही जलकर समाप्त हो जाती हैं। यही दृश्य लोगों को टूटते तारे का आभास कराता है। खगोलविद ने बताया कि उल्काएं वर्षभर छिटपुट रूप से दिखाई देती रहती हैं, लेकिन कुछ खास महीनों में इनकी संख्या अधिक हो जाती है। दिसंबर माह में होने वाली मिथुन (जैमिनिड्स) उल्का वर्षा ऐसी ही एक प्रमुख खगोलीय घटना है, जिसे देखने के लिए आकाश प्रेमियों में विशेष उत्साह रहता है। सबसे शानदार उल्काओं में से एक जैमिनिड्स अमर पाल सिंह का कहना है कि जैमिनिड्स उल्काएं 7 से 17 दिसंबर के बीच दिखाई देंगी, पर 14 दिसंबर को चरम पर होगी। उल्का वृष्टियों में जैमिनिड्स और पर्सिड्स सबसे शानदार मानी जाती हैं। जैमिनिड्स दिसंबर और पर्सिड्स अगस्त में आती हैं, जिनमें जैमिनिड्स को 'रॉक कॉमेट' कहा जाता है। ये अक्सर पीले रंग की दिखती हैं, जबकि पर्सिड्स सबसे तेज और चमकदार होती हैं। अधिकांश उल्का वर्षाएं किसी धूमकेतु से जुड़ी होती हैं, लेकिन जैमिनिड्स उल्का वर्षा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका स्रोत एक क्षुद्रग्रह-3200 फेथॉन है। यही कारण है कि इसे दुनिया की सबसे अनोखी और विश्वसनीय उल्का वर्षाओं में गिना जाता है। जैमिनिड्स उल्का वर्षा के दौरान उल्काएं आकाश में किसी भी दिशा से दिखाई दे सकती हैं, लेकिन अधिकतर उल्काएं उत्तर-पूर्व दिशा से आती हुई प्रतीत होंगी। ये उल्काएं मिथुन (जेमिनी) तारामंडल के क्षेत्र से निकलती हुई दिखाई देती हैं। बिना उपकरण के दिखेगा नजारा खगोलविद का कहना है कि इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी दूरबीन या उपकरण की आवश्यकता नहीं है। किसी खुले, अंधेरे और साफ स्थान से नंगी आंखों के साथ ही इस दृश्य का आनंद लिया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को यह दृश्य अधिक स्पष्ट दिखाई देगा।

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