चाय महंगी और कई व्यंजन मेन्यू से बाहर

Apr 07, 2026 02:06 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गोरखपुर
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Gorakhpur News - सचित्र गैस किल्लत से स्ट्रीट फूड कारोबार प्रभावित गोरखपुर में रसोई गैस की किल्लत

चाय महंगी और कई व्यंजन मेन्यू से बाहर

गैस किल्लत से स्ट्रीट फूड कारोबार प्रभावित गोरखपुर में रसोई गैस की किल्लत का असर अब आम जनजीवन के साथ स्ट्रीट फूड और छोटे रेस्टोरेंट कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडर की कमी और खाद्य सामग्रियों की बढ़ती कीमतों के बीच फूड वेंडरों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई दुकानदारों ने अब कोयले और लकड़ी की भट्ठियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है, वहीं कुछ ने अपने मेन्यू से कई व्यंजन हटा दिए हैं। हालत यह है कि कहीं चाय की कीमत बढ़ गई है तो कहीं आधी दुकानें बंद हो गई चुकी हैं।10

के बजाए 12 रुपये में चायस्थान: मोहद्दीपुर स्मार्टव्हील फूडकोर्टसमय: अपराह्न 03 बजेमोहद्दीपुर स्मार्टव्हील के नजदीक रसोई गैस की किल्लत से स्ट्रीट फूड वेंडर की परेशानी काफी बढ़ गई है। वेंडर एक तरफ गैस सिलेंडर की किल्लत तो दूसरी तरफ समान की बढ़ती कीमतों के बीच पिस रहे हैं। कई जगह अब भट्ठियों का इस्तेमाल हो रहा। शिव कृपा टी स्टाल के संचालक ने चाय की कीमत 10 रुपए से बढ़ा कर 12 रुपए कर दिया है। वेंडर दीपक कुमार बताते हैं कि गैस की किल्लत की वजह से सप्ताह में 02 दिन दुकान बंद रहती है। बाजार में रिफाइंड, बेसन सब महंगा हो गया लेकिन प्रतिस्पर्धा के कारण कीमत नहीं बढ़ा पा रहे। आसपास लगने वाले फूड वेंडर के ठेले बंद हो गए हैं।मटन और फिश थॉली नहीं कर रहे सर्वसमय: 03 बजे दोपहरस्थान: रेलवे स्टेशन रोड फूड जोनरेलवे स्टेशन रोड स्थित मालकिन होटल में गैस सिलेंडर के अभाव में कोयले की भट्टियों पर ग्राहकों के लिए भोजन और नाश्ता बन रहा है। होटल मालिक अंगद जायसवाल बताते हैं कि गैस कमी के कारण ज्यादा देर में पकने वाले व्यंजन बंद कर दिए हैं। खासकर 200 रुपये की मटन थाली और 150 रुपये की फिश थॉली पूरी तरह से बंद है। मटन और फिश खाने वाले ग्राहक अब नहीं आ रहे हैं। गैस से चलने वाला तंदूर भी बंद है। 5000 हजार रुपये में कोयले का तंदूर बनवाए हैं। टेस्टी जायका रेस्टोरेंट के संचालक ने बताया कि उनके यहां शाकाहारी व्यंजन मिलता है। गैस की कमी के कारण ग्राहकों को ऑन डिमांड कोई व्यंजन नहीं दे पा रहे हैं।बंद हो गई आधी दुकानें, कमाई भी आधीस्थान: एमएमएमयूटीसमय: शाम 5 बजेएमएमएमयूटी के सामने स्ट्रीट फूड के स्टॉलों की संख्या और उनकी कमाई आधी हो गई है। इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर हर दिन शाम को करीब 50 दुकानें लगती थीं, लेकिन अब 22-23 ही रह गई हैं। विजय कुमार गौड़ ने बताया कि उन्होंने घर पर कोयले की भट्ठी बना ली है। घर से ही सामान बनाकर लाते हैं और यहां गर्म करके बेच रहे हैं। इसमें गैस कम लग रहा है।नए कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहेस्थान: बिछिया सुपर मार्केटसमय: 5 बजेबिछिया सुपर मार्केट में दर्जन भर से अधिक खाने पीने के स्टॉल हैं। यहां पीएसी कैंप, रेलवे कालोनी और बड़े स्कूलों के चलते पूरे दिन चहल-पहल रहती है। इमरती बनाने वाले हरीशचन्द्र गुप्ता कहते हैं कि सिलेंडर को लेकर दिक्कत है। पहले हाकर मोबाइल से पूछ कर सिलेंडर देते थे। नये कॉमर्शियल सिलेंडर के लिए अप्लाई किया है। संतोषी निषाद का कहना है कि गोदाम में सभी काम लकड़ी और कोयला की भट्ठी पर हो जाता है। लेकिन दुकान में यह संभव नहीं है। प्रतिदिन दो किलोग्राम एलपीजी का खर्च है। मिठाई के दुकानदार आलोक सिंह का कहना है कि अब मिठाई की वह बेराइटी ही बना रहे, जो सर्वाधिक बिकता है।स्थान: नौका विहार फूडकोर्टसमय: शाम 7 बजेकमाई ठप, कारोबार संकट मेंनौका विहार पर 80 के करीब फूडकोर्ट संचालित हैं। यहां के दुकानदार इन दिनों 2000 से 2500 रुपये तक में सिलेंडर खरीद रहे हैं। हालांकि प्रतिस्पर्धा के कारण कीमत बढ़ा नहीं पा रहे हैं। अब तक चाय, मोमोज, मैगी व अन्य फास्ट फूड के दाम यथावत हैं। कई ने स्टॉफ कम कर दिया है। शिवपाल यादव कहते है कि,गैस महंगी होने से कमाई आधी रह गई है, कारोबार संकट में है। विवेक बताते हैं कि, किराया, गैस और मजदूरी सब महंगा हो गया है। कभी-कभी सिलेंडर नहीं मिलता, तब दुकान बंद करनी पड़ती है।

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